गर्भ ठहरने में हो रही है परेशानी तो ये 5 बातें मां बनने में करेंगी आपकी मदद

मां बनने दुनिया की हर महिला के लिए एक सुखद अहसास होता है.लेकिन कई बार दुर्भाग्यवश गर्भपात या सहज अबॉर्शन के कारण महिलाओं के अंदर डर बैठ जाता है. इसके बाद महिलाएं गर्वभारण करने में भी डरने लगती हैं. से जुड़े डॉ. विशाल मकवाना बताते हैं कि मिसकैरेज (गर्भपात) होना आजकल आम है. अधिकतर गर्भपात गर्भावस्था की शुरुआत में ही हो जाते हैं. कभी-कभी तो महिला को भी यह पता नहीं चल पाता है कि वह गर्भवती है. ऐसे में जरूरत है उन कारणों के बारे में जानने की, जो एक स्वस्थ गर्भावस्था के रास्ते में आड़े आ रहे हैं.अगर किसी महिला को बिना योजना के अबॉशर्न्स का सामना करना पड़ा हो तो उसे अगली प्रेग्नेंसी से पहले डॉक्टर से परामर्श लेना चाहिए. वजह यह है कि कुछ ऐसे डायग्नोस्टिक टेस्ट्स हैं जो कि समस्या की तह तक जाकर उसे समझने में मदद करेंगे और डॉक्टर को उसके अनुसार सलाह देने में आसानी होगी.हार्मोनल असंतुलन और गुणसूत्र संबंधी असामान्यताओं की जांच के लिए कई तरह के ब्लड टेस्ट किए जाते हैं. कई बार यह टेस्ट माता-पिता दोनों पर किया जा सकता है, ताकि गर्भपात का कारण पता लगाया जा सके. ब्लड टेस्ट यह निर्धारित करने में भी मदद करता है कि क्या मां में थक्का बनाने की समस्या है, ताकि समय पर इलाज शुरू किया जा सके.

यदि महिला एक ऐसी स्वास्थ स्थिति से पीड़ित है जो कंसीव करने में बाधा डालती है तो उसके अनुसार इलाज जरूरी है.  के अनुसार, स्वास्थ की स्थिति को जानने के लिए टोटल हेल्थ चेकअप जरूरी है. अपने बीपी और शुगर के स्तर को नियंत्रित रखें, थायराइड की समस्या या किसी अन्य एंडोक्रिनोलॉजिकल समस्याओं को नियंत्रित करने के लिए दवाएं लें जो गर्भावस्था के लिए खतरा पैदा कर सकती हैं.

थ्रीडी सोनोग्राफी

अगर किसी महिला ने कम से कम दो बार अबॉर्शन या मिसकैरेज का सामना किया है तो पहले थ्रीडी सोनोग्राफी करना महत्वपूर्ण है. इससे डॉक्टर को महिला के गर्भाशय के स्वास्थ के बारे में जानने में मदद मिलेगी. थ्रीडी सोनोग्राफी की विस्तृत रिपोर्ट देखकर डॉक्टर पता कर पाएंगे कि महिला को कंसीव (गर्भधारण) कराने में कैसे मदद करना है और कैसे उसकी गर्भावस्था को आगे ले जाना है.

हिस्टेरोस्कोपी

हिस्टेरोस्कोपी अबॉर्शन या मिसकैरेज के कारण के बारे में अधिक जानने के लिए एक कम्प्यूटर स्क्रीन पर गर्भाशय, अंडाशय और फैलोपियन ट्यूब को देखा जाता है. यह हिस्टेरोस्कोप का इस्तेमाल करके किया जाता है जो कि एक पतली, हल्की ट्यूब होती है, जिसे गर्भाशय ग्रीवा और गर्भाशय के अंदर की जांच करने के लिए योनि में डाला जाता है. यह डॉक्टर को स्वस्थ गर्भावस्था के रास्ते में आने वाले फाइब्रॉएड, असामान्य रक्तस्राव, सेप्टा या संक्रमण की जांच करने के लिए अंदर से गर्भाशय गुहा को देखने में मदद करता है। परीक्षण के दौरान देखी जाने वाली समस्या या विसंगति के आधार पर उपचार की सलाह दी जाती है।

ल्यूटल फेज डिटेक्ट

एंडोमेट्रियल बायोप्सी का इस्तेमाल यह पता लगाने के लिए किया जाता है कि क्या गर्भाशय की परत गर्भावस्था को बनाए रखने के लिए पर्याप्त रूप से तैयार है. यदि टेस्ट पक्ष में हो जाता है, लेकिन प्रोजेस्टेरोन का स्तर कम है, तो इंजेक्शन या दवा से प्रोजेस्टेरोन का स्तर बढ़ाने के लिए दिया जाता है ताकि स्वस्थ गर्भावस्था होने की संभावना बढ़ाई जा सके.

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