भारत विकसित देश बनने की तरफ अग्रसर

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डा. राधेश्याम द्विवेदी

विकास की तीन श्रेणियां :- विकसित या औद्योगिक देश, उन देश को कहा जाता है जिनका कुछ मानकों के अनुसार उच्च विकास दर होता है। इसमें अक्सर आर्थिक मानकों को शामिल किया जाता है। जिन देशों का प्रति व्यक्ति आय या प्रति व्यक्ति सकल घरेलू उत्पाद ज्यादा है वो विकसित या औद्योगिक देशों में गिने जाते हैं। जिन देशों की अर्थव्यवस्था उद्योग धंधों पर निर्भर है वो औद्योगिक देश कहलाते हैं। मानकों में मानव विकास सूचकांक, जिसमें राष्ट्रीय आय के साथ जीवन प्रत्याशा और शिक्षा शामिल है। ये भी विकसित देश बनने के आधार बनते हैं। जो देश विकसित देश बनने की होड़ में हैं उन्हें विकासशील देश कहा जाता है। विकासशील देशों को तीसरी दुनिया के देश भी कहा जाता है। विकसित और विकासशील देशों से अलग एक श्रेणी है अविकसित देश का, जो उक्त दोनों की अपेक्षया पिछड़े होते हैं।

विकासशील देश निम्नस्तरीय होते हैं :- विकासशील देश का प्रयोग किसी ऐसे देश के लिए किया जाता है जिसके भौतिक सुखों का स्तर निम्न होता है। चूंकि विकसित देश की कोई भी एक परिभाषा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त नहीं है, अतः विकास के स्तर इन तथाकथित विकासशील देशों में व्यापक रूप से भिन्न हो सकते हैं। कुछ विकासशील देशों में, औसत रहन-सहन का मानक भी उच्च होता है। ऐसे देश जिनकी अर्थव्यवस्था अन्य विकासशील देशों के मुकाबले उन्नत होती है, परन्तु जिन्होंने अभी तक विकसित देश के संकेत नहीं दिए होते हैं, उन्हें नवीन औद्योगीकृत देशों की श्रेणी में रखा जाता है। संयुक्त राष्ट्र के पूर्व महासचिव कोफी अन्नान ने विकसित देश की निम्न परिभाषा दी है- “एक विकसित देश वह होता है जो अपने सभी नागरिकों को सुरक्षित पर्यावरण में स्वतंत्र और स्वस्थ्य जीवन का आनंद लेने का अवसर देता है।” संयुक्त राष्ट्र के सांख्यिकी प्रभाग के अनुसार, संयुक्त राष्ट्र प्रणाली में “विकसित” और “विकाशील” देशों अथवा क्षेत्रों की उपाधि के लिए स्थापित संविद नहीं है। यह इस तथ्य पर ध्यान देता है कि उपाधियाँ जैसे “विकसित” और “विकासशील” मात्र सांख्यिकीय सुविधा के लिए बनाई जाती हैं और आवश्यक रूप से किसी देश अथवा क्षेत्र के विकास की प्रक्रिया में किसी विशेष स्थिति पर पहुंचने के निर्णय को नहीं बताती है।

70 सालों में हम विकसित देश नहीं बन सके :- ब्रिटिशियों ने भारत आकर 200 सालों तक इसे लूटा और यहां शासन किया। जब वे सन् 1947 में यहां से गए तब उन्होंने पीछे कुछ भी नहीं छोड़ा। भारत को सब कुछ शून्य से शुरु करना पड़ा। भारत अब भी एक विकासशील देश क्यों है यह साबित करने के लिए बार बार यही कारण गिनाए जाते हैं। लेकिन इन सब घटनाओं को बीते 70 साल हो चुके हैं और इतना समय विकासशील और विकसित के अन्तर को कम करने के लिए काफी है। विकिपीडिया के अनुसार एक विकासशील देश वो होता है जिसका अन्य देशों के मुकाबले जीवन स्तर निम्न हो, कम विकसित औद्योगिक आधार हो और कमतर मानव विकास सूचकांक हो। कई मर्तबा किसी भी देश को विकासशील या विकसित के दायरे में रखने के लिए लोगों की संतुष्टि को ही ध्यान में रखा जाता है।भारत हमेशा से ही एक कृषि प्रधान देश रहा है और इसकी अर्थव्यवस्था मुख्यतः कृषि पर ही आधारित रही है। देश की अर्थव्यवस्था को कृषि से हटकर उद्योग आधारित होने की जरुरत है, क्योंकि कृषि सिंचाई के लिए मानसून पर निर्भर रहती है जो खुद बहुत अनिश्चित है।

