दो संतों की टक्कर में चेले पड़े हैं चक्कर में  

SANT.ALD

इलाहाबाद। संत वह जो संसारिक सुख सुविधा, भोग विलास से ऊपर उठ चुका हो। लेकिन इस जमाने में संत भी अपनी सुविधाओं के लिए लड़ते हैं झगड़ते हैं और एक दूसरे के सम्मान में भी पीछे नहीं हटते।

सनातन धर्म के अनुयायियों के आस्था का केंद्र व आदि गुरु शंकराचार्य की तपस्थली ज्योतिषपीठ एक बार फिर सुर्खियों में हैं। माघ मेला में ज्योतिषपीठ की सुविधा को लेकर आदि गुरु शंकराचार्य स्वरूपानंद और जगद्गुरु स्वामी वासुदेवानन्द सरस्वती आमने-सामने आ गए हैं।

ज्योतिषपीठ को मिलने वाली सुविधाओं पर दोनों ही संत अपना हक जता रहे हैं। ऐसे में धर्मगुरुओं की आपसी तकरार के बीच अब सबकी नजर जिला प्रशासन के फैसले पर टिक गई है।
तीर्थराज प्रयाग में लगने वाले माघ मेले में ज्योतिषपीठ को विशेष सुविधा मुहैया कराई जाती है।

माघ मेले में मिलने वाली  सुविधाओं की मांग वासुदेवानन्द सरस्वती पहले की भांति इस वर्ष भी मेला प्रशासन से कर रहे हैं।  दूसरी ओर न्यायालय के फैसले का हवाला देते हुए शंकराचार्य स्वरूपानन्द सरस्वती ज्योतिषपीठ को मिलने वाली सुविधाओं पर अपना हक जता रहे हैं। दोनों संतों की मांगों को लेकर जिला प्रशासन पसोपेश में फंस गया है, की ज्योतिषपीठ को मिलने वाली सुविधा किसे उपलब्ध कराई जाय। वही लोगों की नजर जिला प्रशासन के निर्णय पर ही टिकी है।
क्या है मामला
ज्योतिषपीठ पर न्यायालय ने स्वरूपानंद के पक्ष में दिया था फैसला माघ मेला क्षेत्र में त्रिवेणी मार्ग पर जगद्गुरु स्वामी वासुदेवानन्द सरस्वती ज्योतिषपीठाधीश्वर के रूप में शिविर लगाते रहे हैं। उन्हें प्रशासन से शंकराचार्य की सारी सुविधाएं मिलती रही हैं। इधर शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानन्द सरस्वती व स्वामी वासुदेवानन्द के बीच ज्योतिष्पीठाधीश्वर को लेकर चल रही कानूनी लड़ाई में 5 मई 2015 को फैसला आया। इसमें सिविल जज ‘सीनियर डिवीजन’ गोपाल उपाध्याय ने शंकराचार्य स्वरूपानन्द के पक्ष में निर्णय देते हुए स्वामी वासुदेवानन्द सरस्वती को छत्र व चंवर लगाने से रोक दिया। यह मामला अभी भी हाईकोर्ट में लम्बित है लेकिन शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानन्द सरस्वती कोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए ज्योतिषपीठ को मिलने वाली सारी सुविधाएं मांग रहे हैं। अभी तक वह मेला क्षेत्र में द्वारिका पीठाधीश्वर के रूप में शिविर लगाते रहे हैं। लेकिन स्वामी वासुदेवानन्द का तर्क है की कोर्ट ने अपने आदेश में ज्योतिषपीठ का पीठाधीश्वर स्वामी स्वरूपानन्द को नहीं माना है। ऐसे में पहले के जैसी स्थिति आगे भी कायम रहनी चाहिए। इसको लेकर कोर्ट में याचिका दायर की गई है।
स्वामी वासुदेवानन्द के प्रवक्ता ओमकार नाथ त्रिपाठी का कहना है कि स्वामी स्वरूपानन्द को कोर्ट ने अभी तक ज्योतिषपीठाधीश्वर नहीं माना है। ज्योतिषपीठ की परंपरा व व्यवस्था से जुड़े स्वामी वासुदेवानन्द को पहले की तरह सुविधा मिलनी चाहिए। अगर सुविधा पहले के अनुसार नहीं दी गई तो न्यायालय के आदेश के नाम पर धर्म व ज्योतिषपीठ के साथ यह बहुत बड़ा धोखा होगा।

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