क्या आपके भी दिमाग पे कर रखा है डिप्रेशन ने टोटका?

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जिसके बारे में कोई बात नहीं करता क्यूंकि लोगो के दिमाग में ये दिमागी बीमारी केवल एक वेहम बनकर रह गयी है और यही इसके समाधान में सबसे बड़ी बाधा है। विश्‍व स्‍वास्‍थ्‍य संगठन आगाह कर चुका है कि 2020 तक डिप्रेशन दुनिया की दूसरी बड़ी बीमारी बन जाएगी। लेकिन हममें से बहुत से लोग जानते ही नहीं कि डिप्रेशन को कैसे पहचानें।
जानकार कहते हैं कि अगर समय पर डिप्रेशन से गुजर रहे व्‍यक्ति से मेलजोल बढ़ाया जाए तो इससे उबरने में बड़ी मदद हो सकती है। डिप्रेशन के कुछ खास लक्षण होते हैं, खुद डिप्रेशन से गुजर रहा व्‍यक्ति इन संकेतों को पहचान कर इसके इलाज के लिए आगे बढ़ने का विचार कर सकता है। आइए नजर डालें डिप्रेशन के कुछ संकेतों पर:

उदासी और खालीपन 
अगर आपको अकसर मन में खालीपन और उदासी महसूस हो तो इसे अनदेखा न करें। इसके सा‍थ अगर खुद से नफरत हो और लगने लगे कि दुनिया में आपकी कोई अहमियत नहीं है तो समझ जाइए आप डिप्रेशन का शिकार हो चुके हैं।

  • एक नई स्टडी के अनुसार डिप्रेशन लोगों को मरने जैसी स्थिति में पहुंचा सकता है। इसे ‘साइकोजेनिक डेथ’ कहते हैं। जीते जी मरने की यह स्थिति अलग-अलग चरण में प्रभावित करती है और धीरे-धीरे व्यक्ति को मौत के मुंह में धकेल देती है। आपके आसपास कोई ऐसा व्यक्ति है तो आपको उसकी तुरंत मदद करनी चाहिए, इससे पहले कि बहुत देर हो जाए…
  • व्यक्ति का समाज से कट जाना डिप्रेशन के शुरुआती लक्षणों में से एक है। अगर समय पर इसे नहीं समझा गया तो व्यक्ति समाज से पूरी तरह से कट सकता है। यह समस्या युद्ध के मरीजों में भी देखी जाती है जिन्होंने अपनी आंखों से मौतें होती देखी हों। इसमें व्यक्ति भावनाएं जाहिर करना छोड़ देता है और उसे अपने आसपास से कोई फर्क नहीं पड़ता।
  • इसमें व्यक्ति अपनी जिंदगी और अपने आसपास को लेकर बेहद उदास हो जाता है। वह बहुत नकारात्मक और खुद को बेकार महसूस करता है। उसकी रचनात्मकता खत्म हो जाती है और वह अपने लिए भी कोई काम नहीं करना चाहता है। छोटा सा छोटा काम उसे बहुत भारी लगता है।
  • समाज से कटने की प्रक्रिया में इंसान एक लेवल और आगे चला जाता है। इसमें उसका दिमाग सो जाना चाहता है। यह कोमा जैसी स्थिति होती है।
  • इसमें डिप्रेशन का शिकार व्यक्ति के पेन रिसेप्टर्स काम करना बंद कर देते हैं। इससे उसे किसी तरह का दर्द महसूस नहीं होता है। वह किसी भी तरह की चोट पर प्रतिक्रिया भी नहीं देता है।
  • यह मौत से पहले की अवस्था होती है। इसमें इंसान को दुनिया से कोई मतलब नहीं रह जाता है और वह उठने से भी मना कर देता है। इसके बाद लगभग 2-3 दिन के अंदर मरीज की मौत हो सकती है।
  • डिप्रेशन से उबरना एक कठिन लड़ाई है लेकिन यह नामुमकिन नहीं है। आपको ऐसे व्यक्ति को उस स्थिति में धकेलना होगा जो उसे अच्छा लगता हो। इसके लिए मेडिकल रीहैबिलिटेशन और इलाज की भी सहायता ली जा सकती है।

घर से बाहर निकलने की इच्‍छा न हो 
बस आप अपने घर में अपने कमरे में अकेले रहना चाहें और बाहर जाकर लोगों से घुलना मिलना न चाहें तो बहुत मुमकिन है कि आपके मन में अवसाद घर कर रहा है।

Silhouette of person behind glass
अनिद्रा की परेशानी
अगर आपको लंबे समय से नींद नहीं आती है या रातों को नींद उचट जाए फिर नहीं आए तो समझ लिए यह डिप्रेशन की निशानी है। समय रहते इसका निवारण खोजने की कोशिश करें।

बिस्‍तर से उठने का जी न करे
कभी-कभी तो ठीक है लेकिन अगर अक्‍सर रात भर सोने के बाद बिस्‍तर से उठने का मन न करे तो यह सामान्‍य नहीं है। आप खुद को दुनिया से दूर करने की कोशिश कर रहे हैं।

किसी एक चीज पर फोकस न कर पाएं 
जब आप आसानी से एकाग्र न हो पाएं या बार-बार रोजमर्रा के कामों में भी आपकी एकाग्रता भंग होने लगे तो समझ जाइए कि ये डिप्रेशन के लक्षण हैं।

एंग्‍जाइटी और मूड खराब होना
अगर आप हमेशा नर्वस महसूस करें, तनाव में रहें और ऐसा लगता रहे कि कहीं कुछ गड़बड़ होने वाला है तो बहुत मुमकिन है कि ये डिप्रेशन के लक्षण हों। इसके अलावा बिना किसी बात के मूड खराब होना भी डिप्रेशन का संकेत है।

खुदकुशी के ख्‍याल 
अगर किसी को बार-बार अपना जीवन खत्‍म करने का ख्‍याल आए और लगे कि अब मेरे जीवित रहने का कोई कारण नहीं है, तो यह संकेत है कि वह गंभीर डिप्रेशन का शिकार है। सही समय पर डॉक्‍टरी सलाह से इससे बचा जा सकता है।
याद रखिये खुदखुशी में किसी की कोई खुशी नही है. डिप्रेशन बस एक पड़ाव है जीवन का, माना ये पड़ाव सभी के जीवन से होकर नही जाता लेकिन अगर इस पड़ाव पर हार कर आप खुद को हमेशा के लिए खो देंगे तो वो बेहतर दिन और नई मंजिल क्या करेगी जो आपकी राह देख रही है?
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