भारतीय रेल ने पटरी पर दौड़ाया बैटरी से चलने वाला इंजन, 4 घंटे लगातार दौड़ने की है क्षमता

भारतीय रेल ने पटरी पर दौड़ाया बैटरी से चलने वाला इंजन, 4 घंटे लगातार दौड़ने की है क्षमता

चेन्नई: साउथर्न रेलवे ने इलेक्ट्रिक और बैटरी दोनों से चलने वाले ड्यूल मोड रेल इंजन का सफलता पूर्वक ट्रायल किया है। इस ड्यूल मोड इंजन का नाम पासूमाई रखा गया है। इस इंजन की सबसे बड़ी खासियत ये है की ये उन रेल लाइनों पर आसानी से दौड़ सकता है जिसपर अभी तक बिजली के तार नहीं लगाए गए हैं। इस बटेरी इंजन के कम्पार्टमेंट में दो बड़ी बैटरीयां लगायी गई हैं जो इंजन में लगातार पावर सप्लाई करती है।

बैटरी पर 3.5 से 4 घंटे तक चल सकता है यह इंजन –

इस बैटरी इंजन की क्षमता की बात की जाये तो ये 3.5 से 4 घंटे तक लगातार पटरियों पर दौड़ सकती है। इसमें 3-स्टेप स्पीड कंट्रोलर लगा है साथ ही बैटरी को चार्ज करने के लिए दो फास्ट चार्जर भी लगाए गए हैं। एक सामान्य इंजन की तरह ही यह बैटरी से चलने वाला इंजन 24 डिब्बों को खींच सकता है जिनका कुल वजन 1080 मेट्रिक टन होता है।

इसे तैयार करने वाले कर्मचारियों को किया जाएगा सम्मानित –

साउथर्न रेलवे ने इंजन को तैयार करने वाले कर्मचारियों को सम्मानित करने की ऐलान किया है। आपको बता दें कि अभी कुछ महीने पहले ही साउथर्न रेलवे ने एक रेल इंजन को बैटरी से चलने वाले इंजन में परिवर्तित करने का प्रोजेक्ट पास किया था। इसके तहत एक लोको शेड से एक इंजन को चुना गया जिसे अब 23061/WAG5HA इलेक्ट्रिक इंजन में बदल दिया गया है। रेलवे ने बहुत ही कम खर्च में इस इंजन को इलैक्ट्रिक इंजन में बदल दिया है।

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15 किलोमीटर प्रतिघंटे की पकड़ता है रफ्तार –

गौरतलब है कि पासूमाई इंजन बैटरी मोड में रेल के डिब्बों के साथ 15KM/घंटे की रफ्तार से दौड़ सकता है। भारतीय रेल का कहना है कि यह इंजन उन परिस्थितियों में काफी काम का साबित हो सकता है जहां कोई दुर्घटना घटी हो या किसी कारण रेलवे की बिजली कटनी पड़ी हो। रेलवे का मानना है कि यह इंजन देश के रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर को ईको-फ्रेंडली बनाने के लिए अपनी तरह की पहली पहल है। इस तरह के बैटरी से चलने वाले इंजन से रेलवे अपने खर्च को बचाएगी और पर्यावरण को भी इससे कोई नुकसान नहीं होगा।

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