इस तरह बॉलीवुड से लेकर छोटे पर्दे पर ‘बा’ बनकर मशहूर हुईं थीं सुधा शिवपुरी

मुंबई: बॉलीवुड से लेकर छोटे पर्दे पर अपने अभिनय की एक अलग पहचान बनाने वाली सुधा शिवपुरी आज हमारे बीच नही हैं. उनका निधन 20 मई 2015 को हो गया था. आज उनका जन्मदिन है. सुधा शिवपुरी को अभिनय की चाहत दिल्ली ले आई. उन्होंने 1963 में एनएसडी में एडमिशन लिया और यहां से उन्होंने एक्टिंग का ज्ञान बटोरा. कम उम्र में ही सुधा के पिता का निधन हो गया था और मां काफी बीमार रहती थीं, लेकिन जैसे तैसे सुधा दिल्ली आईं और नेशनल स्कूल और ड्रामा में उन्होंने दाखिला लिया. 14 जुलाई 1937 को इंदौर में सुधा का जन्म हुआ था, सुधा शिवपुरी को उनके फैंस ‘बा’ के रूप में भी जानते हैं क्योंकि छोटे पर्दे के शो ‘क्योंकि सास भी कभी बहू थी’ से उन्होंने घर-घर में खूब पहचान बनाई.

सुधा शिवपुरी के साथ नेशनल स्कूल और ड्रामा में ओम शिवपुरी भी उनके बैचमेट थे. अभिनय का ज्ञान लेते-लेते दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ने लगीं और फिर इन्होंने शादी रचा ली. 1968 में सुधा और ओम शिवपुरी की शादी हो गई थी और दोनों ने दिल्ली के थियेटर में काम जारी रखा. यहां पर ही दोनों ने दिशांतर के नाम से अपनी थिएटर कंपनी शुरू की, जिनमें उन्होंने कई बेहतरीन नाटक जैसे ‘आधे-अधूरे’, ‘तुगलक’ का निर्माण किया. ओम शिवपुरी भी बॉलीवुड के शानदार एक्टर में से एक थे.

1974 में सुधा शिवपुरी पति ओम शिवपुरी के साथ मुंबई आ गईं. ओम शिवपुरी को बॉलीवुड में खूब काम मिलने लगा. वहीं 1977 में आई फिल्म ‘स्वामी’ से सुधा ने बॉलीवुड में अपना पहला कदम रखा. ‘इंसाफ का तराजू’, ‘हमारी बहू अल्का’, ‘हम दोनों,’ ‘सावन को आने दो’, ये सभी सुधा की कुछ बेहतरीन फिल्में थीं, जिसमें उन्होंने काम किया था. इसके अलावा वो फिल्म ‘पिंजर’ में भी नजर आईं थीं. 1985 में सुधा शिवपुरी ने फिल्म इंडस्ट्री से ब्रेक ले लिया. ‘आ बैल मुझे मार’, और ‘रजनी’ जैसे शो में सुधा ने मां का रोल प्ले किया था. एकता कपूर के साल 2000 में आए शो ‘क्योंकि सास भी कभी बहू थी’ से सुधा शिवपुरी को बड़ा ब्रेक मिला. इस शो से उन्हें इंडस्ट्री में एक अलग पहचान मिली, सुधा से वो ‘बा’ के नाम से जानी जानें लगीं. इसके अलावा भी सुधा ने कई टीवी शो में काम किया जैसे ‘शीशे का घर’, ‘दमन’, ‘वक्त का दरिया’, ‘किस देश में है मेरा दिल’ इन सभी शोज में सुधा नजर आईं.

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