जाति आधारित आरक्षण एक कारण :- जाति आधारित आरक्षण के कारण हमारा देश उस गति से आगे नहीं बढ़ पा रहा है जिससे यह एक विकसित देश बन सके। यदि हम जाति आधारित आरक्षण प्रणाली को कायम रखना चाहते हैं तो इसकी एक सीमा भी तय करना होगी। किसी भी परिवार को कोटा सिर्फ एक बार ही इस्तेमाल करने की इजाजत होनी चाहिए। इसका अर्थ होगा कि यदि परिवार के किसी व्यक्ति ने एक बार कोटे का प्रयोग कर लिया है तो कोई दूसरा सदस्य उसे उपयोग नहीं कर सकता। जाति आधारित आरक्षण कमजोर तबके को फायदा देने के लिए शुरु किया गया था। जिससे वह एक बार गरीबी से बाहर आ जाए और फिर अपने परिवार की भी मदद कर सके। दूसरी ओर सरकार भी उन्हें शिक्षा के लिए आवश्यक वित्तीय सहायता प्रदान कर सकती है।

भ्रष्टाचार भी एक कारण :- भारत का लगभग हर क्षेत्र भ्रष्टाचार से प्रभावित है। खासतौर पर बुनियादी ढांचा और अचल संपत्ति, धातु और खनन, एयरोस्पेस और रक्षा तथा बिजली और उपयोगिता। भ्रष्टाचार से कारोबार की लागत बढ़ जाती है। भ्रष्टाचार से निपुणता तो कम होती ही है स्वस्थ बाजार का विकास भी नहीं हो पाता। भ्रष्टाचार देश के विकास में एक बड़ी बाधा है। भ्रष्टाचार की वजह से विदेशी निवेशक भारत में व्यापार करने से कतराते हैं। हमारे देश में जब तब ही घोटाले भी उजागर होते रहते हैं। इन घोटालों की वजह से एफडीआई प्रवाह पर असर पड़ता है। भारतीय पुरुषों को महिलाओं का सम्मान करना चाहिए और देश को पुरुषों के मुकाबले महिला अनुपात सुधारने की आवश्यकता है। लड़कियों को जन्म लेने और जन्म होने के बाद जीने का अधिकार होना चाहिए।

बुनियादी शिष्टाचार के प्रति जागरुकता :- हर भारतीय को बुनियादी शिष्टाचार सीखना चाहिए ताकि हमारा देश साफ सुथरा रह सके। यह एक विकासशील और विकसित का सबसे स्पष्ट अन्तर होता है। भारत में हर कोई कहीं भी थूक सकता है और कहीं भी पेशाब कर सकता है। हर इलाके में कूड़े का ढेर देखा जा सकता है। आप आसानी से एक कचरे के खाली डब्बे के पास कूड़ा फैला हुआ देख सकते हैं। कभी कभी हर किसी को शिक्षा देना भी नामुमकिन काम लगता है।

सख्ती से कानून पालन हो :- भारत में ऐसा कोई कानून नहीं है जो कभी सख्ती से लागू किया गया हो। इसलिए कानून बनाने वालों को उसके पालन होने और अच्छे शासन के बारे में सोचना चाहिए।भारत का हर नागरिक, चाहे वो अमीर हो या गरीब, सम्मान का हकदार है। भारत के आर्थिक विकास के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य और औद्योगिक क्षेत्र के विकास के लिए हरसंभव प्रयास करने चाहिए। कई विकासशील अर्थव्यवस्थाओं में शोधकर्ताओं ने शिक्षा और विकास में संबंध पाया है। व्यापार को बढ़ावा देने के लिए एक विकसित सड़क और रेल नेटवर्क होना बहुत आवश्यक है।भारत को कृषि के अलावा अपने निर्माण उद्योग पर भी खासा ध्यान देने की जरुरत है। इस क्षेत्र में विकास होने पर भारत जरुर विकसित देशों की सूची में आ सकता है। भारत को नौकरियों की कमी से निपटने के लिए ज्यादा से ज्यादा उद्यमी बनाने की जरुरत है।भारत को भ्रष्टाचार, रिश्वत और सामाजिक बुराईयों के प्रति पूर्ण असहनशीलता दिखानी होगी। हर भारतीय को अपने देश के प्रति अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी। किसी को भी रिश्वत का साथ ना देते हुए इस आसान रास्ते से बचना होगा।पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम ने सही कहा है कि किसी भी व्यक्ति, धर्म या कट्टरपन से ज्यादा जरुरी देश है। युवा और रचनात्मक नेता भारत को विकसित देश में बदल सकते हैं। भारत तब ही विकास करेगा जब उसके लोग विकास करेंगे।

