आईएएस टॉप करने वाली ईरा ने पूछा-क्‍या यही हमारी इंसानियत है?

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IAS परीक्षा की सामान्य श्रेणी में सर्वोच्च अंक हासिल करने वाली पहली विकलांग महिला इरा सिंघल ने अपने फेसबुक पेज पर यूपी का एेसा अनुभव साझा किया है, जो झकझोर देने वाला है। इरा ने 24 दिसम्बर को मसूरी से दिल्ली लौटने के दौरान रास्‍ते में हुए एक हादसे का ब्‍योरा लिखा है। उन्‍होंने बताया कि तमाम कोशिशों के बावजूद दो घायलों की मदद के लिए किसी ने हाथ नहीं बढ़ाया। आखिर इनमें से एक की मौत हो गई। उन्‍होंने सवाल खड़ा किया है कि क्‍या यही हमारी इंसानियत है।
इरा की जुबानी
आज हम चार लोग मसूरी से दिल्ली वापस आ रहे थे। रास्ते में मुरादनगर में (यूपी) हमने एक हादसा देखा। एक मारुति की एक ट्रैक्टर के साथ भिड़ंत हो गई थी और मारुति में बैठा ड्राइवर और एक यात्री बुरी तरह घायल हो गए थे। हम उनकी मदद के लिए रुक गए और दिल्ली-मेरठ के बेहद व्यस्त हाईवे पर हमने स्थानीय लोगों को इकट्ठा किया। हमनें उन दोनों को कार से बाहर निकाला।
गंभीर रूप से घायल इन दोनों लोगों की मदद के लिए हमने स्थानीय एम्बुलेंस बुलाई, लेकिन इसका कोई फायदा नहीं हुआ। इसी बीच मैंने वहां से गुजर रहे लोगों को रोकने का फैसला किया। मुझे उम्मीद थी कि मैं कम से कम एक ऐसी कार जरूर ढूंढ लूंगी, जो इन घायलों में से एक को ले जाए। हमारे पास से गुजरने के दौरान सभी कारों की रफ्तार धीमी हो रही थी और लोग इस भीषण दृश्य को देख रहे थे।
‘मैंने कम से कम 20 कारों के दरवाजे खटखटाए और आती-जाती कारों को पागलों की तरह हाथ दिए पर कोई नहीं रुका। एक भी नहीं। यह हमारी मानवता है। आखिर में हमने एक पुलिस वैन बुलाई और उनमें से एक को भेजा। दूसरे की मौके पर ही मौत हो गई। इस घटना ने मुझे दुखी कर दिया कि उनमें से एक भी इंसान ने यह नहीं सोचा कि वे आसानी से यह कर सकते थे। किसी के अंदर भी इतनी इंसानियत नहीं थी कि वह रुक कर मदद करता।
क्या यही देश हमने अपने लिए बनाया है? यही हमारी इंसानियत है?

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