Holi 2021 Date: जानें कब होगा होलिका दहन? इस मुहूर्त में मनाई जाएगी होली

होली (Holi) वसंत ऋतु में मनाया जाने वाला एक महत्वपूर्ण त्यौहार है, इस बार 28 मार्च को होगा होलिका दहन

लखनऊ: खुशियों और उमंगों से भरा रंगों का त्यौहार होली (Holi) देश भर में बड़े ही धूम-धाम और हर्षो-उल्लास के साथ मनाया जाता है। इस दिन लोग एक-दूसरे को अबीर और गुलाल लगाते हैं। एक दिन पहले लोग होलिका दहन करते हैं और दूसरे दिन सुबह रंग लगाकर होली का जश्न मनाते है। शाम होने पर लोग नए कपड़े पहन कर एक-दूसरे के घर पर जाकर होली की शुभकामनाएं देते है।

होलिका दहन मुहूर्त

होली (Holi) वसंत ऋतु में मनाया जाने वाला एक महत्वपूर्ण त्यौहार है। यह पर्व हिंदू पंचांग के अनुसार फाल्गुन मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है। इस बार 28 मार्च को होलिका दहन (Holika Dahan) होगा जिसका शुभ मुहूर्त 18 बजकर 37 मिनट से 20 बजकर 56 मिनट तक रहेगा।

होली (Holi) रंगों का और हंसी-खुशी का त्योहार (Festival) है। यह भारत का एक प्रमुख और प्रसिद्ध त्योहार है। रंगों का त्यौहार कहा जाने वाला यह पर्व पारंपरिक रूप से 2 दिन तक मनाया जाता है। पहले दिन को होलिका (Holika) जलायी जाती है, जिसे होलिका दहन (Holika Dahan) कहते हैं। दूसरे दिन लोग एक दूसरे पर रंग, अबीर-गुलाल लगाते हैं, ढोल बजा कर होली के गीत गाये जाते हैं और घर-घर जा कर लोगों को रंग लगाया जाता है।

गाने-बजाने का दौर

ऐसा माना जाता है कि होली के दिन लोग पुरानी कटुता को भूल कर गले मिलते हैं और फिर से दोस्त बन जाते हैं। एक दूसरे को रंगने और गाने-बजाने का दौर दोपहर तक चलता है। इसके बाद स्नान कर के विश्राम करने के बाद लोग नए कपड़े पहन कर शाम को एक दूसरे के घर मिलने जाते हैं, गले मिलते हैं और मिठाइयां खिलाते हैं।

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रंग-बिरंगे यौवन

राग-रंग का यह लोकप्रिय पर्व वसंत का संदेशवाहक भी है। राग अर्थात संगीत और रंग तो इसके प्रमुख अंग हैं ही पर इनको उत्कर्ष तक पहुंचाने वाली प्रकृति भी इस समय रंग-बिरंगे यौवन के साथ अपनी चरम अवस्था पर होती है। फाल्गुन माह में मनाए जाने के कारण इसे फाल्गुनी भी कहते हैं। होली का त्यौहार वसंत पंचमी (Vasant Panchami) से ही आरंभ हो जाता है। उसी दिन पहली बार गुलाल उड़ाया जाता है। इस दिन से फाग और धमार का गाना प्रारंभ हो जाता है। खेतों में सरसों खिल उठती है। बाग-बगीचों में फूलों की आकर्षक छटा छा जाती है। पेड़-पौधे, पशु-पक्षी और मनुष्य सब उल्लास से परिपूर्ण हो जाते हैं। खेतों में गेहूं की बालियाँ इठलाने लगती हैं। बच्चे-बूढ़े सभी व्यक्ति सब कुछ संकोच और रूढ़ियाँ भूलकर ढोलक-झाँझ-मंजीरों की धुन के साथ नृत्य-संगीत व रंगों में डूब जाते हैं। चारों तरफ़ रंगों की फुहार फूट पड़ती है।

होली का प्रमुख पकवान

गुझिया होली का प्रमुख पकवान है जो कि मावा (खोया) और मैदा से बनती है और मेवाओं से युक्त होती है इस दिन कांजी के बड़े खाने व खिलाने का भी रिवाज है। नए कपड़े पहन कर होली की शाम को लोग एक दूसरे के घर होली मिलने जाते है जहां उनका स्वागत गुझिया, नमकीन व ठंडाई से किया जाता है।

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