सालों से पाकिस्तान की जेल में बंद पुनवासी जल्द करेगा घर वापसी

पुनवासी की पाकिस्तानी जेल पहुंचने और वतन वापसी की उसकी कहानी बड़ी अजीब हैं। जिला प्रशासन के मुताबिक पुनवासी साल 2009 मे सीमा पार कर पाकिस्तान चला गया था।

मिर्जापुर: नया साल किसी के लिए खुशी का होता है तो किसी के लिए गम का होता है। लेकिन उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर के रहने वाले व्यक्ति पुनवासी के लिए नया साल इतनी खुशी का होगा कि उसकी फैमिली वाले उसको शब्दों में बयां नहीं कर पाएंगे। दरअसल पुनवासी काफी समय से पाकिस्तान की जेल में बंद है। और वह नये साल में पाकिस्तान की जेल से छूट कर उसकी घर वापसी हो जाएगी। एक सप्ताह से चल रही जद्दोजहद अब पूरी होती नजर आ रही है। जिला प्रशासन उसे वापस लाने के लिए सभी कागजी कार्यवाही पूरी करने में जुट गया है।

क्या है पुनवासी की पूरी कहानी?

दरअसल पुनवासी की पाकिस्तानी जेल पहुंचने और वतन वापसी की उसकी कहानी बड़ी अजीब हैं। जिला प्रशासन के मुताबिक पुनवासी साल 2009 मे सीमा पार कर पाकिस्तान चला गया था। पाकिस्तान की पुलिस ने उसे जेल में डाल दिया था। सीमा पार करने की सजा पूरी करने के बाद भी राष्ट्रीयता की पुष्टि न होने के कारण वह दो साल तक जेल में ही पड़ रहा।

बताया गया कि दो वर्ष पहले पाकिस्तान सरकार ने भारतीय विदेश मंत्रालय को भारतीय युवक के बंद होने की जानकारी दी गई। भारत सरकार को पुनवासी के घर का पता लगाने में दो साल लग गए। कठिन परिश्रम के बाद पिछले 6 अक्टूबर को खुफिया विभाग ने उसके घर का पता लगाया।

अमृतसर में है पुनवासी

फिर उसके वतन वापसी की कार्यवाही शुरू हुई। पिछले 17 नवम्बर को अमृतसर की अटारी सीमा पर पाकिस्तान ने भारत को सौंपा। एक माह से अधिक समय हो गये वह अब भी अमृतसर में ही है। ऐसा इसलिए था क्योंकि जिलाप्रशासन ने उसकी घर वापसी के लिए कोई पहल नहीं की। परिजनों और स्थानीय लोगों ने जब आवाज उठाया मीडिया के दबाव के बाद जिला प्रशासन हरकत में आया। जिलाधिकारी सुशील पटेल ने बताया कि सभी कागजी कोरम पूरा कर लिया गया है। टीम भी गठित कर दी गई है। उसको घर लाने के लिए एक दो दिन में जिला प्रशासन अपनेअधिकारी/कर्मचारी भेजेगा।

पाकिस्तान कैसे पहुँचा पुनवासी?

पुनवासी मिर्जापुर से पाकिस्तान कैसे पहुँचा? फिर उसके घर पता लगाने में इतना समय क्यो लगा? इसका अभी तक अधिकारिक जबाब नहीं मिल पाया है। बहरहाल पुनवासी के घर में केवल उसकी एकमात्र बहन है। वह अपने भाई के घर वापसी के इंतजार में हैं। वह तो पुनवासी की आस छोड़ चुकी थी। पुनवासी के घर लौटने के आस में उसके मां-बाप परलोक जा चुके हैं। भरुहना निवासियों को भी उसके जिंदा होने की जरा भी सम्भावना नहीं थी। इस खबर से गांव के लोग खुश हैं।

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