गलती से सुधरी भारत की इज़ अॉफ डूइंग बिजनेस की रैंकिंग

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वॉशिंगटन– वर्ल्‍ड बैंक द्वारा वित्‍त वर्ष 2016-17 के लिए जारी की गई इज़ अफ डूइंग बिजनेस-2018 लिस्‍ट में ईज ऑफ डूइंग बिजनेस रैंकिंग में न्‍यूजीलैंड लगातार दूसरे साल नंबर वन पोजीशन हासिल करने में सफल रहा था।  वहीं दूसरे स्‍थान पर सिंगापुर का भी दबदबा नज़र आ रहा था। इस बार भारत ने भी अपने कई महत्‍वपूर्ण सुधारों के साथ इस रैंकिंग में 30 पायदान का सुधार कर टॉप-100 में जगह बनाने में सफलता पाई है। इस बार की लिस्‍ट में भारत का दुनिया में 100वां स्‍थान है। भारत सरकार की उम्मीदों पर ईज ऑफ डुइंग बिजनस खरा उतरा है। आने वाली वर्ल्‍ड बैंक की ईज ऑफ डूईंग बिजनेस रैंकिंग में वह कई पायदान ऊपर आ गया है। सरकार की इस उम्‍मीद वजह बैंकरप्‍सी कोड सहित अन्‍य कई सुधार के कदमों को उठाना मान रही है। विश्व बैंक की लोकप्रिय ईज ऑफ डुइंग बिजनस (ईओडीबी) रैंकिंग की विश्वसनीयता पर उठ रहे सवालों को और बल मिल गया है, लेकिन कहा जा रहा है पिछले चार साल की कारोबार सुगमता रैंकिंग की नए सिरे से गणना की घोषणा का भारत पर बड़ा असर पड़ सकता है।

क्या कहते हैं पॉल रोमर

विश्व बैंक के मुख्य अर्थशास्त्री पॉल रोमर ने कहा है कि कारोबार में प्रतिस्पर्धा के बारे में राष्ट्रीय रैंकिंग की नए सिरे से गणना की जाएगी। कम-से-कम चार वर्षों की रैंकिंग की नए सिरे से गणना होगी। दरअसल, कारोबार सुगमता रैंकिंग की विश्वनीयता को लेकर सवाल उठ रहे थे और कहा जा रहा था। रोमर की इस घोषणा के बाद ईज ऑफ डुइंग बिजनस रिपोर्ट की विश्वसनीयता को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं। वॉल स्ट्रीट जर्नल से साक्षात्कार में रोमर ने यह घोषणा की। यही नहीं रोमर ने चिली से व्यक्तिगत रूप से माफी भी मांगी है। चिली की रैंकिंग 2014 के 34 से फिसलकर 2017 में 57 पर पहुंच गई। रोमर ने कहा, ‘मैं चिली से व्यक्तिगत रूप से माफी मांगता हूं। साथ ही किसी भी अन्य देश से माफी चाहता हूं जहां हमने गलत धारणा बना दी है।’ रोमर की भारत की रैंकिंग 2014 के 140 से उछलकर 2018 में 100 पर पहुंच गई। उन्होंने कहा कि रिपोर्ट के साथ जो समस्या है, वह मेरी गलती है क्योंकि हम चीजों को अधिक स्पष्ट नहीं कर पाए।

रोमर ने कहा कि विश्व बैंक पुरानी रिपोर्टों को ठीक करने की प्रक्रिया शुरू कर रहा है और उन्हें नए सिरे से प्रकाशित करेगा। इसमें यह बताया जाएगा कि तरीके में बदलाव के बिना रैंकिंग क्या होती। वॉल स्ट्रीट जर्नल के अनुसार, रोमर ने कहा कि वह उस प्रक्रिया की विश्वसनीयता का बचाव नहीं कर सकते जिनकी वजह से गणना का तरीका बदला है। ईओडीबी रैंकिंग की गणना के तरीके में पिछला प्रमुख बदलाव रोमर के पूर्ववर्ती कौशिक बसु के समय हुआ था।

 

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