जबरन शारीरिक संबंध बनाने पर हाईकोर्ट ने सुनाया बड़ा फैसला, वैवाहिक बलात्कार से आरोप…

रायपुर: छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने एक बड़ा फैसला सुनाया है कि अगर पति अपनी पत्नी के साथ जबरन शारीरिक संबंध बनाता है तो वो रेप की श्रेणी में नहीं आएगा। गुरुवार को कोर्ट ने एक मुकदमे में सुनवाई करते हुए ये फैसला सुनाया है और पति को ‘वैवाहिक बलात्कार’ के आरोपों से मुक्त कर दिया है।

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने गुरुवार को फैसला सुनाया है कि, “कानूनी रूप से विवाहित पत्नी के साथ पति द्वारा यौन संबंध या कोई भी यौन कृत्य बलात्कार नहीं है, भले ही यह बलपूर्वक अथवा पत्नी के इच्छा के विरुद्ध किया गया हो।”

वैवाहिक बलात्कार की कानूनी परिभाषा

साधारण शब्दों में कहा जाए तो वैवाहिक बलात्कार भी घरेलू हिंसा का ही एक विकृत रूप है। इसका अर्थ पत्नी की मर्जी के बिना उसके साथ यौन संबंध बनाना अथवा ऐसा करने के लिए मजबूर करना है। लेकिन भारतीय दंड संहिता में पूरी तरह से इसकी व्याख्या नहीं की गई है। आईपीसी की धारा 376 बलात्कार जैसे दोष के लिए कड़ी सजा का प्रावधान करता है।

आईपीसी की इसी धारा के अनुसार पत्नी से रेप करने वाले पति के लिए सजा का प्रावधान तो है बशर्ते पत्नी की उम्र 12 साल से कम हो। IPC की धारा 376 में कहा गया है कि 12 साल से कम उम्र की पत्नी के साथ पति अगर रेप करता है तो उस पर जुर्माना या उसे दो साल तक की सजा या दोनों हो सकती हैं।

क्या था केस

इस केस में अदालत ने कहा कि किसी पुरुष द्वारा अपनी ही पत्नी के साथ यौन संबंध, जिसकी आयु अठारह वर्ष से कम न हो, बलात्कार नहीं है। इस मामले में, शिकायतकर्ता आरोपी की कानूनी रूप से विवाहित पत्नी है, इसलिए आरोपी पति द्वारा उसके साथ यौन संबंध या कोई भी यौन कृत्य बलात्कार का अपराध नहीं माना जाएगा, भले ही वह बलपूर्वक या उसकी इच्छा के विरुद्ध हो।

 

Related Articles