भारत को WHO के नए वायु गुणवत्‍ता मानकों पर खरा उतरने का करना होगा सुनियोजित प्रयास

नई दिल्ली: विशेषज्ञों का मानना है कि दुनिया के ज्‍यादातर देश वायु गुणवत्‍ता सम्‍बन्‍धी पुराने मानकों का ही पालन करने में नाकाम रहे हैं। ऐसे में विश्‍व स्‍वास्‍थ्‍य संगठन द्वारा वायु गुणवत्‍ता के सम्‍बन्‍ध में जारी नये मानकों का पालन बहुत कड़ी चुनौती है।

भारत जैसे देश को अगर इन मानकों पर खरा उतरना है तो उसे बहुक्षेत्रीय रवैया अपनाते हुए अधिक सुगठित, सुव्‍यवस्थित और समयबद्ध कदम उठाने होंगे। साथ ही मौजूदा नीतियों में जरूरी बदलाव करते हुए उनके प्रभावी क्रियान्‍वयन पर भी ध्‍यान देना होगा।

विश्व स्वास्थ्य संगठन डब्ल्यूएचओ ने 16 वर्षों के बाद वायु गुणवत्ता संबंधी अपने दिशा निर्देशों (एक्यूजी) में हाल ही में बदलाव किए हैं। यह बदलाव इस बात के सुबूतों को ध्यान में रखते हुए किए गए हैं कि वायु प्रदूषण किस प्रकार स्वास्थ्य के विभिन्न पहलुओं को प्रभावित कर रहा है।

क्योंकि भारत जैसे निम्न-मध्यम आय वाले देशों में बड़े पैमाने पर नगरीकरण तथा आर्थिक विकास के कारण वायु प्रदूषण के संपर्क में आने की स्थिति में बढ़ रही असमानता महसूस की जा रही है। इसकी वजह से देश की आबादी पर बीमारी तथा मृत्यु का असमान बोझ भी पड़ रहा है।

भारत दक्षिण एशिया के उन कुछ देशों में शामिल है जहां देशव्यापी वायु प्रदूषण प्रबंधन नीति यानी नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम लागू है। इसका उद्देश्य शहरों में बढ़ रहे वायु प्रदूषण के स्तरों से निपटना है। इन तमाम कोशिशों के बावजूद भारत के 35 शहर दुनिया के सबसे ज्यादा प्रदूषित 50 नगरों में शामिल हैं।

डब्ल्यूएचओ के नए एक्यूजी के मद्देनजर भारत की क्या रणनीति होनी चाहिए इसे स्वास्थ्य क्षेत्र के परिप्रेक्ष्य में देखने के लिए क्लाइमेट ट्रेंड्स ने मंगलवार 12 अक्टूबर को एक वेबिनार आयोजित किया जिसमें विशेषज्ञों ने नए एक्यूजी को लेकर गहराई से अपने-अपने पक्ष रखे।

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