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जानिए डायल 100 की ये खास बातें भी

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प्रदेश स्तरीय पुलिस इमरजेंसी प्रबन्धन प्रणाली (पीईएमएस) डायल 100 परियोजना कुल लागत 2325. 33 करोड़ रुपए है। डायल 100 में सभी कॉल रिकार्ड होंगी। पीडि़त व्यक्ति के संतुष्ठï होने के बाद ही उस प्रकरण को बंद किया जाएगा।

प्रदेश के सभी 75 जनपदों में कुल 3200 चार पहिया वाहन एवं 1600 दो पहिया वाहन पुलिस पेट्रोल वाहन के रूप में व्यवस्थापित किये जाएंगे। सभी वाहनों में अत्याधुनिक उपकरण लगाये जाएंगे तथा उसके जीपीएस उपकरण के माध्यम से प्रत्येक वाहन की भौगोलिक स्थिति की जानकारी मुख्य केन्द्र को प्राप्त होती रहेगी।

लखनऊ में स्थापित किए जा रहे मुख्य डायल 100 केन्द्र की तरह जनपद आगरा तथा वाराणसी में दो केन्द्र स्थापित किए जाएंगे। यह उपकेन्द्र मुख्य केन्द्र के वैकल्पिक प्रतिबिम्ब के रूप में कार्य करेंगे। लखनऊ के मुख्य केन्द्र में की जाने वाली समस्त कार्यवाही इन केन्द्रों से भी स्वतंत्र रूप से की जा सकेगी। प्रत्येक केन्द्र की क्षमता मुख्य केन्द्र की क्षमता की 15 प्रतिशत होगी। यह केन्द्र भी मुख्य केन्द्र की भांति लगातार चैबीस घण्टे कार्यरत रहेंगे।

पुलिस बल के रिस्पांस टाइम को न्यूनतम करने का प्रयास किया गया है। परियोजना के शुरूआती दौर में रिस्पांस टाइम शहरी क्षेत्रों में दो पहिया वाहन के लिए लगभग 10 मिनट एवं चार पहिया वाहन के लिए लगभग 15 मिनट निर्धारित किया गया है। ग्रामीण क्षेत्रों के लिए रिस्पांस टाइम चार पहिया वाहन के लिए 20 मिनट का लक्ष्य रखा गया है।

जनसुरक्षा की दृष्टि से संचालित अन्य सेवाये जैसे फायर सर्विस, राजमार्ग, पुलिस एकीकृत यातायात प्रबन्ध, स्मार्ट सिटी, सर्विलांस, वूमेन पावर लाइन, स्वास्थ्य सेवाओं से सम्बन्धित सेवा को भी इसी केन्द्र से एकीकृत किया जाएगा।

अमेरिका में चल रही डायल 911 सेवा की तर्ज पर प्रदेश में शुरू होने वाली यह परियोजना गेम चेंजर होगी। जिस दिन डायल 100 परियोजना प्रभावी होगी उसी दिन ही कर्ई अन्य परियोजनाएं तथा प्रदेश के 10 शहरों में ष्इंटीग्रेटेड ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम और स्मार्ट सिटी सर्विलांस परियोजना लागू हो जाएगी।

डायल 100 परियोजना का नियंत्रण सुव्यवस्थित, समन्वित एवं निर्बाध ढंग से संचालित करने के लिए एक अलग इकाई का गठन किया जाएगा जिसमें पुलिस अधिकारियों तथा आउटसोर्सिंग के आधार पर व्यावसायिक रूप से दक्ष व्यक्तियों की नियुक्ति की जायेगी।

इस केन्द्र में एक नेतृत्व विकास संस्थान की स्थापना की जाएगी जो जन सुरक्षा की आपातकालीन सेवाओं के सम्पादन में प्रदेश के सभी स्तर के पुलिस अधिकारियों के सतत प्रशिक्षण की व्यवस्था करेगा।

काल सेन्टर पर संकलित होने वाले बड़ी संख्या में आंकड़ों के विश्लेषण तथा अनुसंधान के लिये एक विशिष्ट विश्लेषण एवं अनुसंधान केन्द्र की स्थापना की जायेगी।

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