‘किसान आंदोलन की आड़ में पंजाब में उद्योग निशाने पर’

विश्लेषकों की राय है कि मुख्यमंत्री को तोड़फोड़ करने वालों से सख्ती से निपटने की जरुरत है नहीं तो कानून और व्यवस्था पर उंगली उठना लाजिमी है।

नई दिल्ली: किसान आंदोलन को लेकर पंजाब में मोबाइल टावरों की बिजली जबरन काटने और दूरसंचार कंपनी के मुलाजिमों से हाथापाई की रिपोर्टों के बाद मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने किसानों से ऐसा नहीं करने की अपील की है। वहीं विश्लेषक भी मान रहे हैं कि ऐसी हरकतों से आंदोलन तो भटक ही रहा है इस प्रकार की गतिविधियां राज्य की औद्योगिक गतिविधियों पर उल्टा असर डाल सकती हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इससे लोगों को असुविधा होती है और किसानों को कानून अपने हाथों में नहीं लेना चाहिए, हालांकि उन्होंने किसानों के आंदोलन के समर्थन की घोषणा भी कर डाली। विश्लेषकों की राय है कि मुख्यमंत्री को तोड़फोड़ करने वालों से सख्ती से निपटने की जरुरत है नहीं तो कानून और व्यवस्था पर उंगली उठना लाजिमी है और यदि यह सवाल गहराया तो फिर औद्योगिक गतिविधियां प्रभावित हो सकती हैं जिसके उदाहरण पहले भी कई राज्यों में सामने आ चुके हैं।

टॉवर एंड इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोवाइडर एसोसिएशन (टीएआईपीए) ने सरकार से अनुरोध किया था कि राज्य सरकार उन्हें तथाकथित किसानों की गुंडागर्दी से बचाए। इसके बाद ही सरकार की तरफ से यह अपील की गई है। किसान आंदोलन की आड़ में मनसा, बरनाला, फिरोजपुर और मोगा समेत पंजाब के विभिन्न हिस्सों में बीते कुछ दिन से एक विशेष दूरसंचार ऑपरेटर के मोबाइल टावरों को की जा रही बिजली आपूर्ति को काट रहे हैं।

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