भारतीय सेना किसी भी जंगी स्थिति से निपटने को तैयार, चीन सीमा पर नए हथियारों से लैस भारतीय सेना

भारतीय सेना के तेवर से साफ है कि वह किसी भी मोर्चे पर चीन के खिलाफ अपनी तैयारियों में कोई कोर कसर नहीं छोड़ना चाहती।

नई दिल्ली: भारत और चीन ने पूर्वी लद्दाख में विवादित गोगरा इलाक़े से अपने-अपने सैनिकों की वापसी कर ली है। एक खबर के मुताबिक हमारे जवान चीन की हर चालबाजी का जवाब देने के लिए मुस्तैद हैं, पिछले एक साल से अधिक समय से लद्दाख़ सरहद पर भारत और चीनी सेना युद्ध के मोर्चे पर तैनात हैं। लेह से 150 किलोमीटर दूर पूर्वी लद्दाख़ के चुशुल सरहद के नज़दीक न्योमा में भारतीय सेना के जवान चीनी सेना की हर हरकत पर कड़ी नज़र बनाए हुए हैं।

पूर्वी लद्दाख (LAC)
पूर्वी लद्दाख (LAC)

पूर्वी लद्दाख (LAC) में जानें भारतीय सेना की तयारी

पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के फॉरवर्ड बेस पर नेगेव लाइट मशीन गन, टेवर-21 और एके-47 असॉल्ट राइफलों से लैस गरुड़ स्पेशल फोर्स के जवानों को तैनात किया गया है,  इसके अलावा में न्योमा में दुश्मन के विमानों और हेलीकॉप्टर को तबाह करने के लिए रूसी मूल के मैन-पोर्टेबल एयर डिफेंस सिस्टम को तैनात किया गया है।  इस एयर डिफेंस सिस्टम से लैस भारतीय वायु सेना का एक जवान फॉरवर्ड बेस पर तैनात है, तेज गति से चलने वाले विमानों और हेलीकॉप्टरों को तबाह कर सकता है। लेह से 200 किलोमीटर दूर पूर्वी लद्दाख़ के सरहद पर भारतीय सेना के सैनिक और टैंक चीन के छक्के छुड़ाने के लिए तैयार हैं।

16000 से लेकर 18000 की फीट की ऊंचाई पर शून्य से नीचे के तापमान में भारतीय सेना के जवान तैनात हैं भले ही इस वक्त भारत और चीनी सेनाओं ने अपने-अपने सैनिकों की वापसी कर ली है, लेकिन भारतीय सेना के तेवर से साफ है कि वह किसी भी मोर्चे पर चीन के खिलाफ अपनी तैयारियों में कोई कोर कसर नहीं छोड़ना चाहती।

T-90 टैंक भीष्म
T-90 टैंक भीष्म

भारत के पास भीष्म कवच

न्योमा में सिंधु नदी के किनारे हजारों मील में फैली घाटी में भारतीय सेना के T-90 टैंक भीष्म T-90 टैंक भीष्म जरूरत पड़ने पर कुछ ही मिनटों में ये टैंक चीन की सरहद में घुसकर उसके ठिकानों को नेस्तनाबूद कर सकते हैं। पिछले एक साल से अधिक समय से पूर्वी लद्दाख में भारत ने दुनिया के सबसे अचूक टैंक माने जाने वाले T-90 भीष्म टैंक को तैनात कर रखा है, इसकी तैनाती के साथ ही लद्दाख में इसे भारतीय सेना का T-90 भीष्म टैंक में मिसाइल हमले को रोकने वाला कवच है। T-90 टैंक को सामान्य रास्ते पर 60 किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से चलाया जा सकता है, जबकि उबड़खाबड़ रास्ते पर इसकी अधिकतम रफ्तार 50 किलोमीटर प्रतिघंटे के करीब होती है, इसे रूस के निझ्नी तागिल में उरालवैगनजावोद फैक्ट्री में बनाया जाता है।

