हिंसा पर मध्य प्रदेश सरकार सख्त, अब मीडिया पर भड़काऊ संदेश जारी करने पर कार्रवाई होगी

भोपाल। देश भर में चल रहे दलित आंदोलन ने हंगामा मचा रखा है। भारत बंद के दौरान कई जगह हिंसक प्रदर्शन भी हुए हैं। इस दौरान मध्य प्रदेश के कई हिस्सों में भड़की हिंसा के बाद राजधानी के जिलाधिकारी सुदाम खांडे ने मीडिया पर भड़काऊ संदेश जारी होने पर कार्रवाई करने के लिए प्रतिबंधात्मक धारा 144 लागू कर दी है।
दलित आंदोलनभोपाल के पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) जयदीप प्रसाद ने मंगलवार को संवाददाताओं को बताया कि सोशल मीडिया, इलेक्ट्रॉनिक और प्रिंट मीडिया पर आपत्तिजनक और भड़काऊ पोस्ट या बयान दिए जाते हैं तो इस कार्रवाई की जाएगी।

प्रसाद ने बताया कि वॉट्सएप, फेसबुक, ट्विटर सहित अन्य सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक, सांप्रदायिक सद्भाव बिगाड़ने वाले मैसेज प्रसारित करने पर कार्रवाई होगी। विवादित पोस्ट को फॉरवर्ड या लाइक करने या उस पर कमेंट करने पर भी प्रतिबंध रहेगा।

ज्ञात हो कि सोमवार को भारत बंद के दौरान ग्वालियर-चंबल जिलों में कई स्थानों पर भड़की हिंसा में अब तक सात लोगों की मौत हो चुकी है और 100 से ज्यादा घायल हुए हैं।

ग्वालियर, भिंड और मुरैना के कई क्षेत्रों में कर्फ्यू लगा हुआ है। इसके अलावा आधा दर्जन जिलों में निषेधाज्ञा 144 लगाई गई है।

क्या है पूरा मामला

सुप्रीम कोर्ट ने 20 मार्च को अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम-1989 के दुरुपयोग को रोकने को लेकर गाइडलाइन जारी की थीं। यह सुनवाई महाराष्ट्र के एक मामले में हुई थी। ये गाइडलाइंस फौरन लागू हो गई थीं। सरकारी कर्मी के लिए – तुरंत गिरफ्तारी नहीं। सरकारी कर्मचारियों की गिरफ्तारी सिर्फ सक्षम अथॉरिटी की इजाजत से होगी। आम लोगों के लिए – एक्ट के तहत आरोपी सरकारी कर्मचारी नहीं हैं, तो उनकी गिरफ्तारी एसएसपी की इजाजत से होगी। संगठनों की मांग है कि सरकार सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ अपील करे। जो नियम पहले थे, वे यथावत लागू हों।

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