हर किसान ले केसीसी का लाभ, आय बढ़ाने के लिए जरूरी क्रॉप प्लानिंग

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आगरा। पद्मश्री से सम्मानित गुजरात के जेना भाई पटेल मात्र एक हेक्टेअर क्षेत्रफल में अनार की खेती कर 10-15 लाख का मुनाफा प्रतिवर्ष पा रहे हैं। जबकि एक किसान एक हेक्टेअर क्षेत्रफल में चावल, गेंहू, मूंग आदि की खेती में 5 लाख भी मुनाफा नहीं पा सकता।

2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने का लक्ष्‍य

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के निदेशक टी महापात्र ने यह उदाहरण देते हुआ बताया कि सरकार 2022 तक किसानों की आय को दोगुना करने के लिए प्रयासरत है। यह सम्भव भी है। इसके लिए बारत में जरूरी है कृषि का विविधकरण। यानि क्षेत्र की परिस्थितियों के अनुसार क्रॉप प्लानिंग। वह संजय प्लेस स्थित यूथ हॉस्टल में वोमनीकोम पूना के पूर्व निदेशक बीबी बारिक की पुस्तक (प्रोडक्टिविटी एंड इनकम एनहेंसमेंट थ्रू किसान क्रेडिट कार्ड स्कीम) के विमोचन कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में बोल रहे थे।

अच्‍छा उत्‍पादन होने पर भी नहीं मिल पाता मुनाफा 

टी महापात्र ने डॉ. बीबी बारिख को बधाई दी और साथ ही उपस्थित वनस्पति वैज्ञानिकों को पुस्तक की बातें व खेती की उपज बढ़ाने के लिए किसानों तक पहुंचकर उनसे बातचीत करने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने कहा कि कई उच्छा उत्पादन होने पर भी किसानों को ट्रांसपोर्ट, भंडारण, मार्केट लिंकेज, ओवर प्रोडक्टशन आदि कारणों से उचित मुनाफा नहीं मिल पाता। इसके लिए जरूरी है, जहां जितनी आवश्यकता है उतनी ही उस फसल की पैदावार की जाए। या फिर भंडारण और एक्पोर्ट की व्यवस्थाएं हो।

किसानों को हो रहा लाभ

डॉ. बारिक की पुस्तक से यह तो साबित हो गया है कि केसीसी लोन से किसानों की उपज और आय में लाभ हो रहा है, इसलिए हर किसान को केसीसी का लाभ लेने के लिए भी प्रोत्साहित किया।

गणमान्‍य लोग हुए शामिल

कार्यक्रम का संचालन डॉ. लक्ष्मण सिंह ने किया। इस अवसर पर मुख्य रूप से सरसों अनुसंधान केन्द्र भरतपुर के निदेशक डॉ. पीके राय, डॉ. अरुणोदय, डॉ. विजय सिंह, डॉ. प्रमेन्द्र सिंह, डॉ. संत बहादुर, डॉ. राजवीर सिंह, डॉ. एनके सिंह, डॉ. डॉ. आरके जैन, डॉ. पीके शर्मा, डॉ. आशुतोष भंडारी, डॉ. कायम सिंह, डॉ. धर्मवीर सिंह आदि उपस्थित थे।

केकेसी लने वालों किसानों को हुआ अधिक मुनाफा

डॉ. बीबी बारिक ने फिरोजाबाद, आगरा, मेरठ और गाजियाबाद में 512 किसानों पर सर्वे के आधार पर लिखी पुस्तक में बताया कि वर्षों से साहूकारों द्वारा किया जाने वाला किसानों उत्पीड़न उनकी खेती के उत्पादन पर भी असर डालता है। डॉ. बारिक की पुस्तक प्रोडक्टिविटी एंड इनकम एनहेंसमेंट थ्रू किसान क्रेडिट कार्ड स्कीम के आंकड़े दर्शाते हैं कि सरकारी लोन लेने (किसान क्रेडिट कार्ड) वाले किसानों की फसल की उत्पादकता 45-179 प्रतिशत तक बढ़ है। कुल आय का प्रतिशत 212.31 प्रतिशत बढ़ा है। डॉ. बारिख ने बताया कि आज भी किसानों की बड़ी संख्या सरकारी के लोन के फायदों की जानकारी से अनभिज्ञ है। समय पर लोन चुकाने से जहां अगले वर्ष आप 10 प्रतिशत अधिक लोन पा सकते हैं, वहीं इंश्योरेंस जैसे और भी कई फायदें हैं। बशर्ते किसान लोन के पैसों का सही तरीके से प्रयोग करें और किसानों तक सरकारी योजनाओं की जानकारी पहुंचे।

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