चैपल ने कोच विवाद को लेकर दिया बड़ा बयान, कुंबले को बताया गलत

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नई दिल्ली। इस बार भारतीय टीम के लिए मुख्य कोच नियुक्त करना BCCI के लिए किसी विवाद से कम नहीं था। आईसीसी चैंपियंस ट्राफी के बाद ही अनिल कुंबले का कॉन्ट्रैक्ट बोर्ड के साथ खत्म होना था। ऐसे में इस टूर्नामेंट से पहले बोर्ड ने मुख्य कोच के लिए आवेदन मंगाए थे। मगर इस दौरान भी काफी कांफ्युशन थी की भारतीय टीम की कमान कौन संभालेगा क्योंकि CAC और COA के बीच एक राय नहीं बन पा रही थी। वहीं, अब ऑस्ट्रेलियाई दिग्गज इयान चैपल ने भी कोच विवाद को लेकर एक बड़ा बयान दिया है।

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जब से शास्त्री ने मुख्य कोच के पद का कार-भार संभाला है तब भी कोच पद का विवाद ठीक से सुलझ नहीं पाया है। दरअसल, शास्त्री ने कोच बनते ही अपना पहला फरमान सुनाते हुए कहा था कि जहीर खान नहीं बल्कि भरत अरुण ही भारतीय टीम के गेंदबाजी कोच रहेंगे। उन्होंने ऐसा इसलिए कहा क्योंकि इससे पहले भी जब शास्त्री भारतीय टीम के कोच थे तब अरुण ही गेंदबाजी कोच थे।

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रवि शास्त्री की पहली पसंद हैं भरत अरुण

वहीं, CAC चाहती थी की जहीर कोच बनें लेकिन ऐसा हो न सका और अंत में बोर्ड ने भी भरत अरुण के नाम पर मुहर लगा दी। उधर, राहुल द्रविड़ को कमेटी बल्लेबाजी सलाहकार नियुक्त करना चाह रही थी लेकिन इस पर भी शास्त्री भारी पड़ गए और ये काम भी वही खत्म हो गया।

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इयान चैपल का बड़ा बयान

इस बार कोच विवाद ने न सिर्फ भारत में सुर्खियां बटोरी बल्कि यह मामला विदेशी खिलाड़ियों के लिए भी एक चर्चा का विषय रहा। इस मामले में अब इयान चैपल ने भी अपने विचार खुलकर सबके सामने पेश किए। कोच विवाद को लेकर उन्होंने भारतीय टीम के कप्तान विराट कोहली का खुलकर समर्थन किया।

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कप्तान के ऊपर थोपा जाता है कोच

उन्होंने कहा कि अगर किसी भी देश का क्रिकेट बोर्ड अपने कप्तान पर कोई कोच थोप रहा है, तो वो कोच ऐसा होना चाहिए जिसके साथ कप्तान काफी सहज हो और उसे कोच से किसी तरह की परेशानी शेयर करने में कोई परेशानी न हो। उन्होंने आगे कहा कि जैसा रिश्ता कोहली का शास्त्री के साथ रहा है, वैसा रिश्ता उनका कुंबले के साथ नहीं था जबकि शास्त्री और कुंबले दोनों ही अपने-अपने समय में टीम के कोच रहे हैं।

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चैपल यही नहीं रुके। उन्होंने आगे ये भी कहा कि जब BCCI ने नया कोच नियुक्त किया तो एक सवाल ये भी उठता है कि आखिर बोर्ड को ऐसे बदलाव की जरुरत क्यों पड़ी, जबकि उसमें बदलाव की जरूरत नहीं है। ऐसे में इसके जवाब के रूप में यही बात सामने निकलकर आती है कि आपकी टीम का कप्तान कोच के साथ सहज नहीं महसूस कर रहा है।

यह था मामला

अनिल कुंबले एक साल के लिए भारतीय टीम के मुख्य कोच नियुक्त हुए थे लेकिन उनके व कोहली के बीच रिश्ते कभी ठीक नहीं रहे। यह मामला विवाद तब बना जब कुंबले ने बोर्ड को एक लेटर दिया जिसमें साफ़ तौर पर यह लिखा था कि उनके व कोहली के बीच एक ऐसी पार्टनरशिप है जिसमें दूसरी ओर से कोई समर्थन नहीं मिल रहा है, इसलिए अब वो अपने पद से हट रहे हैं।

कुंबले और कोहली के बीच सब कुछ ठीकठाक चल रहा था लेकिन फिर अचानक दोनों के बीच तनातनी शुरू हो गई। असल मामला क्या है ये किसी को सही से नहीं पता लेकिन हां कोहली का यह जरुर कहना था कि कुंबले काफी स्ट्रिक्ट हैं। कोहली का कहना था कि जब भी कोई  खिलाड़ी चोटिल है और उसके बाद ठीक हो गया और वह टीम में वापसी कर रहा है तो नियम ये कहता है कि उस खिलाड़ी को सिर्फ फिटनेस टेस्ट देना है लेकिन कुंबले का कहना था कि उसे केवल फिटनेस टेस्ट ही पास नहीं करना पड़ेगा बल्कि मैच फिटनेस भी साबित करनी होगी।

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इस मामले पर मिली जानकारी के मुताबिक, कोहली ने बोर्ड को मेसेज भी किया था कि कुंबले काफी रौबदार हैं। यही नहीं, कुंबले ने भी बोर्ड को अंदर की बातें बोर्ड को बतानी शुरू कर दी थी। इसके बाद से मामला और बिगड़ता ही गया और अंततः कुंबले ने ही अपनी पोस्ट से रिजाइन दे दिया।

मगर आईसीसी चैंपियंस ट्राफी से पहले जब भारतीय टीम इंग्लैंड के लिए रवाना हो रही थी तब कोहली ने इस बात को खारिज कर दिया कि उनके व कुंबले के बीच किसी तरह की कोई अनबन नहीं है लेकिन ये भी बात सच है कि कोहली कभी कुंबले की बात से सहमत नहीं होते थे। यही वजह थी कि जब टूर्नामेंट के फाइनल मैच के लिए टीम के ड्रेसिंग रूम में ये बात तय हुई थी अगर टॉस जीतेंगे तो पहले बल्लेबाजी करेंगे।

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उस वक्त विराट कुछ नहीं बोले लेकिन जब मैदान पर कोहली ने टॉस जीत लिया तो बिना कुछ सोचे-समझे गेंदबाजी का फैसला ले लिया, जिसके बाद का नतीजा सबके सामने है। अगर भारतीय टीम इस मैच में पहले बल्लेबाजी करती तो शायद नतीजा कुछ और होता लेकिन कोहली ने गलत फैसला लेते हुए ये मैच व पूरा टूर्नामेंट अपने हाथों से गवां दिया। खैर अब शास्त्री टीम के नए कोच हैं और उनकी कोहली से काफी अच्छी अंडरस्टैंडिंग है। अब देखना ये है कि शास्त्री टीम को और कैसे बेहतर बनाते हैं।

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