बाजारों में दिखा कोरोना (Corona) का असर, होली पर रंग विक्रेताओं को नुकसान

कोरोना (Corona) के कारण होली (Holi) पर रंग विक्रेताओं को भारी नुकसानों का सामना करना पड़ रहा है

जयपुर: खुशियों और उमंगों से भरा रंगों का त्यौहार होली (Holi) देश भर में बड़े ही धूम-धाम और हर्षो-उल्लास के साथ मनाया जाता है। लेकिन इस बार कोरोना (Corona) के कारण होली (Holi) पर रंग विक्रेताओं को नुकसान का सामना करना पड़ रहा है। एक दुकानदार ने बताया कि, कोरोना का असर दिख रहा है, व्यापार बहुत कम हुआ है। आगे भी ज्यादा व्यापार होने की उम्मीद नहीं है। बहुत नुकसान हो रहा है।

गाने-बजाने का दौर

ऐसा माना जाता है कि होली के दिन लोग पुरानी कटुता को भूल कर गले मिलते हैं और फिर से दोस्त बन जाते हैं। एक दूसरे को रंगने और गाने-बजाने का दौर दोपहर तक चलता है। इसके बाद स्नान कर के विश्राम करने के बाद लोग नए कपड़े पहन कर शाम को एक दूसरे के घर मिलने जाते हैं, गले मिलते हैं और मिठाइयां खिलाते हैं।

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इठलाने लगती हैं गेहूं की बालियां

राग-रंग का यह लोकप्रिय पर्व वसंत का संदेशवाहक भी है। राग अर्थात संगीत और रंग तो इसके प्रमुख अंग हैं ही पर इनको उत्कर्ष तक पहुंचाने वाली प्रकृति भी इस समय रंग-बिरंगे यौवन के साथ अपनी चरम अवस्था पर होती है। फाल्गुन माह में मनाए जाने के कारण इसे फाल्गुनी भी कहते हैं। होली का त्यौहार वसंत पंचमी (Vasant Panchami) से ही आरंभ हो जाता है। उसी दिन पहली बार गुलाल उड़ाया जाता है।

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इस दिन से फाग और धमार का गाना प्रारंभ हो जाता है। खेतों में सरसों खिल उठती है। बाग-बगीचों में फूलों की आकर्षक छटा छा जाती है। पेड़-पौधे, पशु-पक्षी और मनुष्य सब उल्लास से परिपूर्ण हो जाते हैं। खेतों में गेहूं की बालियां इठलाने लगती हैं। बच्चे-बूढ़े सभी व्यक्ति सब कुछ संकोच और रूढ़ियां भूलकर ढोलक-झाँझ-मंजीरों की धुन के साथ नृत्य-संगीत व रंगों में डूब जाते हैं। चारों तरफ़ रंगों की फुहार फूट पड़ती है।

होली का प्रमुख पकवान

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गुझिया होली का प्रमुख पकवान है जो कि मावा (खोया) और मैदा से बनती है और मेवाओं से युक्त होती है इस दिन कांजी के बड़े खाने व खिलाने का भी रिवाज है। नए कपड़े पहन कर होली की शाम को लोग एक दूसरे के घर होली मिलने जाते है जहां उनका स्वागत गुझिया, नमकीन व ठंडाई से किया जाता है।

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