4G की ये खास बातें आपको जाननी चाहिए

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लखनऊ। रिलायंस ग्रुप के संस्थापक धीरूभाई अंबानी के 83वें जन्मदिन पर रिलायंस जियो ने देशभर में 4G सेवा लॉन्च कर दी है। इससे पहले एयरटेल 4G ने देश भर में धूम मचाई। अब इस क्षेत्र में रिलायंस के आने से प्रतिस्‍पर्द्धा बढ़ेगी तो यूजर्स को फायदा भी होगा। लेकिन अब भी कई सवाल हैं, जो हमें 4G अपनाने से रोक रहे हैं। मसलन, इसकी कीमत, नफा-नुकसान। यहां जानिए 4G से जुड़े अपने हर सवाल का जवाब। साथ ही कई रोचक जानकारियां।

4G Text Falling And Breaking A 3G Text

4G सचमुच कितना तेज़ है?

अगर आप भारत में 4G कनेक्शन लेते हैं तो आपको 3G के मुकाबले बहुत बेहतर स्पीड मिलेगी। 3G में जहां 1-3 एमबीपीएस की मिलती थी, वहीं 4G में 6-8 एमबीपीएस की स्पीड मिलेगी। हालांकि जैसे-जैसे 4G के यूजर्स बढ़ते जाएंगे, इसकी स्पीड कम होती जाएगी। महानगरों में 3G के साथ भी यही हुआ। इसीलिए 4G की जरूरत पड़ी। आगे 5G की जरूरत भी पड़ेगी।

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क्या इस पर पैसा ख़र्च करें?

अगर आप अपने मोबाइल से इंटरनेट इस्तेमाल करते हैं तो 4G पर पैसा खर्च करना अच्छा हो सकता है, ख़ासकर जबकि यह 3G की कीमत में मिल रहा है। 4जी बहुत शानदार पोर्टेबल ब्रॉडबैंड भी है और 4जी डोंगल के साथ घर में इस्तेमाल के लिए अस्थाई विकल्प भी बनता है।

क्या यह महंगा पड़ेगा?

एयरटेल ने 4G की दर को 3G के समान रखा है, लेकिन आप ज्‍यादा ख़र्च कर सकते हैं। आप 4G में अधिक वीडियो देख सकते हैं। ये 3G के मुकाबले बेहतर क्वालिटी के होते हैं और आसानी से चलते हैं। आप वाट्सऐप या ईमेल पर ज़्यादा तेज़ी से तस्वीरें डाउनलोड कर सकते हैं। इस‍ लिहाज से 4G को महंगा नहीं कहा जा सकता।

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4G मेरे हैंडसेट को सपोर्ट करेगा?

अगर आपने इसी साल मोबाइल खरीदा है तो 4G सपोर्ट कर सकता है। लेकिन यह आपके ऑपरेटर के 4जी नेटवर्क पर काम करेगा या नहीं, यह जानने के लिए आपको अपने ऑपरेटर से पूछना होगा। इस समय बाजार में बहुत से 4G हैंडसेट हैं। इनमें सैमसंग, मोटोरोला, माइक्रोमैक्स, शियोमी और अन्य कंपनियां के फोन हैं। इनमें से कुछ तो 10,000 रुपये से कम कीमत के हैं। अगर आपका हैंडसैट आपके ऑपरेटर के 4जी पर काम नहीं करता तो इसे 3जी पर काम करना चाहिए।

4G कनेक्‍शन लेने का सही समय?

4G कनेक्शन को लेने का यह अच्छा समय है। एयरटेल 4जी मोबाइल यूज़र्स को कई उपहार भी दे रही है। मसलन, असीमित वॉयस कॉल्स, मूवीज़ और म्यूज़िक का बंडल। इसके विंक (Wynk) मोबाइल ऐप पर आप 25,000 फ़िल्में और 18 लाख गाने स्ट्रीम कर सकते हैं। इसका ई-रिटेलर फ़्लिपकार्ट के साथ समझौता भी है। वहां आप किसी ब्रांड का हैंडसेट ख़रीदते हैं तो आपको एयरटेल का 4जी सिम साथ मिलता है। अब रिलायंस ने भी जियो 4G सर्विस लॉन्‍च कर दी है।

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मेरे शहर में 4जी काम करेगा?

मुंबई और गुड़गांव जैसे कई बड़े और व्यस्त शहरों में कवरेज एक समान नहीं होती। कई जगहों पर पर्याप्त मोबाइल टॉवर भी नहीं हैं। दिल्‍ली में भी यही हाल है। वहां कुछ जगह मोबाइल कवरेज बहुत गड़बड़ हो गई है, इसीलिए लगातार कॉल ड्रॉप्स होती हैं। यह समस्‍या आपको हर तरह के G में मिलेगी।

भारत में पहली 4G सर्विस कौन सी थी?

