International Nurses Day 2021: जानें किसे बोला जाता है ‘द लेडी विद द लैंप’

अंतर्राष्ट्रीय नर्स दिवस नोबल नर्सिंग सेवा की शुरूआत करने वाली फ्लोरेंस नाइटिंगेल के सालगिरह पर हर साल 12 मई को दुनिया भर में मनाया जाता है

नई दिल्ली: अंतर्राष्ट्रीय नर्स दिवस (International Nurses Day) नोबल नर्सिंग सेवा की शुरूआत करने वाली फ्लोरेंस नाइटिंगेल (Florence Nightingale) के सालगिरह पर हर साल 12 मई को दुनिया भर में मनाया जाता है। जनवरी 1974 में 12 मई को अंतर्राष्ट्रीय नर्स दिवस मनाने के लिए चुना गया था। हर साल ICN (International Council of Nurses) अंतर्राष्ट्रीय नर्स दिवस पर एक किट तैयार करके उसे वितरित करता है। किट में हर जगह नर्सों द्वारा उपयोग के लिए शैक्षिक और सार्वजनिक सूचना सामग्री होती है।

द लेडी विद द लैंप

फ्लोरेंस नाइटिंगेल (Florence Nightingale) का जन्म 12 मई 1820 को हुआ था। इनकी मृत्यु 13 अगस्त 1990 को हुई थी। फ्लोरेंस को आधुनिक नर्सिग आन्दोलन का जन्मदाता माना जाता है। दया व सेवा की प्रतिमूर्ति फ्लोरेंस नाइटिंगेल ‘द लेडी विद द लैंप’ (दीपक वाली महिला) Lady with the lamp के नाम से प्रसिद्ध हैं। इनका जन्म एक समृद्ध और उच्चवर्गीय ब्रिटिश परिवार में हुआ था। लेकिन उच्च कुल में जन्मी फ्लोरेंस ने सेवा का मार्ग चुना। 1845 में परिवार के तमाम विरोधों व क्रोध के पश्चात भी उन्होंने अभावग्रस्त लोगों की सेवा का प्रण लिया। दिसंबर 1844  में उन्होंने चिकित्सा सुविधाओं को सुधारने बनाने का कार्यक्रम आरंभ किया था। बाद में रोम के प्रखर राजनेता सिडनी हर्बर्ट से उनकी मित्रता हुई।

 

मोमबत्ती जलाकर घायलों की सेवा

फ्लोरेंस का सबसे महत्वपूर्ण योगदान क्रीमिया के युद्ध में रहा। अक्टूबर 1854 में उन्होंने 38 स्त्रियों का एक दल घायलों की सेवा के लिए तुर्की भेजा। इस समय किए गए उनके सेवा कार्यो के लिए ही उन्होंने ‘लेडी विद द लैंप’ (Lady with the lamp) की उपाधि से सम्मानित किया गया। जब चिकित्सक चले जाते तब वह रात के गहन अंधेरे में मोमबत्ती जलाकर घायलों की सेवा के लिए उपस्थित हो जाती।

 

लेकिन युद्ध में घायलों की सेवा सुश्रूषा के दौरान मिले गंभीर संक्रमण ने उन्हें जकड़ लिया था। 1859 में फ्लोरेंस ने सेंट थॉमस अस्पताल में एक नाइटिंगेल प्रक्षिक्षण विद्यालय की स्थापना की। इसी बीच उन्होंने ‘नोट्स ऑन नर्सिग पुस्तक’ (Notes on Nursing Book) लिखी। जीवन का बाकी समय उन्होंने नर्सिग के कार्य को बढ़ाने व इसे आधुनिक रूप देने में बिताया। 1869 में उन्हें महारानी विक्टोरिया ने रॉयल रेड क्रॉस से सम्मानित किया। 90 वर्ष की आयु में 13 अगस्त, 1990 को उनका निधन हो गया।

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क्रीमिया युद्ध

उनसे पहले कभी भी बीमार घायलों के उपचार पर ध्यान नहीं दिया जाता था किन्तु इस महिला ने तस्वीर को सदा के लिये बदल दिया। उन्होंने क्रीमिया के युद्ध के समय घायल सैनिको की बहुत सेवा की थी। वे रात-रात भर जाग कर एक लालटेन के सहारे इन घायलों की सेवा करती रही इस लिए उन्हें लेडी विथ दि लैंप का नाम मिला था उनकी प्रेरणा से ही नर्सिंग क्षेत्र में महिलाओं को आने की प्रेरणा मिली थी।

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