इस तरह 2 सीट से दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी बन गई BJP, यहां पढ़ें पार्टी का पूरा इतिहास

नई दिल्ली: सफलता एक दिन की कमाई नहीं होती है। हर दिन खून-पसीना बहाना पड़ता है। बूंद बूंद से सागर बनता है। चुनावी इतिहास में भारतीय जनता पार्टी ने अपनी कहानी भी इसी तर्ज पर लिखी। जैसे-जैसे भाजपा की सीटें बढ़ती गईं, वैसे-वैसे कांग्रेस की सीटें घटती गईं। 1984 में चार सौ से ज्यादा (415) सीटें जीतने वाली कांग्रेस 2014 में 44 सीटों पर सिमट गई। यही हाल मत प्रतिशत का रहा। छह अप्रैल 1980 को गठित भारतीय जनता पार्टी ने 1984 के लोकसभा चुनाव में मात्र दो सीटों पर सफलता प्राप्त की। उन दो सीटों से शुरू हुआ सफर देश की सत्ता तक पहुंचा।

भारतीय जनता पार्टी का अभ्युदय भारतीय लोकतंत्र की उस आवश्यक शर्त को मजबूती देने का वाहक बना, जिसे द्विदलीय व्यवस्था कहते हैं। त्रिपुरा, उत्तराखंड, बिहार, गोवा, मणिपुर, हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, गुजरात, झारखंड, महाराष्ट्र, असम, अरुणाचल प्रदेश, नगालैंड, मेघालय, सिक्किम और मिजोरम में भाजपानीत राजग की सरकारें हैं। आज दोनों सदनों में भाजपा के 342 सांसद हैं। वहीं कांग्रेस के दोनों सदनों में 94 सांसद हैं और राजस्थान, पंजाब, छत्तीसगढ़, कर्नाटक और मध्यप्रदेश में ही सरकार है।

यह सब एक दिन में नहीं हुआ। 1984 से चुनावी आंकड़ों को खंगाले तो उतारे गए उम्मीदवारों के जीतने के प्रतिशत के मामले में भाजपा ने ही बाजी मारी है। विशेषज्ञ मानते हैं कि राष्ट्रीय फलक पर भाजपा की सफलता की नींव 1991-1992 में पड़ चुकी थी। 1999 में भाजपा के 57 फीसद उम्मीदवारों ने जीत हासिल की थी, जबकि इस दौरान कांग्रेस के 25 फीसद ही उम्मीदवार जीते। 1996 में भाजपा के 34 फीसद उम्मीदवार जीते थे तो कांग्रेस के 26 फीसद। 2004 में कांग्रेसनीत संप्रग-1 ने जीत हासिल की थी और सरकार बनाई थी, उस समय भी भाजपा के 38 फीसद उम्मीदवार जीते। कांग्रेस में यह आंकड़ा 35 फीसद था। 1996 में भी भाजपा उम्मीदवारों को 34.18 फीसद कामयाबी मिली थी तो कांग्रेस को 26.46 फीसद।

यहां से हुई थी शुरुआत

1984 को लोकसभा में भाजपा ने दो सीटें जीती थीं। 1984 के आम चुनाव में देशभर में इंदिरा की सहानुभूति लहर के बावजूद आंध्र प्रदेश के हनामकोड़ा में भाजपा के चंदू पाटला जंगा रेड्डी ने कांग्रेस के पीवी नरसिम्हाराव (पूर्व प्रधानमंत्री) को हराया था। नरसिम्हाराव आंध्र प्रदेश के सीएम भी रह चुके थे। दूसरी सीट गुजरात की मेहसाणा थी। यहां 1984 में एके पटेल ने कांग्रेस के रायनका सागरभाई कल्याणभाई को हराया था। पार्टी को कुल 7.1 फीसद वोट मिले थे।

बढ़ते रहे कदम

1989 में कांग्रेस ने 510 प्रत्याशी खड़े किए और जीते 197। भाजपा ने 225 उम्मीदवार खड़े किए। 85 ने जीत हासिल की। उसके बाद 1991 में चुनाव हुए। यह वह दौर था जब हर तरफ राममंदिर आंदोलन का शोर था। उत्साह से लबरेज भाजपा ने इस चुनाव में 477 उम्मीदवार उतारे, जीते 120। कांग्रेस ने 500 सीटों पर चुनाव लड़ा और 244 सीटें जीती। यानी लगभग 49 फीसद सीटें जीतीं। 1996 का चुनावी साल भाजपा के लिए ऐतिहासिक रहा। इस बार भाजपानीत गठबंधन राजग ने केंद्र में सरकार बनाई। चुनाव में सबसे बड़ी पार्टी के तौर पर उभरने पर तत्कालीन राष्ट्रपति ने भाजपा के पीएम पद के उम्मीदवार वाजपेयी को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किया। वाजपेयी ने पीएम पद की शपथ ली, लेकिन उनकी सरकार केवल 13 दिन की चली। लोकसभा में बहुमत का आंकड़ा नहीं जुटा पाने पर अटल ने राष्ट्रपति को अपना इस्तीफा सौंप दिया था।

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