हिट हुआ बीजेपी के चाणक्य का फार्मूला, बढ़ी पीएम मोदी की ताकत, खतरे में विपक्षी एकता

मुंबई। अगले वर्ष होने वाले लोकसभा चुनाव के चलते खुद को मजबूत करने की कवायद में जुटी केंद्र की सत्तारुढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को अपनी चुनावी रणनीति का अभी तक सकारात्मक फल ही मिल रहा है। बीते बुधवार को अमित शाह द्वारा शिवसेना को मनाने की कोशिश लगभग कामयाब हो गई है। पुरानी नाराजगी को दरकिनार करते हुए दोनों दलों ने मिशन-2019 में एक साथ चलने का निर्णय भी ले लिया है। हालांकि अभी सीटों के बंटवारे को लेकर कोई चर्चा नहीं हो सकी है।

मिली जानकारी के अनुसार, बीते बुधवार को अमित शाह और शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे के बीच हुई बैठक के बाद राजग को मजबूती मिली है। वर्ष 2014 की तरह ही लोकसभा चुनाव-2019 में शिवसेना ने भाजपा नीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के घातक के रूप में चुनाव लड़ने पर हामी भर दी है। शिवसेना के द्वारा राजग में शामिल होना कहीं न कहीं विपक्षी एकता के लिए खतरे की घंटी है।

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हालांकि अभी भी शिवसेना और भाजपा के बीच एक ऐसा पेंच फंसा है जिसकी वजह से एक बार फिर तकरार देखी जा सकती है। यह पेंच कुछ और नहीं, बल्कि सीटों का बंटवारा है। सीटों के बंटवारे को लेकर इन दोनों पुरानी सहयोगी पार्टियों के बीच में एक बार फिर दरार पड़ सकती है। लोकसभा चुनाव के बाद महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव होना है।

इस बारे में जानकारी देते हुए भाजपा के एक वरिष्ठ नेता  ने कहा कि दोनों दल 2019 का लोकसभा 2014 की तर्ज पर ही लड़ने को राजी हैं। 2014 में भाजपा 48 में से 26 और शिवसेना 22 सीटों पर लड़ी थी। इसके बाद हुए विधानसभा चुनाव में दोनों पार्टियों में भाजपा और शिवसेना के संबधों में खटास आ गई। दोनों अलग लड़ीं। विधानसभा में भाजपा ने 260 सीटों पर चुनाव लड़ा और 122 पर जीत दर्ज की, वहीं शिवसेना ने 282 सीटों पर लड़कर 63 सीट जीतीं। दोनों पार्टियों में असल लड़ाई विधानसभा में ज्यादा सीटों पर लड़ गंठबंधन में सीनियर पार्टनर बनने को है।

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हालांकि इस बैठक के बाद शिवसेना की ओर से जिस तरह का रवैया पेश किया जा रहा है, वह भाजपा के रुख के बिल्कुल विपरीत है। शिवसेना ने उद्धव और शाह की मुलाकात के बाद भी अगला लोकसभा चुनाव अकेले लड़ने की ही बात कही है। शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे के तेवर भाजपा अध्यक्ष अमित शाह से मुलाकात बाद भी नरम नहीं पड़े है। मुलाकात के एक दिन बाद गुरुवार को ठाकरे ने पालघर में इस मुलाक़ात को भाजपा का ड्रामा करार दिया था।

बीते काफी समय से भाजपा और शिवसेना के संबंधों में खटास देखने को मिल रही है।उद्धव ठाकरे की अगुवाई में पार्टी महाराष्ट्र की भाजपा सरकार और केंद्र की मोदी सरकार के खिलाफ बराबर हमला बोले हुए है। कभी किसानों का मुद्दा उठाते हुए तो कभी पेट्रोल और डीजल के बढ़ते दामों को लेकर शिवसेना बराबर भाजपा सरकार को आड़े हाथों ले रही है। यह वही शिवसेना है जिसने बीते दिनों खुद को भाजपा का सबसे बड़ा दुश्मन करार दिया था।

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