अगस्त 2015 तक 296 शहरों और कस्बों में 4G मोबाइल सर्विस शुरू करके एयरटेल साफ तौर पर रिलायंस जियो और वोडाफ़ोन से आगे निकल गया है। एयरटेल ही पहली कंपनी है जिसने 2012 में कोलकाता में ‘ब्रॉडबैंड वायरलेस एक्सेस’ के लिए पहली 4G सर्विस शुरू की थी। इसी कंपनी ने फ़रवरी, 2014 में बैंगलुरु में पहली बार 4G सेवा शुरू की थी। अगस्त 2014 तक एक अन्य ऑपरेटर एयरसेल ने छह राज्यों में 4जी (ग़ैर मोबाइल) ब्रॉडबैंड सेवा शुरू की थी।

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4G सर्विस की दौड़ में कौन-कौन?

मुकेश अंबानी की रिलायंस जियो 4G सेवा ज़ोर-शोर से शुरु कर चुकी है। इसने पांच साल में उपकरणों और टॉवर स्थापित करने में 14 अरब डॉलर यानी तक़रीबन 9।20 खरब रुपए से ज़्यादा खर्च किए हैं। शाहरुख को ब्रांड एम्‍बेसडर बनाया है। दूसरी ओर, एयरटेल ने बीते 20 साल में उपकरणों पर 15 अरब डॉलर यानी 9186 खरब रुपए से ज़्यादा ख़र्च किए हैं। इसके अलावा इसी वित्त वर्ष में वोडाफ़ोन और आइडिया भी अपनी 4जी सर्विस शुरू करेंगे।

भारत किस तरह का 4जी इस्तेमाल करता है?

भारत एलटीई नाम की तकनीक का इस्तेमाल करता है जो 4G के लिए 2300 मेगाहर्ट्ज़ फ़्रीक्वेंसी स्पेक्ट्रम पर काम करता है। एलटीई पहली बार 2009 में यूरोप में इस्तेमाल की गई थी। एक अन्य तकनीक वाइमैक्स बहुत अच्छी तरह नहीं चली और अब कुछ ही देशों में इसे इस्तेमाल किया जाता है।

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पैसा बचाने का सबसे अच्छा तरीक़ा क्या है?

4G बहुत तेज़ है इसलिए बेहतर होगा कि वॉट्सऐप पर ‘ऑटोडाउनलोड मीडिया’ विकल्प को मोबाइल डाटा पर बंद रखें। ‘मोबाइल डाटा रोमिंग’ सेटिंग को भी ऑफ़ ही रखें। कोशिश करें कि जब भी संभव हो तस्वीरें और वीडियो डाउनलोड करने के लिए वाई-फ़ाई का इस्तेमाल करें। रिलायंस जियो और दूसरी कंपनियों की 4G सेवाएं बढ़ने के साथ ही सार्वजनिक वाई-फ़ाई हॉटस्पॉट्स की संख्या में भी बढ़ोतरी होगी।

5g

4G से कई सौ गुना तेज 5G

बीते दिनों सैमसंग ने कहा है कि उसने एक तकनीक विकसित की है, जो 5G की बुनियाद में होगी। कंपनी का कहना है कि यह तकनीक 4G नेटवर्क का स्‍थान लेगी। हालांकि भारत में अभी 4G ही काफी नया है। ऐसे में 5G तकनीक की क्रांति का नया द्वार खोलेगी।

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5G की खूबियां

5G दो किमी की दूरी तक से डाटा को एक जीबी प्रति सेकेंड के दर से भेज सकने में सक्षम होगा। यह तकनीक 2020 तक बाज़ार में आ सकती है। इसके जरिए 4जी की तुलना में कई सौ गुना अधिक स्पीड से डाटा ट्रांसफ़र होगा। 5G यूजर्स थ्रीडी फ़िल्मों और वीडियो गेम, अल्ट्रा हाई डिफनेशन (यूएचडी) के वीडियो के लाइव प्रसारण और दूरस्थ मेडिकल सुविधाओं का लाभ उठा पाएंगे। इस तकनीकी के उपयोग से चलते-फिरते हुए भी अल्ट्रा हाई डिफिनेशन (यूएचडी) वीडियो को देखा जा सकता है।

