चाटुकारिता करने वालों को मैं मित्र नहीं मानता : उद्धव ठाकरे

दिल्ली| भाजपा और शिवसेना के बीच की खाई अब बढती ही नज़र आ रही है। अविश्वास पत्र के खिलाफ पहले उन्होंने भाजपा का साथ देने की बात कही फिर अपनी बात से पलट गये, इसी क्रम में ठाकरे ने भाजपा पर तंज कसते हुए कहा है कि अगर भाजपा गाय-भैंस पर ध्यान न देकर महिलाओं की सुरक्षा पर ध्यान दे तो बेहतर होता। रविवार को उन्होंने अमित शाह को यह सन्देश भी भेज दिया कि आने वाले समय में जो चुनाव होगा उस पर भाजपा अकेले दम पर लड़ना होगा।

शिवसेना के अध्यक्ष उद्धव ठाकरे ने सामना से बात करते हुए कहा कि वो सरकार पर अंकुश रखने का काम करती है। उन्होंने कहा, “ शिवसेना भारत के जनता की दोस्त है, किसी एक पार्टी की मित्र नहीं है।समय समय पर मुझे अगर कोई बात पसंद ना आए तो उस समय मैं बोलता हूं और वैसा बोलता हूं और बोलूंगा ही। ठाकरे ने कहा, ‘ बोलने का ही नतीजा है कि बीते 4 वर्षों में शिवसेना ने जो बात भूमिका रही अब वही लागू हो रही है। हमने सरकार की किसी भूमिका या नीति का विरोध किया तो वह देश और जनता के हित के लिए किया है।  जो भी किया वह खुलेआम किया। साथ दिया, वह भी खुलेआम दिया और विरोध किया तो वह भी खुलेआम।”

 

सामना में संजय राउत से बात करते कहा कि ऐसा नहीं है कि भाजपा ने कोई अच्छा काम नहीं किया, पर कुछ काम उनके ऐसे हैं जो जनता के हित में नहीं है उसका हम विरोध कर रहे हैं। ठाकरे ने अविश्वास प्रस्ताव पर कहा, “सरकार को मतदान करना होता तो इतने दिनों तक हम सरकार के निर्णय पर हमला क्यों बोलते? आज जो सब लोग मिल कर बोल रहे हैं, उसकी भूमिका शिवसेना ने ही पहले रखी। बात चाहे नोटबंदी की हो, जीएसटी की हो, आज भी सभी लोग एक होकर बोल रहे हैं, उस समय इसके खिलाफ बोलने का साहस किसी के पास नहीं था, यह साहस सिर्फ शिवसेना के पास है।”

ठाकरे ने कहा, “ पिछले तीन-चार वर्षों से देश में चल रहे हिंदुत्व को स्वीकार नहीं करता हूं। यह हिंदुत्व का हमारा विचार नहीं है। हमारी महिला आज असुरक्षित हैं, और आप गायों की रक्षा कर रहे हैं। आप लोगों को उनके खाने की प्राथमिकताओं के लिए निशाना नहीं बना सकते। वाह-वाह करने वालों और चाटुकारिता करने वालों को मैं मित्र नहीं मानता। सरकार में हिस्सेदारी होने के बाद भी देश की जनता के लिए अगर कुछ गलत कदम उठाए जाएंगे तो पूरी ताकत के साथ उसे बताना मैं फर्ज समझता हूं और वह मैं करुंगा।”

अब यह देखना दिलचस्प होगा कि जिस हिंदुत्व को हथियार बनाकर भाजपा अभी तक सभी चुनावों में आगाज करती है, शिवसेना के इन आरोपों के बाद क्या अभी भी वह इन मुद्दों के साथ कड़ी रहती या नहीं। साथ ही इस बात पर भी सबकी नजर रहेगी कि केंद्र की सत्ताधारी भाजपा सरकार की अगुवाई करने वाले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ‘सबका साथ, सबका विकास’ एजेंडे को कैसे आगे बढ़ाती है।

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