अंतरिम बजट में मिला शिक्षा को ठेंगा

DISCLAIMER– ये आर्टिकल पूरी तरह से तथ्यों पे आधारित, चुनावी मतभेदों से कोई लेना देना नहीं..

बीते 5 सालो में , और अभी भी मोदी सरकार ने काम कम, और अपने कामो की चर्चा और प्रचार बहुत लगन से किया है. गली, मोहल्लो, दुकानों, चौराहो पे आपको बोहत सारे विज्ञापन “नमो, नमो” करते दिख ही जायेंगे.

लेकिन कमाल की बात है या यु कहे की सवाल की बात है कि एक ऐसा सेक्टर जिससे हमारे  महान भारत का उज्जवल भविष्य जुड़ा हुआ है. उसका ना तो ज़िक्र मोदी जी के मन की बातो में होता है और ना ही झूठा प्रचार ही करने की कोशिश करी जाती है.

हम बात करना चाहते है उस पर जिसकी बात कम या यू कहे की हुई ही नही है.

शिक्षा. किसी भी व्यक्ति विशेष के विकास का वो स्तंभ है जिसे पिछले 4 सालो में सरकार की अजीबो-गरीब-अनदेखी-अनसुनी योजनाओ ने खोखला कर दिया है.

5 साल, शिक्षा का कैसा हुआ हाल?

लेटेस्ट, 2019-20 के बजट- शिक्षा के छेत्र में 76,800 करोड़ का एलान वित्त मत्री पियूष गोयल ने किया है.भले ही अंतरिम बजट 2019 में 10 प्रतिशत का इजाफा हुआ है. लेकिन हायर एजुकेशन में किसी विशेष घोषणा या पालिसी का अता पता नही है.

नीचे दिए डाटा से अंदाज़ा लगाया जा सकता है की कैसा शिक्षा का विकास केवल पतन की दिशा में हुआ है:

यूनियन बजट का %                GDP का %

  • 2013-14:                     4.77                                0.71
  • 2014-15:                     4.61                                0.67
  • 2015-16:                     3.89                                0.50
  • 2016-17:                     3.66                                0.48
  • 2017-18:                     3.17                                0.47
  • 2018-19:                     3.48                                0.45

 

स्कूली शिक्षा के लिए अच्छी खबर

बता दें कि अंतरिम बजट में स्कूल और उच्च शिक्षा के लिए संयुक्त रूप से 93,847.64 करोड़ रुपये आवंटित किए गए. वहीं स्कूली शिक्षा और साक्षरता विभाग के लिए 56,386 रुपये का बजट आवंटित हुआ, जो पिछले साल के 50,000 करोड़ रुपये से ज्यादा है. चूंकि पिछले साल का बजट बाद में बढ़ा कर 50,113.75 करोड़ रुपये कर दिया गया था.

 

लेकिन दीप स्टडी करने पे साफ़ देखा जा सकता है की-

कोई खास फंड नहीं

दरअसल 10 फीसदी बढ़े इस बजट से सरकार की ओर से पिछले साल शुरू की गईं शोध परियोजनाओं में भी योगदान दिया जाएगा. हालांकि केंद्रीय विश्वविद्यालयों की फंडिंग में कोई बदलाव नहीं किया गया है. सरकार ने उच्च शिक्षण संस्थानों में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) के लिए 10 फीसदी आरक्षण लागू करने और केंद्रीय विश्वविद्यालयों में 25 फीसदी सीटें बढ़ाने का आदेश दे दिया है, लेकिन इन संस्थानों के बजट में पिछले साल से कोई बदलाव नहीं दिखा.

आईआईटी को कुछ नहीं मिला

बजट में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (आईआईटीज) के लिए आवंटित राशि में आंशिक बढ़ोतरी की गई है. बता दें कि पिछले आईआईटी के लिए 5613 करोड़ रुपये आवंटित किए गए थे, जबकि इस साल इसे बढ़ाकर 6,143.03 करोड़ रुपये कर दिया गया है. हालांकि, नए आईआईटीज स्थापित करने के लिए कोई राशि आवंटित नहीं हुई.

केंद्रीय विश्वविद्यालयों को कुछ नहीं

केंद्रीय विश्वविद्यालयों के लिए पिछले साल 6,445.23 करोड़ रुपये आवंटित किए गए थे, जिसे बाद में बढ़ाकर 6,498.46 करोड़ कर दिया गया. केंद्रीय विश्वविद्यालयों के लिए इस वर्ष 6604.46 करोड़ रुपये आवंटित किए गए.

मिड-डे मिल में की भरपाई

वहीं सरकार ने मिड डे मिल यानी मध्याह्न भोजन योजना के लिए पिछले साल 10500 करोड़ रुपये आवंटित किए गए थे, जो भी पिछले साल घटा दिए गए थे. इस साल इसे 11,000 करोड़ रुपये कर दिया गया है.

 

 

बीते सालो का हाल-ए-बयां

  1. बीते सालो के शिक्षा बजट में आए नेशनल एजुकेशन मिशन में भी चमकते हुए दिखने वाली ये नीचे दी हुई इस्किमे भी UPA के बजट से कॉपी-पेस्ट की हुई है, वो भी सर्फ और सर्फ कागज़ पे. ज़मीनी हकीकत में इन्हें ढूंढ पाना मुश्किल है.
  • साक्षर भारत
  • सर्व शिक्षा अभियान
  • राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा
  • टीचर्स ट्रेनिंग प्रोग्राम

2. बीते शिक्षा बजट में सरकार ने UGC के ज़रिये 5 सेंट्रल विश्वविद्यालयों, 21 स्टेट यूनिवर्सिटीज और 24 डीम्ड यूनिवर्सिटीज को स्वतन्त्र स्टेटस मुहैया कराया है. जोकि शिक्षा के निजीकरण की ओर बढ़ते मज़बूत कदम है.                                                            फिर ये इंस्टिट्यूट अपनी मनमानी करने के लिए स्वतन्त्र होंगे.

3. बीते 4 सालो में कुछ ऐसे भी मामले सामने आए थे जब राजस्थान सरकार ने 225 स्कूल PPP मॉडल में शुरू किए है

एमपी सरकार ने 15000 सरकारी स्कूलो को बंद कराया.

ऐसी ही खबरे महाराष्ट्र, ओडिशा, HP, हरयाणा से भी सुनने में आई है.

हमारा मानना बस ये है की, किसी भी देश के भविष्य को सुरक्षित केवल शिक्षा से ही किया जा सकता है. सरकार कोई भी हो अगर शिक्षा को नज़रंदाज़ करती है तो, हमें उन्हें मजबूर करना होगा की वो ऐसा ना कर सके.

क्यूंकि,

“ज़रूरी नही रौशनी चरागों में हो,,

शिक्षा से भी घर रौशन होते है “

 

(तुबा की रिपोर्ट)

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