जलवायु परिवर्तन में आगे है भारत, अन्य देशों को दी टक्कर

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न्यूयॉर्क: जलवायु परिवर्तन का मुख्य कारण हम ही है। कहा जाता है जलवायु में परिवर्तन कई सालों में धीरे धीरे होता है। लेकिन पौधों की लगातार कटाई और जंगल को खेती या मकान बनाने के लिए उपयोग करने के कारण इसका प्रभाव जलवायु में भी पड़ने लगा है। दरअसल, पिछली कुछ सदियों से हमारी जलवायु में धीरे-धीरे बदलाव हो रहा है। यानी, दुनिया के अलग अलग देशों में सैकड़ों सालों से जो औसत तापमान बना हुआ था, वह अब बदल रहा है।

भारत निभा रहा मुख्य भूमिका

जिसके बाद संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस का कहना है कि जलवायु परिवर्तन के खिलाफ लड़ाई में जहां अन्य देश नाकाम रहे हैं, वहीं भारत इसमें प्रमुख भूमिका निभा रहा है। गुटेरेस ने शुक्रवार को कहा, ‘जलवायु परिवर्तन के प्रति हमारी एक बहुत ही दृढ़ प्रतिबद्धता है।’

उन्होंने कहा, ‘जलवायु परिवर्तन हमें पराजित नहीं कर सकता, लेकिन हम इस लड़ाई में जीत भी नहीं पा रहे। जलवायु परिवर्तन से सर्वाधिक नुकसान उन विकासशील देशों को उठाना पड़ रहा है, जो जी77 देशों के समूह के सदस्य हैं।’ उन्होंने कहा कि भारत और चीन जलवायु परिवर्तन की समस्या से निपटने में प्रमुख भूमिका निभा रहे हैं, ताकि हमें जलवायु परिवर्तन के विनाशकारी प्रभाव न झेलने पड़ें।

गुटेरेस एक समारोह में बोल रहे थे, जहां मिस्र ने इक्वोडोर से जी77 का नेतृत्व ग्रहण किया। गुटेरेस ने कहा कि जी77 बहुपक्षवाद की रक्षा का आधारभूत स्तंभ है और बहुपक्षवाद के लिए यह मुश्किल दौर चल रहा है। उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र में सत्ता का संतुलन सुनिश्चित करने के लिए सुरक्षा परिषद में सुधार जरूरी है।

उन्होंने कहा, ‘हम संयुक्त राष्ट्र को अधिक लोकतांत्रिक बनाने को लेकर चिंतित हैं, जिसमें सत्ता अधिक संतुलित तरीके से विभाजित हो और इसके लिए निश्चित तौर पर सुरक्षा परिषद में सुधार आवश्यक है।’ जी77 की अध्यक्षता ग्रहण करते हुए मिस्र के स्थायी प्रतिनिधि अम्र अब्देल्लतीफ अबौलत्ता ने कहा कि संगठन जलवायु परिवर्तन से इस प्रकार निपटने में एकजुट होकर काम करेगा, जिससे विकास को भी बढ़ावा मिले।

उन्होंने कहा कि विकास और गरीबी निवारण संगठन की प्राथमिकता रहेगी। गरीबी दुनिया की अधिकांश समस्याओं का प्रमुख कारण है। इसके लिए विकासशील देशों में रोजगार और उत्पादन क्षमता बढ़ाना जरूरी है। महासभा के अध्यक्ष मिरोस्लाव लाजैक ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र को पेश आने वाली चुनौतियों से निपटने के लिए जी77 की भागीदारी बेहद जरूरी है।

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