रोहतक की ‘निर्भया’ को मिला ऐतिहासिक इंसाफ, सातों रेपिस्‍ट को फांसी

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रोहतक। दिल्‍ली की निर्भया के साथ भले नाइंसाफी हुई हो, लेकिन रोहतक की निर्भया को मुकम्‍मल इंसाफ मिला। दिल्‍ली गैंगरेप जैसी ही बर्बरता वाले इस केस में रोहत की फास्‍ट ट्रैक कोर्ट में सात दोषियों को फांसी की सजा सुनाई है।

इस मामले में कुछ नौ आरापी थे, जिनमें से एक बालिग है। वहीं एक अन्‍य आरोपी आत्‍महत्‍या कर चुका है। नाबालिग का मामला जुवैनाइल जस्टिस कोर्ट में चल रहा है। इसी साल फरवरी में नेपाली युवती के साथ गैंगरेप के बाद उसकी हत्‍या कर दी गई थी। लड़की का शव बहुअकबपुर गांव के खेत में मिला था। शव की पहचान तक कर पाना मुश्किल था।

ये हैं सभ्‍ाी सात आरोपी

सभी सातों आरोपी पवन, प्रमोद उर्फ पदम, सरवर उर्फ बिल्लू, मनबीर उर्फ मन्नी, सुनील उर्फ मिढ़ा, सुनील उर्फ शीला और राजेश उर्फ घुचडू को आईपीसी की करीब 7 धाराओं में दोषी माना गया। इस मामले में कुल 57 लोगों की गवाही हुई जबकि आरोपी पक्ष की ओर से भी तीन गवाह पेश किए गए था।

पोस्‍टमार्टम रिपोर्ट में पता चला कि लड़की के प्रजनन अंगों में पत्‍थर डाले गए थे। उसके शरीर में कई और चीजों को भी डाला गया था। युवती की बच्‍चेदानी में कंडोम मिला था। घटना के चार दिन बाद सभी आरोपियों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था।

इस हैवानियत में शामिल दोषियों ने इकबालिया जुर्म में यह खौफनाक बातें बताई थीं। दोषियों में से एक ने उसकी बांह मोड़ रखी थी, जबकि दूसरे ने उसके पैर कस कर पकड़ लिए थे। उसके प्रजनन अंगों न सिर्फ पत्‍थर डाले गए, बल्कि लोहे की रॉड और ब्‍लेड भी घुसा दी गई।

एक दोषी ने बताया कि इस घटनाक्रम के दौरान उसका दिमाग काम नहीं कर रहा था। वह शराब के नशे में था और इस हालत में उससे यह सब बस होता चला गया। इन दरिंदों ने कहा कि वो सब बस मजा लेना चाहते थे। पोस्टमॉर्टम करने वाले टीम के हेड डॉ. एस. के. धतरवाल (फॉरेंसिक मेडिसिन हेड, पीजीआईएमएस रोहतक) ने बताया था कि पीड़िता के शरीर में 16 सेंटीमीटर एस्बेस्टस शीट मिली है।

28 वर्षीय नेपाली युवती बीमार थी। रोहतक की चिन्योट कॉलोनी में किराए पर रहने वाली उसकी बड़ी बहन दो माह पहले उसे पीजीआई में इलाज कराने के लिए लाई थी। 1 फरवरी को वह लापता हो गई। परिजनों ने पीजीआई थाने में गुमशुदगी दर्ज कराई। इस बीच, 4 फरवरी (बुधवार) को उसकी नग्न लाश पास के गांव बहू अकबरपुर में मिली।

इस मामले में फैसला देने के बाद अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश सीमा सिंघल ने कहा कि पुलिस ने अपनी ड्यूटी करते हुए करीब 300 पन्नों की चार्जशीट पेश की। आज मैं ज्यूडिशयल डयूटी पूरी करने के लिए आई हूं। न्यायाधीश होने के साथ-साथ मैं एक इंसान हूं और इंसान होने से पहले मैं एक महिला हूं।

इस मामले के सभी सातों दोषियों के पास अभी हाईकोर्ट में अपील करने का मौका है। सातों दोषी जल्द ही हाईकोर्ट में अपील भी करेंगे।

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