भारत में बढ़ता जा रहा डिप्रेशन, अबतक इतने करोड़ लोग हो चुके हैं इसका शिकार

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नई दिल्ली। हमारे जिंदगी में खुशियां और गम आते रहते हैं। हम थोड़े समय के लिए खुश होते हैं, तो कभी थोड़े समय के लिए उदास। लेकिन जब हमें अवसाद में चले जाते हैं तो यह बेहद खतरनाक हो जाता है। यह बेहद दुखद होता हैइसकी वजह से लोगों की ज़िंदगी से रुचि ख़त्म होने लगती है और रोज़मर्रा के कामकाज से मन उचट जाता है।

भारत में 6 करोड़ से ज्यादा लोग अवसाद से प्रभावित

अवसाद या डिप्रेसन की समास्या पहले ज्यादातर पश्चिमी देशों में देखने को मिलती थी। लेकिन अब यह भारत में भी तेजी से बढती जा रही है। एक रिपोर्ट के अनुसार भारत में 6 करोड़ से ज्यादा लोग अवसाद का शिकार हैं। पहली चुनौती यह जानना है कि आप निराश हैं। लोग चुप रहकर झेलते रहते हैं, पछतावे के सहारे और उन्हें यह एहसास नहीं कि वे अवसाद से पीड़ित हैं।

विश्व मानसिक स्वास्थ्य सम्मेलन के 21वें संस्करण के चौथे और अंतिम दिन डॉ. सुनील मित्तल और प्रसिद्ध बॉलीवुड अभिनेत्री इलियाना डीक्रूज ने मानसिक स्वास्थ्य संबंधी संघर्ष की अपनी कहानी बयां की। मानसिक स्वास्थ्य के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए बॉलीवुड अभिनेत्री इलियाना डीक्रूज महिला सब्स्टेंस पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

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