IMF चीफ क्रिस्टीन लैगार्ड बोलीं-भारत के विकास की रफ्तार धीमी है,कृषि-रोजगार पर दे ध्यान

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नई दिल्ली: इंटरनेशनल मॉनीटरी फंड (IMF) की मैनेजिंग डायरेक्टर क्रिस्टीन लैगार्ड ने कहा है कि भारत उस गति से विकास नहीं कर पा रहा है जिस गति से उसे आगे बढ़ना चाहिए. IMF चीफ ने कहा है कि भारत की विकास दर उसकी मौजूदा विकास दर से ज्यादा होनी चाहिए.

लैगार्ड ने यह बात दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में कही. इंडिया टुडे से खास बातचीत में IMF चीफ ने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में भारत की विकास दर कहीं ज्यादा होनी चाहिए. इसके साथ ही उन्होंने भारत सरकार के आर्थिक सुधारों पर भी टिप्पणी की है.

IMF चीफ ने कहा है कि भारत सरकार को अभी और आर्थिक सुधारों के बारे में सोचना चाहिए. इस दिशा में अभी काफी गुंजाइश है. इससे पहले, सोमवार को IMF ने भारत की विकास दर के बारे में अनुमान जाहिर किया था.

IMF ने एक ही दिन पहले अनुमान जाहिर किया था कि 2019 में भारत की विकास दर 7.5 फीसदी रहेगी. 2020 में भारत की विकास दर 7.7 फीसदी रहने का अनुमान जाहिर किया गया था. यह विकास दर दुनिया भर की बड़ी विकासशील अर्थव्यवस्थाओं से ज्यादा होगी. IMF ने कहा कि 2018 में भारत की विकास दर 7.3 फीसदी रही.

वहीं, मंगलवार को IMF चीफ लैगार्ड ने कहा कि यह अच्छा संकेत है कि भारत की प्रोजेक्टेड ग्रोथ रेट ऊंची है, लेकिन सरकार को कृषि क्षेत्र के संकट को सुधारना होगा. लैगार्ड ने कहा कि भारत को इस क्षेत्र पर और ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है. इस क्षेत्र से संकट दूर करना इसलिए जरूरी है, क्योंकि भारत में कई लोग इसी क्षेत्र पर निर्भर हैं.

इसके साथ ही लैगार्ड ने कहा है कि भारत जैसे देश के लिए रोजगार भी अहम मुद्दा है. यह देश के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा. बता दें कि विपक्षी दल इस समय केंद्र की मोदी सरकार पर बेरोजगारी के सवाल पर हमलावर हैं. 1.25 अरब से ज्यादा आबादी वाले देश में मौजूदा सरकार हर साल दो करोड़ रोजगार देने के वादे के साथ सत्ता में आई थी. हालांकि, सरकार की ओर से किया गया वादा पूरा होते हुए नहीं दिखा.

अंतरराष्ट्रीय मजदूर संघ (ILO) के अनुसार  भारत में 2018 में बेरोजगारी की दर 3.5 फीसदी रही. इस दर के 2019 में ऐसा ही रहने की आशंका जाहिर की गई है. बेरोजगारी की यही दर 2016 और 2017 में भी देखने को मिली है.

आंकड़ों के मुताबिक भारत में 2019 में 1.89 करोड़ लोग बेरोजगार रहेंगे. 2018 में यह संख्या 1.86 करोड़ थी. यानी आने वाले साल में बेरोजगारी ज्यादा बड़ी समस्या बन सकती है.

भारत में लोकसभा चुनाव नजदीक हैं. ऐसे में विपक्ष आर्थिक संकट, बेरोजगारी और किसानों के कर्ज की समस्या जैसे मुद्दों पर सरकार को लगातार घेर रहा है. बीते दिनों में कई राज्यों की ओर से किसानों के लिए कर्ज  माफी की घोषणाएं की गई हैं. IMF चीफ को लगता है कि भारत को ऐसी नीतियों पर पुनर्विचार करने की जरूरत है.

IMF में चीफ इकोनोमिस्ट के तौर पर जॉइन करने वाली भारतीय मूल की गीता गोपीनाथ के बारे में लैगार्ड ने तारीफों के पुल बांधे. उन्होंने कहा कि वह अपने काम में माहिर हैं और आए दिन अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करती हैं.

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