ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने जा रहे हैं तो दलालों से रहें सावधान

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काशीपुर। अगर आप भी ड्राइविंग लाइसेंस, पहचान पत्र, आरसी आदि बनवाने के लिए सरकारी दफ्तर जा रहे हैं। तो जाने से पहले ये खबर जरुर पढ़ लें। दरअसल, हमें अक्सर सुनने को मिलता है कि हमारे आस-पास कई तरह के क्राइम होते रहते हैं। इनमें से कई चीजें हम सिर्फ सुन लेते हैं और कुछ ही चीजें होती हैं जिन्हें सुनकर उनसे सबक ले लेते हैं। लेकिन हमारे इर्द-गिर्द होने वाले क्राइम कई बार हमारे खुद के लिए काफी खतरनाक साबित हो सकते हैं।

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ड्राइविंग लाइसेंस

ऐसा ही एक मामला सामने आया है। जहां दो लोग मिलकर ऐसे फर्जी काम कर रहे थे। इसके साथ ही लोगों को बेवकूफ बना रहे थे। जब इस बात की भनक पुलिस को लगी तो फिर उनका भांडा फूट गया। आइये जानते हैं क्या है पूरा मामला।

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जानें पूरा मामला

ऊधमसिंहनगर के काशीपुर में बीते दिनों बुधवार को पुलिस ने मोहल्ला काजीबाग स्थित कुमाऊं प्रिंटिंग प्रेस की दुकान पर छापा मारा। इस दौरान उन्होंने फर्जी दस्तावेज बनाने वाले दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। मामले की जांच की जा रही।

इधर एएसपी डॉ। जगदीश चंद्र ने बताया कि उनके पास से 39 सरकारी दफ्तरों की मोहरें, तीन जाली ड्राइविंग लाइसेंस, चार पहचान पत्र, वाहनों की पांच जाली आरसी, वाहनों के दो जाली फिटनेस कागजात, एक वाहन का जाली नेशनल परमिट, एक जाली मार्कशीट, 57 सादे कंप्यूटर पेपर, एक सीपीयू मय हार्ड डिस्क, एक मॉनीटर, एक की-बोर्ड, एक प्रिंटर आदि सामान बरामद हुआ।

एएसपी ने ये भी बताया कि मिले दस्तावेजों में ज्यादातर दस्तावेज वाहनों से संबंधित हैं। इसके अलावा जो जाली मोहरें मिली हैं उनमें डीएम नैनीताल, एसडीएम ऊधम सिंह नगर और काशीपुर, प्रधानाचार्य राजकीय पालीटेक्निक द्वाराहाट और काशीपुर, कोतवाली काशीपुर, नोटरी आरसी यादव, जिला सूचना अधिकारी आदि विभागों की हैं।

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दो साल से बना रहे थे बेवकूफ

पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। जब उनसे पूछताछ की गयी तब उन्होंने अपना नाम नीरज कुमार पुत्र मोहन सिंह निवासी मोहल्ला लाहोरियान और इंतजार हुसैन पुत्र स्व। चांद हुसैन निवासी मोहल्ला काजीबाग बताया। पूछताछ में उन्होंने इस बात को भी कबूल किया कि वो लगभग दो साल से जाली दस्तावेज बनाने का काम कर रहे थे।

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और भी हुए कई खुलासे

पूछताछ में ये भी बात सामने आई है कि अब तक उन दोनों आरोपियों ने दो सौ वाहनों की जाल आरसी, करीब सौ ड्राइविंग लाइसेंस, 50 मार्कशीट, कई वाहनों के फर्जी परमिट तैयार किए हैं। आरसी बनाने की कीमत पांच हजार रुपये, ड्राइविंग लाइसेंस बनाने की कीमत दो हजार रुपये, मार्कशीट बनाने की कीमत पांच हजार रुपये और परमिट बनाने की कीमत पांच सौ रुपये थी। इसके अलावा वो दोनों राजस्थान, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और हिमाचल प्रदेश के भी जाली दस्तावेज तैयार करते थे।

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