भारत बंद : मैं गिड़गिड़ाता रहा लेकिन उन्होंने एक न सुनी और मेरे पिता ने मेरी गोद में दम तोड़ दिया

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बिजनौर। दलितों द्वारा भारत बंद के दौरान अलग-अलग जगहों पर कई लोगों की मौत की खबरें आई हैं। ऐसा ही एक मामला बिजनौर का सामने आया है जहां एक बेटे ने अपने पिता को उसके सामने दम तोड़ते हुए देखा लेकिन वो कुछ न कर सका। उसके पिता की मौत समय पर इलाज़ न मिलने के कारण हुई। लाख बार बोलने पर भी प्रदर्शनकारियों ने एंबुलेंस को अस्पताल नहीं जाने दिया।

भारत बंद

जानकारी के अनुसार बिजनौर के बारुकी गांव निवासी 68 वर्षीय लोक्का सिंह बेहताशा पेट दर्द से तड़प रहे थे और सांस लेने में भी तकलीफ हो रही थी। जिसके बाद बेटे ने अस्पताल ले जाना चाहा तो प्रदर्शनकारियों ने एंबुलेंस को आगे जाने ही नहीं दिया। जिसके बाद पिता को कंधे पर लादकर जब बेटा अस्पताल पहुंचा तो डॉक्टरों ने पिता को मृत घोषित कर दिया।

बेटे ने अपनी आपबीती सुनाते हुए कहा, कि मैंने उनसे विनती की कि मुझे जाने दें। मैंने एक हद तक जाकर उनसे आग्रह किया लेकिन किसी ने मेरी चीख नहीं सुनी, कोई वहां से नहीं हिला। मैं ऐंबुलेंस के अंदर अपने पिता को मौत के करीब जाते हुए देख रहा था। मुझे नहीं पता था कि क्या करना है…मैं किसी भी हालत में उन्हें बचाना चाहता था इसलिए मैंने उन्हें कंधे में उठाया और दौड़ना शुरू किया।

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बता दें, इसी तरह की एक घटना बिहार से है जहां हाजीपुर में दलित प्रदर्शन के दौरान सड़क पर लगाए गए जाम में एक ऐम्बुलेंस फंस गई। ऐम्बुलेंस में बैठी मां रास्ता खाली करने के लिए जोर-जोर से गुहार लगाती रही लेकिन लोग नहीं हटे। बच्चे की सड़क पर ही मौत हो गई।

2 अप्रैल इस बीच केंद्र सरकार ने प्रदर्शनकारी दलितों को शांत करने के क्रम में कहा है कि उसने सर्वोच्च न्यायालय में 20 मार्च के उसके फैसले के खिलाफ एक समीक्षा याचिका दायर की है। सर्वोच्च न्यायालय का ताजा आदेश अनुसूचित जातियों के खिलाफ अत्याचार के मामलों में तत्काल गिरफ्तारी पर रोक लगाता है।

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गुजरात, पंजाब, राजस्थान, झारखंड, मध्यप्रदेश, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, बिहार और ओडिशा नें प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच भिड़ंत की खबर है। हिंसा और आगजनी के कारण राज्यों में सामान्य हालात बिगड़ते दिखाई दिए।

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