हाई कोर्ट ने तेज की पंजाब ड्रग्स मामले की सुनवाई, 13 अक्टूबर को होगी अगली सुनवाई

चंडीगढ़: पंजाब में बहुचर्चित नशीले पदार्थों के मामले में मंगलवार को पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के एक वकील ने याचिका दायर कर मामले की सुनवाई में तेजी लाने की मांग की थी। अदालत ने याचिका स्वीकार कर ली और पहला मामला, जिस पर नवंबर में सुनवाई होनी थी, अब 13 अक्टूबर को सुनवाई होगी। विशेष कार्य बल (STF) की रिपोर्ट खोलने की मांग वाली एक याचिका भी अदालत में लंबित है।

एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऑफ इंडिया सत्यपाल जैन ने कहा कि कानूनी प्रक्रिया के तहत पहले कोर्ट खुद रिपोर्ट पढ़ेगा और इसे सार्वजनिक नहीं किया जाएगा, कोई फर्क नहीं पड़ता कि इसमें किसका नाम है, अदालत पहले उन व्यक्तियों को बुलाएगी और फिर कानूनी प्रक्रिया के तहत सुनवाई होगी।

नवजोत सिद्धू ने ट्वीट कर साधा निशाना

कांग्रेस नेता नवजोत सिंह सिद्धू के ट्वीट के बारे में जैन ने कहा कि वह एक जिम्मेदार पद पर बैठे हैं, और अगर वह सुनवाई के बारे में ट्वीट कर रहे हैं, तो यह उनका विवेक है। लेकिन अक्सर अगर किसी को कोर्ट केस के बारे में कुछ कहना होता है तो कोर्ट में अर्जी दाखिल करनी पड़ती है।

पंजाब सरकार ने STF जांच की सीलबंद रिपोर्ट हाईकोर्ट में पेश की थी। इससे पहले सिद्धू ने ट्वीट किया था कि ढाई साल बाद ड्रग तस्करों के चेहरे सामने आएंगे। पहले इस मामले की सुनवाई 1 सितंबर को हाईकोर्ट में होनी थी। हालांकि तब जस्टिस अजय तिवारी ने सुनवाई से खुद को अलग कर लिया था।

मुख्य न्यायाधीश ने तब मामले को न्यायमूर्ति एजी मसीह और न्यायमूर्ति अशोक कुमार वर्मा की नई पीठ के पास भेज दिया। अधिवक्ता नवकिरण सिंह ने पिछले साल मामले की जल्द सुनवाई के लिए याचिका दायर की थी। अब नई पीठ मामले की नियमित सुनवाई करेगी।

ड्रग रैकेट का हुआ था पर्दाफाश

आपको बता दें कि कुछ साल पहले पंजाब में 6,000 करोड़ रुपये के ड्रग रैकेट का पर्दाफाश हुआ था, जिसकी जांच प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने की थी। इस सिलसिले में EDने अकाली दल के पूर्व मंत्री बिक्रम सिंह मजीठिया से भी पूछताछ की थी। यही कारण है कि नवजोत सिद्धू लगातार अकाली दल पर निशाना साधते रहे हैं। इसे भी कैप्टन अमरिंदर सिंह के मुख्यमंत्री पद से बर्खास्त करने का एक बड़ा कारण बताया गया। पंजाब में पिछले चुनाव में ड्रग्स भी एक बड़ा मुद्दा था और तत्कालीन सत्तारूढ़ अकाली दल-भाजपा गठबंधन को हार का सामना करना पड़ा था।

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