International Women’s Day: मिसाल बनी UP की प्रगति, ‘बैंगनी रंग के रिबन’ पहनकर क्यों मनाते हैं जश्न

अन्तरराष्ट्रीय महिला दिवस (International Women's Day) हर साल 8 मार्च को मनाया जाता है, UP के मुरादाबाद की प्रगति पूरे समाज के सामने एक मिसाल पेश की हैं

मुरादाबाद: अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस (International Women’s Day) हर साल 8 मार्च को मनाया जाता है। विश्व के अलग-अलग क्षेत्रों में महिलाओं (Women) के प्रति सम्मान, प्रशंसा और प्यार प्रकट करते हुए इस दिन को महिलाओं के आर्थिक, राजनीतिक और सामाजिक उपलब्धियों के उपलक्ष्य में इस दिन को उत्सव (Festival) के तौर पर मनाया जाता है।

समाज में मिसाल बनी प्रगति

उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh)  के जिले मुरादाबाद (Moradabad) ​की प्रगति (Pragati) पूरे समाज के ​सामने एक मिसाल पेश कर रही हैं, 2010 में हाईटेंशन तारों की चपेट में आने से अपने दोनों हाथ गंवाने के बाद आज वो ना सिर्फ आम लोगों की तरह अपने सारे काम खुद करती हैं बल्कि जरूरतमंद बच्चों को पढ़ाती भी हैं।

किसी भी महिला को कभी खुद को किसी से कम नहीं समझना चाहिए। मैं अपना सारा काम खुद करती हूं। मैं ट्यूशन पढ़ाती हूं और अपना सारा खर्च खुद उठाती हूं। मैं एक शिक्षिका बनना चाहती हूं।

‘बैंगनी रंग के रिबन’ पहनकर Celebrate

कुछ जगहों पर International Women’s Day अपना राजनीतिक मूलस्वरूप खो चूका है, और अब यह मात्र महिलाओं के प्रति अपने प्यार को अभिव्यक्त करने हेतु एक तरह से मातृ दिवस और वेलेंटाइन डे (Valentine’s Day) की ही तरह बस एक अवसर बन कर रह गया हैं। हालांकि, अन्य जगहों में, संयुक्त राष्ट्र द्वारा चयनित राजनीतिक और मानव अधिकार विषयवस्तु के साथ महिलाओं के राजनीतिक एवं सामाजिक उत्थान के लिए अभी भी इसे बड़े जोर-शोर से मनाया जाता हैं। कुछ लोग ‘बैंगनी रंग के रिबन’ (Purple Ribbons) पहनकर इस दिन का जश्न मनाते हैं।

 

1909 में पहला दिवस

सबसे पहला अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस (International Women’s Day), न्यूयॉर्क शहर में 1909 में एक समाजवादी राजनीतिक कार्यक्रम के रूप में आयोजित किया गया था। 1917 में सोवियत संघ ने इस दिन को एक राष्ट्रीय अवकाश घोषित किया और यह आसपास के अन्य देशों में फैल गया। इसे अब कई पूर्वी देशों में भी मनाया जाता है।

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महिलाओं को वोट देने का अधिकार

अमेरिका (America) में सोशलिस्ट पार्टी (Socialist Party) के आह्वान पर, यह दिवस सबसे पहले 28 फरवरी 1909  को मनाया गया। इसके बाद यह फरवरी के आखिरी इतवार के दिन मनाया जाने लगा। 1910 में सोशलिस्ट इंटरनेशनल के कोपेनहेगन सम्मेलन में इसे अन्तर्राष्ट्रीय दर्जा दिया गया। उस समय इसका प्रमुख ध्येय महिलाओं को वोट देने का अधिकार दिलवाना था, क्योंकि उस समय अधिकतर देशों में महिला को वोट देने का अधिकार नहीं था।

1917 में रूस की महिलाओं ने, महिला दिवस (Women’s Day) पर रोटी और कपड़े के लिये हड़ताल पर जाने का फैसला किया। यह हड़ताल भी ऐतिहासिक (Historical) थी। जार ने सत्ता छोड़ी, अन्तरिम सरकार ने महिलाओं को ‘वोट’ (Vote) देने के अधिकार दिया। उस समय रूस में जुलियन कैलेंडर चलता था और बाकी दुनिया में ग्रेगेरियन कैलेंडर (Gregorian Calendar)। इन दोनों की तारीखों में कुछ अन्तर है। जुलियन कैलेंडर (Julian Calendar) के मुताबिक 1917 की फरवरी का आखिरी इतवार 23 फरवरी को था जब की ग्रेगेरियन कैलैंडर के अनुसार उस दिन 8 मार्च थी। इस समय पूरी दुनिया में (यहां तक रूस में भी) ग्रेगेरियन कैलैंडर चलता है। इसी लिये 8 मार्च को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस (International Women’s Day) के रूप में मनाया जाने लगा।

Women’s Day

प्रसिद्ध जर्मन एक्टिविस्ट क्लारा जेटकिन (German activist Clara Jetkin) के जोरदार प्रयासों के बदौलत इंटरनेशनल सोशलिस्ट कांग्रेस (International Socialist Congress) ने साल 1910 में महिला दिवस के अंतर्राष्ट्रीय स्‍वरूप और इस दिन पब्लिक हॉलीडे को सहमति दी। इस फलस्‍वरूप 19 मार्च, 1911 को पहला IWD ऑस्ट्रिया, डेनमार्क और जर्मनी में आयोजित किया गया। हालांकि महिला दिवस की तारीख को साल 1921 में फाइनली बदलकर 8 मार्च कर दिया गया। तब से महिला दिवस (Women’s Day) पूरी दुनिया में 8 मार्च को ही मनाया जाता है।

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