High Court ने कहा- अगर जज करेंगे गलती को तो कैसे मिलेगा आम जनता को न्याय

प्रयागराजः इलाहाबाद हाईकोर्ट (High Court) ने रोक के बावजूद प्रिंटेड प्रोफार्मा पर समन आदेश जारी करने पर एसीजेएम बुलंदशहर को आगाह किया है। कोर्ट ने टिप्पणी की है कि अगर जज ही गलती करेंगे, तो आम जनता को न्याय कैसे मिलेगा। यह आदेश न्यायमूर्ति मंजूरानी चौहान ने बुलंदशहर के राहुल और तीन अन्य की याचिका पर दिया है।

प्रिटेंड प्रोफार्मा समन पर दायर याचिका

याचिका पर अधिवक्ता महेश शर्मा ने बहस की, इनका कहना था कि अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट बुलंदशहर ने सात सितंबर 2020 को न्यायिक विवेक का प्रयोग किए बिना याचीगण को प्रिंटेड प्रोफार्मा पर समन जारी किया है। मांग की गई थी कि आदेश रद्द किया जाए। अधिवक्ता का कहना था कि हाईकोर्ट की कई पीठों का आदेश है कि कोई भी समन प्रिंटेड प्रोफार्मा पर नहीं जारी किया जाएगा। समन जारी करते समय ऐसा करने का कारण स्पष्ट दिया जाएगा।

स्पष्टीकरण लेकर High Court को सूचित करने का आदेश

बता दें कि कोर्ट ने इसे गंभीरता से लेते हुए जिला जज बुलंदशहर को संबंधित मजिस्ट्रेट से स्पष्टीकरण लेकर हाईकोर्ट (High Court) को सूचित करने का निर्देश दिया था। अपने स्पष्टीकरण में मजिस्ट्रेट ने गलती मान कर बिना शर्त माफी मांगी। हाईकोर्ट ने कहा कि मजिस्ट्रेट द्वारा दिया गया स्पषटीकरण स्वीकार नहीं किया जा सकता। क्योंकि जज भगवान की तरह होते हैं। उनको जल्दबाजी या काम की अधिकता की वजह से गलती नहीं करनी चाहिए। अगर जज गलती करेंगे तो आम जनता को न्याय कौन देगा। कोर्ट ने प्रिंटेड प्रोफार्मा पर जारी समन आदेश रद्द कर दिया है।

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