5G पर शोध

5G पर चल रहे शोध को सैमसंग, हुवावेई, फ़ुजीत्सु लैबोट्रीज और ब्रिटिश सरकार और कुछ अन्य संस्थाओं ने सहयोग दिया है। इस शोध से कुछ काम जापान, चीन और कुछ और जगहों पर हुआ। संयुक्त राष्ट्र की 2015 में होने वाली वर्ल्ड रेडियो कम्युनिकेशन कांफ्रेंस में इस बात पर चर्चा की जाएगी कि रेडियो स्पेक्ट्रम के किस हिस्से का उपयोग किया जाए।

समझें क्‍या हैं 5G, 4G, 3G, 2G, 1G

5G

5G तकनीक की शुरुआत साल 2010 में हुई। इसे मोबाइल नेटवर्क का पांचवी पीढ़ी कहा जाता है। यह ‘वायरलेस बर्ल्ड वाइड वेब’ (मोबाइल इंटरनेट) को ध्यान में रखकर बनाया गया है। 5G से वीडियो कॉलिंग के क्षेत्र में क्रांति आ जाएगी। इस तकनीक में अल्ट्रा हाइ डेफिनिशन क्वालिटी की आवाज का प्रसारण किया जा सकता है। इस तकनीक में 1 जीवीपीएस से अधिक स्पीड से डेटा की आवाजाही हो सकती है, हालांकि अभी तक इसकी अधिकतम स्पीड डिफाइन नहीं की गई है, क्योंकि अभी यह कांसेप्ट के दौर में है और इस पर काम चल रहा है। इस तकनीक की सबसे बड़ी खूबी रियल टाइम में बड़े से बड़े डेटा का आदान-प्रदान होगा। साथ ही यह तकनीक संवर्धित वास्तविकता (अगर्मेंटेड रियलिटी) के क्षेत्र में नया रास्ता खोलेगी, यानि इसके माध्यम से फोन कॉल पर आप बिल्कुल आमने-सामने बात कर पाने में सक्षम होंगे। फिलहाल ब्रिटेन की राजधानी लंदन में साल 2020 तक 5जी तकनीक लगाने की तैयारी चल रही है।

4G

मोबाइल इवोल्यूशन यानी मोबाइल नेटवर्किंग के विकास की चौथी जेनरेशन का संक्षिप्त नाम है 4G। सेलुलर नेटवर्किंग के क्षेत्र में ये अभी तक की सबसे नई तकनीकों में से एक है। माना जा रहा है कि भारत में 4जी के पूरी तरह से आने पर बैंडविथ से जुड़ी समस्याएं सुलझेंगी।

3G

मोबाइल इवोल्यूशन की तीसरी जेनरेशन की तकनीक है 3G…। भारत के लगभग सभी बड़े शहरों में अलग-अलग मोबाइल नेटवर्क कंपनियों के माध्यम से ये सेवा उपलब्ध है। भारत में कुछ कंपनियां एचएसआईए (हाई स्पीड इंटरनेट एक्सेस) या 3G प्लस सेवाएं भी देती हैं, जो आम 3G से तेज होती है। डेस्कटॉप या लैपटॉप पर इंटरनेट के लिए जो 3जी डॉन्गल प्रयोग किए जाते हैं वो भी एचएसआईए तकनीक पर काम करते हैं।

2G

मोबाइल इवोल्यूशन की दूसरी जेनरेशन को 2G प्रणाली बताई गई। इस तकनीक में पहली बार फॉन कॉल का डिजिटल प्रारूप जारी किया गया और साथ ही डाटा सेवाएं भी जारी की गई। 2G की उत्पत्ति फ़ॉन कॉल और स्लो डाटा ट्रांसफ़र सेवाओं के लिए हुई थी। 2G तकनीक में थोड़ी उन्नत सेवा जीपीआरएस (जनरल पैकेट रेडियो सर्विस) यानि 2।5 जी और ईडीजीई (एन्हांस्ड डाटा रेट्स फॉर जीएसएम इवोल्यूशन) यानि 2।75जी जारी की गई जो अब भी भारत के कई इलाके में चलती है। दूर दराज के इलाकों में 3G नेटवर्क कनेक्टिविटी के अभाव में ईडीजीई और जीपीआरएस के माध्यम से ही डाटा सेवाएं प्रदान की जा रही है।

1G या एनालॉग नेटवर्क

2G या डिजिटल तकनीक आने से पहले जो सेलुलर नेटवर्किंग तकनीक मौजूद थी उसे 1G तकनीक कहा जाता है। दुनिया के कई हिस्सों में ये एनालॉग तकनीक साल 1980 के दशक में आम लोगों के लिए बाज़ार में उतारी गई थी। ये सेवा काफ़ी महंगी थी और केवल वॉइस कॉल को ही सपोर्ट करती थी। दुनिया भर के ज़्यादातर देशों से 1G सेवा खत्म हो चुकी है।

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