नई शैक्षणिक संस्थाएं ये गति दे सकती हैं :- आज से डेढ़ सौ साल पहले लॉर्ड मैकाले ने इस समाज को सचमुच बहुत ही शांतिप्रिय और आत्म-सम्मानपूर्ण पाया था। अपनी इन्हीं ताकतों के बल पर विकास यात्रा में हमें आज तक आगे बढ़ते आए हैं। नई-नई शैक्षणिक संस्थाएं हमारे यहां खुल रही हैं। देहरादून मनीपाल, तथा बंगलौर एवं पूना तो शैक्षणिक हब थे ही, अब भोपाल, भिलाई, अहमदाबाद, कानपुर, लखनऊ, रांची, तिरुपति, चैन्ने आदि दर्जनों शहर शिक्षा, विशेषत: तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ रहे हैं। लाखों विद्यार्थी प्रतिवर्ष यहां की शिक्षा से लाभान्वित होकर जन-सामान्य का हिस्सा बन रहे हैं। भले ही उनमें से बहुत से, अपने पढ़े हुए विषयों से जुडे व्यवसायों में ही आगे नहीं काम करें, किंतु उनके जरिए समाज का, सामान्य स्तर तो आगे बढ़ता ही है। रायपुर ही नहीं, पंजाब का लुधियाना, उत्तराखंड का देहरादून वे हरिद्वार, उड़ीसा का भुवनेश्वर, पांडिचेरी, अहमदाबाद, मुम्बई इन सभी शहरों में नई बसाहट की कॉलोनियां, उनके घरों की बनावट, फर्श, खंभे, बाथरूम, अलमारियां, किचन, घरों की सजावट, हरियाली, सभी इस बात का ऐलान करती हैं, कि अब हम एक विकसित देश हैं। हम छोटे से स्थान में भी हर सुविधा मुहैया कराते हैं और स्वास्थ्यप्रद जीवनशैली के अनुरूप रहते हैं। हमारी कॉलोनी में ही जिम, कम्युनिटी हॉल, बगीचा सभी कुछ रहता है, और कहीं-कहीं तो तरणताल भी। दर्जनों मॉल भी यहां खुले हुए हैं।

भारत विकासशील से उपर उठ चुका है :- अबतक दुनिया में भारत की पहचान एक विकासशील देश के तौर पर थी लेकिन विश्व बैंक ने ऐसा मानने से इनकार कर दिया है। विश्व बैंकके मुताबिक अब भारत देश लोअर मिडिल इंकम वाले देशों की सूची में शुमार किया जाएगा। विश्व बैंक के इस फैसले से एक तो भारत अब ब्रिक्स देशों के बीच सबसे नीचे वर्गीकृत हो गया है और साथ ही उसकी आर्थिक स्थिति को पाकिस्तान, बांग्लादेश, भूटान, म्यांमार, जाम्बिया और घाना जैसे देशों के साथ कर दिया गया है। नए वर्गीकरण के मुताबिक जिन देशों का ग्रॉस नैशनल इंकम (प्रति व्यक्ति) 1,045 डॉलर से कम है उन्हें लो इंकम देश या अर्थव्यवस्था कहा जाएगा। वहीं जिन देशों में ये आय 1,046 डॉलर से लेकर 4,125 डॉलर के बीच रहती है उन्हें लोअर मिडिल इंकम देश कहा जाएगा। वहीं जीएनआई 4,126 डॉलर से लेकर 12,735 डॉलर के बीच है तो देश अपर मिडिल इंकम इकोनॉमी कहलाएगी और सबसे ऊपर दुनिया की उन अर्थव्यवस्थाओं को हाई इंकम इकोनॉमी कहा जाएगा जहां जीएनआई 12,736 डॉलर से ऊपर रहती है। विश्व बैंक की हाल में जारी हुई वर्ल्ड डेवलपमेंट इंडिकेटर 2016 रिपोर्ट मे इस नए वर्गीकरण को आधार बनाया गया है।

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