दहेज के मामले में कोर्ट ने सुनाई ऐसी सजा, अब मांग करने में 10 बार सोचेंगे लोग

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नैनीताल। दहेज़ के लिए बहु पर अत्याचार कर रही सास पर निचली अदालत के सुनाये फैसले को पलटकर हाई कोर्ट ने मृतका की सास को दस हजार का अर्थदंड देते हुए दस साल आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही आरोपी ससुर, जेठ और जेठानी पर भी दहेज़ का दोषी करार ठहराया है। आरोप सिद्ध होने पर वो सजा काट चुके हैं इधर सास को जेल भेज दिया गया है।

दहेज के मामले

दहेज के मामले में हाई कोर्ट ने सास को दिया आजीवन कारावास

बता दें, रुद्रप्रयाग जिले की रहने वाली उर्मिला उर्फ गुड्डी की शादी जगदीश सिंह से हुई थी। साल 2008 फरवरी में दहेज़ को लेकर उसकी सास कश्मीरा देवी ने उर्मिला पर मिट्टी तेल छिड़क कर आग लगा दी थी। जब उसको अस्पताल में भर्ती कराया गया तभी उपचार के दौरान ही उर्मिला की मौत हो गयी थी।

उर्मिला ने मौत से पहले मजिस्ट्रेट को बयान दिया था कि उसकी सास ने उसको जलाया और ससुर, जेठ और जेठानी भी दहेज़ के दोषी हैं, जबकि मृतका का पति दिल्ली में नौकरी करता था। मामले को लेकर मृतका की मां राजेश्वरी देवी का 156 तीन का प्रार्थना पत्र अदालत को मजिस्ट्रेट के समक्ष दिया गया था।

इसके आधार ससुरालियों पर मुकदमा दर्ज किया गया था। निचली अदालत ने 25 मार्च 2010 को मामले में विचारण के बाद सास समेत सभी आरोपियों को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया था। निचली कोर्ट के फैसले के खिलाफ सरकार द्वारा हाई कोर्ट में अपील दायर की गई।

न्यायाधीश न्यायमूर्ति राजीव शर्मा व न्यायमूर्ति शरद कुमार शर्मा की खंडपीठ ने पूरा मामला सुनने और मृत्यु पूर्व बयान को पर्याप्त साक्ष्य मानते हुए सास को दहेज़ का दोषी करार दिया। इसके अलावा दस हजार रूपए का अर्थदंड लगाते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई।

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