मैं गिड़गिड़ाती रही, वो मेरी इज्‍जत से खेलता रहा

नादिया मुराद को ISIS ने अग़वा कर लिया था। कई महीनों की यौन प्रताड़ना झेलने के बाद वह किसी तरह उनके चंगुल से भागने में सफल रहीं। और अब दुनिया को यज़ीदियों पर हो रहे ज़ुल्म की कहानियां सुना रही हैं। एक ख़ास कार्यक्रम आउटलुक के मैथ्यू बैनिस्टर को नादिया ने सुनाई अपनी आपबीती। कथित ISIS के चरमपंथियों के आने से पहले मैं अपनी मां और भाई बहनों के साथ उत्तरी इराक़ के शिंजा के पास कोचू गांव में रहती थी। हमारे गांव में अधिकतर लोग खेती पर निर्भर हैं।

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ISIS ने यज़ीदी पर हमला किया

मैं तब छठी कक्षा में पढ़ती थी। बीते साल अगस्त में शिंजा पर ISIS के हमले के बाद अधिकतर यज़ीदी परिवार घर छोड़कर चले गए। हमारे गांव में कोई 1700 लोग रहते थे और सभी लोग शांतिपूर्वक रहते थे। हमें किसी तरह की कोई चेतावनी नहीं मिली थी कि आईएस शिंजा या हमारे गांव पर हमला करने जा रहा है। 3 अगस्त 2014 की बात है, जब ISIS ने यज़ीदी पर हमला किया। कुछ लोग माउंट शिंजा पर भाग गए, लेकिन हमारा गाँव बहुत दूर था। हम भागकर कहीं नहीं जा सकते थे। हमें 3 से 15 अगस्त तक बंधक बनाए रखा गया।

धर्म बदलने की दी गई चेतावनी

खबरें आने लगी थीं कि उन्होंने तीन हज़ार से ज़्यादा लोगों का क़त्ल कर दिया है और लगभग 5,000 महिलाओं और बच्चों को अपने क़ब्ज़े में ले लिया है। तब तक हमें हक़ीक़त का अहसास हो चुका था। इस दौरान चरमपंथी आए और हमारे हथियार क़ब्ज़े में ले लिए। हम कुछ नहीं कर सकते थे। हम पूरी तरह घिर चुके थे। हमें चेतावनी दी गई कि हम दो दिन के अंदर अपना धर्म बदल लें। 15 अगस्त को मैं अपने परिवार के साथ थी। हम बहुत डरे हुए थे क्योंकि हमारे सामने जो घटा था, उसे लेकर हम भयभीत थे। उस दिन ISIS के लगभग 1000 लड़ाके गांव में घुसे। वे हमें स्कूल में ले गए। स्कूल दो मंज़िला था।

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इस्लाम क़बूल करना चाहिए और फिर मर जाना चाहिए

हम जानते थे कि जो कमरा छोड़कर जाएंगे वो भी मारे जाएंगे। क्योंकि वो नहीं मानते कि यज़ीदी से इस्लाम क़बूलने वाले असली मुसलमान हैं। वो मानते हैं कि यज़ीदी को इस्लाम क़बूल करना चाहिए और फिर मर जाना चाहिए। महिला होने के नाते हमें यक़ीन था कि वे हमें नहीं मारेंगे और हमें ज़िंदा रखेंगे और हमारा इस्तेमाल कुछ और चीज़ों के लिए करेंगे।

वो हमारा उत्पीड़न और बलात्कार कर रहे थे

रात में ISIS के लोग हमें मोसुल ले गए। हमें दूसरे शहर में ले जाने वाले ये वही लोग थे जिन्होंने मेरे भाइयों और मेरी मां को क़त्ल किया था। वो हमारा उत्पीड़न और बलात्कार कर रहे थे। मैं कुछ भी सोचने समझने की स्थिति में नहीं थी। वे हमें मोसुल में इस्लामिक कोर्ट में ले गए। जहाँ उन्होंने हर महिला की तस्वीर ली। मैं वहां महिलाओं की हज़ारों तस्वीरें देख सकती थी। हर तस्वीर के साथ एक फ़ोन नंबर होता था। ये फ़ोन नंबर उस लड़ाके का होता था जो उसके लिए जिम्मेदार होता था।

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मैं गिड़गिड़ाती रही, लेकिन मेरी एक नहीं सुनी

ISIS के हमलों के बाद यज़ीदी समुदाय के वजूद पर ही ख़तरा पैदा हो गया है। तमाम जगह से आईएस लड़ाके इस्लामिक कोर्ट आते और तस्वीरों को देखकर अपने लिए लड़कियां चुनते। फिर पसंद करने वाला लड़ाका उस लड़ाके से मोलभाव करता जो उस लड़की को लेकर आया था. फिर वह चाहे उसे ख़रीदे, किराए पर दे या अपनी किसी जान-पहचान वाले को तोहफ़े में दे दे। पहली रात जब उन्होंने हमें लड़ाकों के पास भेजा। बहुत मोटा लड़ाका था जो मुझे चाहता था, मैं उसे बिल्कुल नहीं चाहती थी। जब हम सेंटर पर गए तो मैं फ़र्श पर थी, मैंने उस व्यक्ति के पैर देखे। मैं उसके सामने गिड़गिड़ाने लगी कि मैं उसके साथ नहीं जाना चाहती। मैं गिड़गिड़ाती रही, लेकिन मेरी एक नहीं सुनी गई।

मुसलिम परिवार ने भागने में मेरी मदद की

एक हफ़्ते बाद मैंने भागने की कोशिश की। वे मुझे कोर्ट मे ले गए और सज़ा के तौर पर छह सुरक्षा गार्डों ने मेरे साथ बलात्कार किया। तीन महीने तक मेरा यौन उत्पीड़न होता रहा। इस इलाक़े में चारों तरफ़ ISIS के लड़ाके ही फैले हैं। तो इन महीनों में मुझे भागने का मौक़ा ही नहीं मिला। एक बार मैं एक पुरुष के साथ थी। वो मेरे लिए कुछ कपड़े ख़रीदना चाहता था, क्योंकि उसका इरादा मुझे बेच देने का था। जब वो दुकान पर गया। मैं घर पर अकेली थी और मैं वहाँ से भाग निकली। मैं मोसुल की गलियों में भाग रही थी। मैंने एक मुस्लिम परिवार का दरवाज़ा खटखटाया और उन्हें अपनी आपबीती सुनाई। उन्होंने मेरी मदद की और कुर्दिस्तान की सीमा तक पहुंचाया।

 

(बीबीसी से साभार)

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