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पांच साल की नौकरी में शिक्षिका साढ़े तीन साल रही गैरहाजिर फिर भी मिलता रहा वेतन

लखनऊ: छुट्टी किसे नहीं अच्छी लगती, लेकिन जब व्यक्ति नौकरी पेशा हो जाता है तो छुट्टी से उसका दूर-दूर तक कोई नाता नहीं रह जाता. साप्ताहिक अवकास के आलावा किसी और तरह की छुट्टी मिल पाना बेहद मुश्किल हो जाता है. और अगर लंबी छुट्टी मिल भी गई तो वेतन में कटौती जरूर हो जाती है. जरा सोचिये क्या ऐसा हो सकता है कि आप अपने 5 साल की नौकरी में साढ़े तीन साल छुट्टी पर रहे इसके बाद भी आपको पूरा वेतन मिलता रहे, शायद नहीं.

लेकिन यूपी के रामपुर से आई ये खबर आपको हैरान कर देगी. अजीमनगर थाना क्षेत्र के सैदनगर ब्लाक के कुम्हरिया गांव के प्राथमिक स्कूल में एक महिला शिक्षिका पिछले पांच सालों से कार्यरत है. इस दौरान महिला शिक्षिका साढ़े तीन साल गैरहाजिर रही, लेकिन उनका वेतन उन्हें समय से मिलता रहा. 1297 दिनों तक गैरहाजिर रही इस शिक्षिका के खिलाफ मामला दर्ज कर वेतन रिकवरी करने की तैयारी की जा रही है.

1297 दिन रही गैरहाजिर

अफसरों और शिक्षिका की आपसी मिलीभगत का यह मामला अजीमनगर थाना क्षेत्र के सैदनगर ब्लाक के कुम्हरिया गांव के प्राथमिक स्कूल से जुड़ा हुआ है. यहां प्रीति यादव नाम की एक शिक्षका की तैनाती लगभग 62 माह (2011 से 2015) तक रही है। स्कूल के रजिस्टर में शिक्षिका को गैरहाजिर दिखाया गया है, लेकिन इसके बावजूद भी उसे वेतन मिलता रहा. तत्कालीन बीएसए ने कार्रवाई के आदेश भी दिए थे लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई. इतना ही नहीं एबीएसए ने वेतन जारी करने की संस्तुति भी नहीं की थी, इसके बाद भी वेतन जारी हो गया.

मौजूदा डीएम आन्जनेय कुमार सिंह के आदेश के बाद मामलें की जांच की गई. जांच में आई रिपोर्ट के बाद जिलाधिकारी ने बीएसए को उक्त महिला शिक्षिका के खिलाफ मामला दर्ज कराने और वेतन रिकवरी के आदेश दे दिए है.

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अधिकारीयों की मिलीभगत से मिलता रहा वेतन

स्कूल न जाने वाली शिक्षिका को सेलरी यूं ही नहीं निकलती रही। इसके पीछे अफसरों व लेखा विभाग से जुड़े अफसरों व कर्मियों की सांठगांठ भी कम जिम्मेदार नहीं है। ब्लाक स्तर से बीएसए दफ्तर और लेखा दफ्तर और आला अफसरों तक की सांठगांठ के चलते यह सब हुआ है। इस तरह के कई केस सामने नजर आ चुके हैं।

बाराबंकी में कार्यरत है शिक्षिका

शिक्षिका प्रीति यादव 2005 से शिक्षिका के पद पर तैनात है। 2011 में वह रामपुर में तैनात हुई थी। ज्वाइन करने के कुछ ही दिनों बाद से ही वह गैर हाजिर हो गई। खंड शिक्षाधिकारी ने उनके खिलाफ कार्रवाई करने को भी लिखा। वेतन रोकने के आदेश हुए, लेकिन जब बैंक स्टेटमेंट जारी हुआ तो पता चला कि वेतन जारी हो रहा है। तत्कालीन बीएसए ने सेवा समाप्ति को भी लिखा था, लेकिन जब सेवा समाप्ति का नोटिस जारी हुआ तो उक्त शिक्षिका अंतरजनपदीय तबादले के तहत बाराबंकी चली गई। कार्रवाई के लिए बाराबंकी के बीएसए को भी लिखा गया है।

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