इराक ने चेताया, तुर्की ने सेना नहीं हटाई तो होगी सैन्य कार्रवाई

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1016664353बगदाद। इराक के विदेश मंत्री इब्राहीम अल-जाफरी ने बुधवार को तुर्की से एक बार फिर कहा कि वह इराकी क्षेत्र से अपनी सेना हटा ले। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि तुर्की या तो इराक की संप्रभुता का सम्मान करे या सैन्य कार्रवाई का सामना करने के लिए तैयार रहे।

समाचार एजेंसी सिन्हुआ की रिपोर्ट के अनुसार, जाफरी ने बगदाद में संवाददाता सम्मेलन में कहा कि इराक किसी भी संकट से बचने के लिए शांतिपूर्ण संवाद का सहारा लेगा। लेकिन, अगर हमारी संप्रभुता और हमारी संपदा की रक्षा के लिए तुर्की के साथ जंग हम पर थोपी गई तो हम उस पर विचार करेंगे।

लेकिन, जाफरी ने ‘तुर्की के साथ समान हितों’ का जिक्र करते हुए ‘इराकी संप्रभुता के उल्लंघन के खिलाफ (शांतिपूर्ण) कार्रवाई की किसी समय सीमा’ को तय करने से इनकार किया।

दोनों देशों के बीच दिसंबर के शुरू में तनाव बढ़ गया था। इसकी वजह तुर्की द्वारा इराकी शहर मोसुल के पास बाशिका में शिविर लगाकर अपने सैनिकों और बख्तरबंद वाहनों को तैनात करना था। तुर्की ने इस शिविर में आतंकवादी संगठन इस्लामिक स्टेट (आईएस) से लड़ने के लिए सुन्नी और कुर्द लड़ाकों को प्रशिक्षित करने की बात कही थी।

इराक के निनेवाह प्रांत की राजधानी मोसुल पर जून 2014 से आईएस का कब्जा है। इराक का कहना है कि तुर्की की सेना की तैनाती को इराकी सरकार की अनुमति नहीं मिली है, इसलिए तुर्की को सेना को तुरंत हटाना चाहिए। जबकि, तुर्की का कहना है कि ये सैनिक, प्रशिक्षकों की नियमित रूप से तैनात होने वाली प्रक्रिया का हिस्सा हैं।

इस मामले में इराक के प्रधानमंत्री हैदर अल-अबादी पर शिया मिलिशिया का दबाव है जो देश में विदेशी सेना की मौजूदगी के खिलाफ हैं। इराक में आईएस के खिलाफ लड़ाई की कमान शियाओं के हाथ में है।

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