हर्षद मेहता बनाम नारायण मूर्ति, हर्षद मेहता पर क्यों बनाई गई वेब सीरीज़

हर्षद मेहता वह नाम जिससे आज-कल हर कोई वाकिफ़ है। खास कर देश के युवा, ऐसा क्यों है इसकी वजह हम आपको बताएँगे. दूसरा नाम नारायण मूर्ति, शायद आपको न पता हो, लेकिन ये नाम आपको प्रभावित ज़रूर करेगा.

मुंबई: हर्षद मेहता वह नाम जिससे आज-कल हर कोई वाकिफ़ है। खास कर देश के युवा, ऐसा क्यों है इसकी वजह हम आपको बताएँगे.
दूसरा नाम नारायण मूर्ति, शायद आपको न पता हो, लेकिन ये नाम आपको प्रभावित ज़रूर करेगा, तो आइये जानते है, इन दोनों के बारे में.

सन 1980 की जब हर्षद मेहता की उम्र 26 और नारायण मूर्ति की उम्र लगभग 35 थी। तब इन दोनों ने भारत में अपना-अपना व्यवसाय शुरू किया था। दोनों मध्यमवर्गीय परिवार से थे और जिंदगी में काफी मुश्किलें थी। लेकिन कुछ बड़ा करने का सपना इन दोनों की आँखों में था।

स्टॉक मार्केट का बच्चन

इन दोनों ने अपने-अपने कारोबार को बढ़ाने की मेहनत शुरू की, करीब 10 साल बाद सन 1990 में हर्षद मेहता एक सितारे की तरह बढ़ रहे थे। और उन्हें शेयर मार्केट का बिग बुल कहा जाने लगा था, यहां तक कि लोग स्टॉक मार्केट का बच्चन भी कहने लगे थे। उनके पास 15,000 SQ का सी फेसिंग हाउस था। और कई महंगी कारें। हर्षद शांतिलाल मेहता एक भारतीय शेयर ब्रोकर थे। 1992 के भारतीय प्रतिभूति घोटाले में मेहता की भागीदारी ने उन्हें बाजार के हेरफेर के रूप में बदनाम कर दिया।

दूसरी तरफ नैतिकता और ईमानदारी के साथ 10 साल की कड़ी मेहनत करने के बाद भी नारायण मूर्ति अपनी आईटी कंपनी इंफोसिस को बचाने में लगे थे। मूर्ति ने इन्फोसिस के निर्माण के लिए एक सरल जीवन का नेतृत्व किया।

सन 2000 में हर्षद मेहता को 50 से अधिक दीवानी और हजारो करोड़ रुपये की धोखाधड़ी के मामलों में जेल हो गई, 31 दिसंबर 2001 की रात को उनकी दिल का दौरा पड़ने से मौत हो गई। हालाँकि इकोनॉमिक टाइम्स द्वारा रिपोर्ट किया गया कि कुछ वित्तीय विशेषज्ञों ने माना कि हर्षद मेहता ने कोई धोखाधड़ी नहीं की उन्होंने सिर्फ सिस्टम के लूप होल्स का शोषण किया।

न्यू इंडिया के युवाओं के लिए ड्रीम कंपनी

वहीं दूसरी ओर कड़ी मेहनत के बाद नारायण मूर्ति का इंफोसिस एक प्रेरणा बन गया और न्यू इंडिया के युवाओं के लिए ड्रीम कंपनी। एक बार फिर हर्षद मेहता का नाम लोगो की जुबां पर है, ऐसा इसलिए है क्योकि हाल ही में हर्षद मेहता पर एक सुपर हिट वेब सीरीज़ बनाई गई है, जो बहुत से युवाओं को जल्दी पैसे कमाने की ओर लुभा रही है। लेकिन क्या आपको नारायण मूर्ति की कहानी याद है। किस तरह जीवन भर कड़ी मेहनत, विश्वास, निष्ठा और ईमानदारी के साथ मेहनत कर उन्होंने सभी को प्रेरित किया।

आज लगभग 2.5 लाख कर्मचारी भारत और विदेशों में इन्फोसिस कम्पनी में काम करते हैं। और वो सभी उनकी कामयाबी का परिचय दे रहे है। इससे हमे ये सीख मिलती है कि जीवन में कुछ ऐसा बनाएं जो हमारी आने वाली पीढ़ी की मदद करे, नाकि कम वक्त और ग़लत तरीके से कमाई गई वो कामयाबी जो बस चंद दिनों की हो।

यह भी पढ़े:महँगाई के आँकड़ों व कोविड-19 के टीकों पर रहेगी निवेशकों की नज़र

Related Articles