टी-90 टैंक कहीं भी ले जाए जा सकते हैं,  यह जंगी टैंक है। इसे रूस ने बनाया है, यह थर्ड जनेरेशन टैंक की श्रेणी में आता है, इसमें ‘T’ का मतलब है टैंक और इसमें ’90’ इसलिए लगाया गया है क्योंकि यह 1990 के दशक में बना था, साल 1992 में यह पहली बार दुनिया के सामने आया,  इसकी गिनती दुनिया के आधुनिक टैंकों में होती है इसमें तीन लोगों का क्रू होता है, कमांडर, गनर और ड्राइवर। कमांडर सबसे ऊपर होता है, टैंक से कहां निशाना लगाना है, कैसे लगाना है, यह तय करना उसी के जिम्मे होता है। गनर का जिम्मा निशाने के लिए गोले, मिसाइल या रॉकेट को सेट करना होता है। वहीं ड्राइवर का काम टैंक को चलाना होता है।

प्रतीकात्मक
प्रतीकात्मक

भारत में T90 टैंक कैसे आया

साल 2001 में भारत ने पहली बार रूस से T-90 टैंक खरीदने का सौदा किया था। भारत ने रूस को 310 T-90 टैंक का ऑर्डर दिया, इनमें से 124 रूस से बनकर आए जबकि बाकी को भारत में असेंबल किया गया, जिन T-90 टैंकों को भारत में असेंबल किया गया उन्हें ही ‘भीष्म’ नाम दिया गया पहले 10 भीष्म टैंक अगस्त 2009 में सेना में शामिल हुए, साल 2020 के आखिर तक 1640 भीष्म टैंक शामिल करने का प्लान भारत ने बना रखा था, अभी भारत के पास 1000 के करीब T-90 टैंक है। भारत के पास अभी यही सबसे आधुनिक टैंक है। अभी भीष्म टैंक को तमिलनाडु के अवाडी स्थित हैवी व्हीकल फैक्ट्री में बनाया जाता है। भीष्म को और अधिक आधुनिक बनाने के लिए रूस के साथ ही फ्रांस से भी मदद ली जाती है।

T-90 टैंक भीष्म परीक्षण
T-90 टैंक भीष्म परीक्षण

  T-90 की खासियत

1: दुश्मन से बचाव के लिए T-90 टैंक में Kaktus K-6 एक्सप्लोसिव रिएक्टिव आर्मर होता है। इस आर्मर का काम टैंक को दुश्मन के        हमले से बचाना होता है। इसे आसान भाषा में टैंक की बुलेटप्रूफ जैकेट कह सकते हैं। Kaktus K-6 आर्मर पर जब गोली या रॉकेट लगता है तो यह विस्फोट को बाहर की तरफ धकेलता है, इससे टैंक को नुकसान नहीं होता है।

2:  इस की दूसरी खासियत ये है कि ये 2 किलोमीटर तक की रेंज में हैलीकॉप्टर को भी मार गिरा सकते हैं, इसके लिए टैंक में सबसे ऊपर एंटी एयरक्राफ्ट गन लगी है, इससे मेन्युअली और रिमोट दोनों तरह से चलाया जा सकता है। यह गन एक मिनट में 12.7 एमएम की 800 गोलियां चलाती है।

3: 125 मिलीमीटर की मोटाई वाली स्मूदबोर टैंक गन होती है। इसके जरिए कई तरह के गोले और मिसाइलें दागी जा सकती हैं, जैसे-बख्तरबंद गाड़ियों को उड़ाने वाली मिसाइल, एंटी टैंक मिसाइल भी होती है।

4: एक थर्मल इमैजर होता है, थर्मल इमैजर शरीर से निकली गर्मी के आधार पर काम करता है, इसके जरिए दिन और रात में छुपे हुए और 6 किलोमीटर दूरी तक मौजूद दुश्मन को देखा जा सकता है।

5: एक राउंड में सात मिसाइल छोड़ी जा सकती हैं। इसमें मिसाइल ऑटोमेटिक लोड होती है यानी एक बार निशाना लगाने बाद दोबारा रॉकेट या मिसाइल अपने आप लोड हो जाती है।

6: एंटी टैंक गाइडेड मिसाइल भी दाग सकती है,  इससे 100 मीटर से लेकर 4000 मीटर तक की रेंज में निशाना लगाया जा सकता है।  4000 मीटर तक की रेंज को यह मिसाइल 11.7 सेकंड में तय कर लेती हैं।

 

यह भी पढ़ें:UP में ब्राह्मण के बाद अब Dalit Vote Bank के लिए मचा सियासी महासंग्राम

(Puridunia हिन्दीअंग्रेज़ी के एंड्रॉएड ऐप डाउनलोड के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुकट्विटरइंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं)

Related Articles