यहां पर गाय चारा नहीं बल्कि गाना सुनकर दे रहीं हैं ज्यादा दूध!

हमारे देश में कुछ न कुछ अजीबो- गरीब सुनने को मिलता ही रहता हैं। पर क्या आपने सुना हैं कि गाय गाना सुनकर दूध ज्यादा देती हो। जी हां ! ये सच हैं। संगीत सुनना हर किसी को पसंद होता हैं। आपने अक्सर अपने आसपास संगीत से प्यार करने वाले कई तरह के लोग देखे होगें। कुछ लोग संगीत को जीवन बताते हैं तो कई कुछ कर दिखाने की प्रेरणा। संगीत हमारी जिन्दगी में बहुत मायने रखता हैं। खाली समय में हमारा टाइम पास करवाता हैं तो कभी मोटिवेट भी करता हैं। पर क्या आपको पता हैं अब संगीत लोगों के साथ पशुओं को पसंद आने लगा है।

गौशाला

आज हम आपको बताने जा रहे हैं राजस्थान की एक जगह के बारे में। राजस्थान में नीमकाथाना नाम की एक जगह हैं जहां कि एक गौशाला में गायों को गाना सुनना बहूत पसंद हैं। यहा गायो को करीब 3 घंटे रोजाना संगीत सुनाया जा रहा है क्योंकि वहां के प्रबन्धकों ने यह दावा किया है कि संगीत सुनने की वजह से उनके यहां करीब 20 प्रतिशत दूध उत्पादन में बढ़ोतरी हुई है।

मीडिया से बातचीत के दौरान गौशाला अध्यक्ष दौलतराम ने गौशाला में रहने वाली 500 से गायों को साल 2016 से सुबह सुबह 5।30 बजे से 8।30 बजे तक और शाम को 4।30 बजे से 8।00 बजे तक एम्पलीफायर के जरिए भजन सुनाए जाते हैं। दौलतराम ने बताया कि किसी गौभक्त ने उन्हें ऐसा करने की सलाह दी थी। दौलतराम ने बात मानकर साल 2016 से गायों को संगीत सुनान शुरू कर दिया जिसके बाद जल्द ही इसके अच्छे नतीजे सामने आने लगे।

दौलतराम ने इस बारे में बताया कि गायों को भजनों के अलावा शास्त्रीय संगीत भी सुनाया जाता है। दौलतराम का मानना है कि संगीत से पहले गायों के चेहरे सुस्त रहते हैं लेकिन गाना सुनते ही उनके चेहरे पर खिलावट दिखाई देने लगती है। संगीत सुनकर गौशाला की कई दुर्बल गायें भी तदुंरूस्त हो गई हैं। बता दें कि राज्य सरकार दौलतराम को इस गौशाला के संचालन के लिए सम्मानित भी कर चुकी है। गौशाला में गायों की 24 घंटें देखभाल करने के लिये 22 कर्मचारी है ।

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