हर्ष मायर ने बताया राष्ट्रीय पुरस्कार मिलने के मायने

मुंबई। अपनी पहली फिल्म ‘आई एम कलाम’ के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार जीतने वाले अभिनेता हर्ष मायर के लिए पुरस्कार कुछ खास मायने नहीं रखते, बल्कि वह इस बात पर जोर देते हैं कि फिल्म में उनके काम से युवा प्रेरित हो सकें, यही उनके लिए सबसे बड़ा पुरस्कार है। हर्ष हाल में फिल्म ‘हिचकी’ में नजर आए थे और इसके लिए उन्हें आलोचकों से खूब तारीफ मिली थी। खुद रानी मुखर्जी ने भी उनके अभिनय की सराहना की थी।

‘हिचकी’ करने से पहले क्या कभी महसूस हुआ कि आपको अलग अपनी फिल्म करनी चाहिए, बड़े सितारों के बीच आपका काम दब जाएगा, इस सवाल पर हर्ष ने कहा, “नहीं। मुझे लगता है कि अकेला इंसान कुछ नहीं कर सकता है। हमें हमेशा लोगों का सहारा लेना पड़ता है। हिचकी के बाद मुझसे रानी मुखर्जी ने कहा था कि तू तो छा गया। मैं फिल्म के सेट पर एक नवोदित कलाकार की तरह जाता था, जब उनको मेरे बारे में पता चला तो वह बहुत खुश हुईं।

उन्होंने कहा, “मैंने कभी नहीं सोचा कि बड़े कलाकारों संग काम करने से मेरा काम दब जाएगा, हालांकि मैं हमेशा एक अच्छे किरदार पर ध्यान केंद्रित करता हूं। मैं इस बात का खास ध्यान रखता हूं कि फिल्म में मेरी भूमिका दमदार होनी चाहिए। अगर आप अपना काम ईमानदारी से करते हैं तो आपको कोई पीछे नहीं कर सकता। किस तरह के किरदार करना चाहते हैं? यह पूछे जाने पर हर्ष कहते हैं, “मैं हमेशा से ऐसे किरदार करना चाहता हूं जिनका समाज में अस्तित्व हो। वह प्रांसगिक हों या पर्दे पर लोग उन किरदारों को खुद से जोड़ सकें। मैं ऐसा कोई किरदार नहीं करना चाहता जो अचानक हवा में उछलकर विलेन को लात मार देता हो।”

हर्ष ने मात्र छह साल की उम्र से काम करना शुरू कर दिया था। वह अपने अब तक के सफर के बारे में कहते हैं, “मैं छह-सात साल की उम्र से थियेटर कर रहा था। दूरदर्शन पर एक शो आता था ‘क्योंकि जीना इसी का नाम है’, मैं उसमें बतौर जूनियर आर्टिस्ट काम करता था। मैं शुरू से ही फिल्मी टाइप का था। लोगों की नकल करता था। मेरे मामा ने मेरे अभिनय कौशल को पहचाना और नई दिल्ली के श्रीराम थियेटर में दाखिल करा दिया। मैंने कई थियेटर किए। और ऑडिशन देते-देते एक दिन मुझे ‘आई एम कलाम’ मिल गई।”

सर्वश्रेष्ठ बाल कलाकार के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार जीतने के अलावा हर्ष हैदराबाद अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव, लॉस एंजेलिस रिवर रॉक फिल्म महोत्सव और मिंस्क फिल्म महोत्सव जैसे कई अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में पुरस्कार जीत चुके हैं।दशकों तक काम करने के बावजूद बड़े से बड़े अभिनेताओं को राष्ट्रीय सम्मान हासिल नहीं हो पाता लेकिन आपको पहली फिल्म के लिए ही राष्ट्रीय पुरस्कार मिल गया, इस बारे में हर्ष कहते हैं, “सच कहूं तो मुझे उस वक्त राष्ट्रीय पुरस्कार का मतलब तक नहीं पता था। मैं उस समय शायद 13 साल का था। मुझसे राष्ट्रीय पुरस्कार से पहले कई अंतर्राष्ट्रीय फिल्म समारोह में पुरस्कार मिल चुके थे। मैं पुरस्कारों को सामान्य रूप से ही लेता था, मैं फिल्म उद्योग से नहीं था और न ही मुझे इन सब चीजों की कीमत पता थी। मेरे लिए यह अच्छी बात थी क्योंकि इस तरह यह सब मेरे ऊपर हावी नहीं हो पाया।”

उन्होंने कहा, “मैं जब इसे ग्रहण करने गया तो वहां मैंने बड़े-बड़े अभिनेताओं को देखा, तब मुझे अहसास हुआ कि वाकई राष्ट्रीय पुरस्कार का महत्व ही अलग होता है, हालांकि मैंने अपने जीवन में पुरस्कार को कभी गंभीरता से नहीं लिया।”

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