बुलंदशहर में जूते पर जाति लिखना पड़ा महंगा, बढ़ा विवाद

उत्तर प्रदेश का बुलंदशहर हर चर्चा में है क्योंकि वहां जूता बेचने और बनाने वाली कंपनी पर मुकदमा दर्ज हो गया है, मामला जातिसूचक शब्द को लेकर है।

बुलंदशहर: उत्तर प्रदेश का बुलंशहर चर्चा में है क्योंकि वहां जूता बेचने और बनाने वाली कंपनी पर मुकदमा दर्ज हो गया है, मामला जातिसूचक शब्द को लेकर है। हाल ही में आपने सुना होगा कि यूपी पुलिस वाहनों पर जाति लिखकर चलने वालों पर सख्त कार्रवाई कर रही है। तो बुलंदशहर का मामला भी जातिसूचक शब्द से ही जुड़ा है।

बुलंदशहर में जातिसूचक शब्द (ठाकुर) लिखा हुआ जूता, बेचने का मामला सामने आया है। जानकारी के अनुसार, बुलंदशहर के गुलावठी कस्बे में विशाल चौहान नामक व्यक्ति जब एक दूकान पर जूता खरीदने के लिए पहुंचा। तो वहां एक दुकानदार नासिर जूता बेच रहा था। विशाल जब जूता देखने लगा, तो देखा उनपर जाति लिखी हुई थी। इसे देखकर वह हैरान रह गया।

वीडियो हो रही वायरल 

उसने इस संबंध में जूता बेचने वाले से बातचीत की। जिसके बाद विशाल और दुकानदार नासिर की एक विडिओ वायरल हो रही है जिसमे दुकानदार नासिर यह कहता हुआ दिखाई पड़ रहा है कि क्या तुम मेरी दुकान बंद कराओगे? इस पर एक शख्स कहता है, ‘तुम्हें यहां से जूते हटा देने चाहिए।’ इस पर नासिर विरोध करते हुए कहता है, ‘क्या मैंने इन्हें बनाया है? क्या इन जूतों पर ठाकुर लिखा देखकर मैं बेचने के लिए लाया था?’ इस पर एक और शख्स कहता है, ‘तुम इन जूतों को क्यों लेकर आए?’

जिसके बाद युवक की तहरीर पर पुलिस ने जूते बेचने और बनाने वाली कंपनी दोनों के खिलाफ FIR दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। विशाल चौहान बजरंग दल का एक कार्यकर्ता है जिसने जूते पर नाम देखकर आपत्ति जताई थी। मौके पर पहुंची पुलिस ने आरोपी दुकानदार को हिरासत में ले लिया। और दुकानदार नासिर सहित जूता बनाने वाली कंपनी पर IPC की धारा 153-A,323,और 504 के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया है।

पुलिस जाँच में जुटी 

इस सम्बन्ध में बुलंदशहर पुलिस ने ट्वीट कर कहा इस मामले में जो उचित था वह कार्यवाही की गई, अगर पुलिस ऐसा न करती तो लोग अलग-अलग प्रतिक्रियाए देते, कृपया इसे इसी रूप में देखे। अब नासिर का कहना है कि वह दिल्ली से जूते खरीद कर लाता है और अपनी दूकान पर बेचता है इससे ज़्यादा उसे कुछ नहीं पता। वही पुलिस जाँच में जुट गई है कि यह किस फैक्ट्री में बनते है और उसपर जातिसूचक शब्द क्यों लिखा है।

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