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‘नकुसा’ का अंधविश्वास… अगली बार मोहे बिटिया न कीजो

nakusa_201614_175519_04_01_2016मुंबई जन्‍म होने के साथ ही मां-बाप अपने बच्‍चों का नाम रखते हैं। हर कोई बच्‍चों का नाम रखने से पहले उसका मतलब जरूर देखा जाता है। अगर आपका नाम ही आपको हर वक्त यह एहसास दिलाता रहे कि आपकी इस दुनिया में कोई जरूरत नहीं थी तो आपको कैसा लगेगा? महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों में लड़कियां इसी तरह के एहसास के साथ जीने पर मजबूर हैं। महाराष्‍ट्र के कई इलाकों में रहने वाली ‘नकुसा’ नाम की लड़कियां चर्चा में हैं।

क्‍या मतलब है नकुसा का

राज्य के कुछ हिस्सों में परिवार के लोग लड़की के पैदा होने पर उसे मारते तो नहीं हैं, लेकिन उसका नाम नकुसा रख देते हैं। इसका मतलब है कि जिसकी कोई जरूरत न हो और यह नाम जिंदगी भर लड़की को एक बुरे एहसास के साथ जीने पर मजबूर करता है। मुंबई के इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर पॉलिटिकल साइंस के टीवी शेखर और आईआईटी हैदराबाद के वीपी शिजीथ ने मिलकर नकुसा नाम के साथ जी रही लड़कियों पर पड़ने वाले मनोवैज्ञानिक असर पर एक रिसर्च की है। उन्होंने सतारा के 77 परिवारों की नकुसा नाम की लड़कियों पर सर्वे किया।

लड़कियों का नाम नकुसा रखने का ज्‍यादा चलन

इसमें से 44 लड़कियों का इंटरव्यू लिया गया, जिनकी उम्र 10 साल से ऊपर थी। रिसर्चर शेखर ने बताया, ‘महाराष्ट्र के सतारा में लड़कियों का नाम नकुसा रखने का ज्यादा चलन है, जबकि अन्य क्षेत्रों में यह परंपरा नहीं है। इन लड़कियों में से ज्यादातर लड़कियां अपने परिवार में दूसरे या तीसरे नंबर की लड़कियां थीं।’ रिसर्च में पाया गया कि नकुसा नाम की लड़कियों की उम्र 4 से लेकर 48 तक है, जिसका मतलब है कि यहां दशकों से यह कुप्रथा चल रही है। रिसर्च के मुताबिक, 70% लड़कियों को अपने नाम की वजह से अपमानित होना पड़ता है।

अंधविश्वास के कारण लैंगिक भेदभाव

नकुसा नाम रखने का चलन महाराष्‍ट्र इस अंधविश्वास से भी प्रेरित है कि लड़की का यह नाम रखने से अगला बच्चा लड़का पैदा होगा। यह भगवान को बताने का तरीका है कि अब परिवार को और लड़कियां नहीं चाहिए।

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