सबसे तेज विकास दर वाली बड़ी अर्थव्यवस्था बना भारत 

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नई दिल्ली| साल के आखिर में विकास दर में सरकार द्वारा कटौती किए जाने के बाद भी वर्ष 2015 भारत के लिए सबसे तेज विकास दर वाली बड़ी अर्थव्यवस्था बनने के वर्ष के रूप में जाना जाएगा। हालांकि लगातार 12 महीने से देश की निर्यात में गिरावट दर्ज की गई है और एक प्रमुख आर्थिक सुधार वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के सामने अब भी अड़चन है।

नियंत्रण में महंगाई

यह साल कुछ और मामलों में सकारात्मक रहा। वैश्विक कच्चा तेल मूल्य दशक के निचले स्तर पर पहुंच गया है और महंगाई नियंत्रण में है। सरकार ने इस साल आर्थिक सुधार करते हुए कई उद्योगों को विदेशी हिस्सेदारी के लिए भी और अधिक खोला। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, देश का वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) मौजूदा कारोबारी साल की प्रथम छमाही में 7.2 फीसदी की दर से बढ़ा, जो गत कारोबारी वर्ष में 7.5 फीसदी बढ़ा था।

विदेशी पूंजी भंडार बढ़ा

देश का विदेशी पूंजी भंडार (फॉरेक्स रिजर्व) नवंबर 2015 में 350 अरब डॉलर से कुछ अधिक दर्ज किया गया, जो जुलाई 2013 में 270 अरब डॉलर था। 2015-16 की प्रथम छमाही में शुद्ध प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) 17 अरब डॉलर का आया, जो गत वर्ष की समान अवधि में 15.8 अरब डॉलर था। दूसरी तिमाही में चालू खाता घाटा जीडीपी का 1.6 फीसदी रहा। लगातार 12 महीने से निर्यात में गिरावट दर्ज की जा रही है। सरकार ने कहा कि इसकी वजह से विकास दर प्रभावित हो रही है, हालांकि आने वाले महीनों में स्थिति में सुधार होगा।

चीन को पीछे छोड़ा 

रुपये के मूल्य में गिरावट के बारे में वित्त मंत्रालय ने मध्यावधि समीक्षा में कहा कि चीन की मुद्रा युआन के अवमूल्यन से ऐसा हुआ है। 2015 में विश्व बैंक, अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष जैसे वैश्विक मंच ने देश की विकास दर के अनुमान को बढ़ाकर 7.5-8 फीसदी कर दिया और कहा कि भारत चीन को पीछे छोड़कर दुनिया की सबसे तेज विकास दर वाली बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया है। केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय ने जीडीपी विकास की गणना के लिए इस साल आधार वर्ष को 2004-05 से बदलकर 2011-12 कर दिया और कहा कि देश का वास्तविक जीडीपी मौजूदा वित्त वर्ष की प्रथम तिमाही में सात फीसदी की दर से बढ़ी। यह विकास दर एक तिमाही पहले 7.5 फीसदी और एक कारोबारी साल पहले की प्रथम छमाही में 6.7 फीसदी थी।

आरबीआई के साथ समझौता

इसी महीने संसद में पेश मध्यावधि समीक्षा में सरकार ने मौजूदा वित्त वर्ष के लिए विकास दर के अनुमान को 8.1-8.5 फीसदी दायरे से घटाकर 7-7.5 फीसदी कर दिया। प्रमुख अवसंरचना क्षेत्र की आठ प्रमुख उद्योगों की विकास दर 2015-16 की प्रथम छमाही में 2.3 फीसदी रही, जो एक साल पहले की समान अवधि में 5.3 फीसदी थी। केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने मौजूदा वित्त वर्ष के लिए पेश किए गए आम बजट में भारतीय रिजर्व बैंक के साथ हुए एक समझौते की घोषणा की, जिसमें यह तय हुआ कि महंगाई दर के लक्ष्य को देखते हुए प्रमुख दर तय करने के लिए रिजर्व बैंक एक मौद्रिक नीति कमेटी बनाएगा।

इस साल जनवरी में रिजर्व बैंक के गवर्नर रघुराम राजन ने करीब दो साल बाद पहली बार मुख्य दर में कटौती और इसके बाद दो और कटौती करते हुए रेपो दर को 6.75 फीसदी कर दिया। इस साल जीएसटी विधेयक को पारित करने को लेकर राजनीति जारी रही। विधेयक लोकसभा में मई में पारित हो गया है, लेकिन राज्यसभा में सत्ता पक्ष को बहुमत नहीं होने के कारण यह वहां पारित नहीं हो पाया है। एक संविधान संशोधन विधेयक होने के नाते इसे दोनों सदनों से दो-तिहाई बहुमत से पारित कराने के बाद आधे राज्यों से भी पारित कराना होगा।

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