हरियाणा में लगातार बढ़ रहा है नशे का सेवन, युवाओं को लगी लत

रोहतक: कभी हरियाणा को कहा जाता था- देसां में देस हरियाणा, जित दूध-दही का खाणा। लेकिन, हरियाणा की यह प्रसिद्धि युवाओं के गलत राह पकड़ने से कलंकित हो रही है। दूध-दही व अन्य सेहतमंद खानपान के लिए प्रसिद्ध इस राज्‍य के युवा अब ओपियाड (हेरोइन, अफीम, स्मैक व चिट्टा) के आदी होते जा रहे हैं। 10 साल के आंकड़ों पर नजर डालें तो राज्‍य में हेरोइन के नशेडिय़ों की संख्या 10 गुना से भी अधिक बढ़ गई है। यह आंकड़ा तो राज्य औषधि निर्भरता उपचार केंद्र (एसडीडीटीसी) और रोहतक पीजीआइ के मानसिक स्वास्थ्य संस्थान का है।

रोहतक पीजीआइ के मानसिक स्वास्थ्य संस्थान में भर्ती मरीज से बातचीत की तो उन्होंने बताया कि हेरोइन की लत अगर एक बार लग गई तो फिर उसके बिना इंसान रह नहीं सकता है। यह काफी महंगा नशा है, इसलिए वह इसे अकेले में नहीं बल्कि ग्रुप में लेते हैं, ताकि खर्चा शेयर किया जा सके। २०१० में यहाँ पर ओपियाड के कुल मरीज १४४ थे। लेकिन साल २०१२ में इनकी संख्या बढ़कर ४०९ हो गयी यही नहीं २०१४ में ये ४९८ और २०१५ में ७७१ हो गयी। इसके बाद २०१७ में इनकी संख्या १२६१ पहुच गयी अब वर्ष २०१९ में इनकी संख्या १४६८ है। इसके साथ ही अल्कोहल पीने वालों की संख्या भी लगातार बढती जा रही है।

रोहतक जिले की बात करें तो बलियाना, बोहर, खेड़ी साध, नौनंद सहित अन्य गांव हैं, जहां के युवा इस नशे का सेवन करते हैं। इसके पीछे कारण यह कि यहां की जमीनों का अधिग्रहण हुआ था, जिसके कारण लोगों के पास एकदम से काफी रुपया आ गया। ऐसे में यहां के युवा नशे की गर्त में धंसते चले गए। पहले एनसीआर, जिसमें फरीदाबाद व गुरुग्राम में हेरोइन का नशा युवा करते थे।

नशा छोड़नेके जिए इलाज कराने आए एक युवक ने बताया कि हेरोइन की कीमत रोहतक में 2500 रुपये प्रति ग्राम है। दिल्ली में यह रेट 1000 रुपये है। दिल्ली में नाइजीरियंस से हेरोइन खरीदी जाती है। रोहतक में 500 रुपये में क्वार्टर मिलता है, जो एक ग्राम का चौथा हिस्सा है। नशे के सौदागर अब शिक्षण संस्थानों को टारगेट करके विद्यार्थियों को अपना ग्राहक बनाने में जुट गए हैं। पिछले दिनों कई नाइजीनियरंस को पुलिस ने काबू किया था, जो महर्षि दयानंद विश्विविद्यालय में नशा बेच रहे थे।

” हरियाणा में नशे की चलन लगातार बढ़ रहा है। खासकर ओपियाड नशे की तरफ युवा तेजी से आगे बढ़ रहा है। हेरोइन इसमें सबसे ज्यादा प्रचलित है। शिक्षण संस्थान और साधन संपन्न परिवारों के बच्चे इस नशे की चपेट में आ रहे हैं। नशे पर अंकुश लगाने के लिए जनजागरण अभियान चलाने की जरूरत है। अभिभावकों को भी अपने बच्चों पर नजर रखने की जरूरत है।

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