जानिए ISIS के लिए कैसा रहा साल 2015

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वाशिंग्‍टन। पेरिस हमलों से दुनिया को खौफजदा करने वाले इस्‍लामिक स्‍टेट (आईएस) के लिए यह साल बहुत अच्‍छा नहीं रहा। जनवरी में आईएस की गिरफ्त से उसका 14 फीसदी इलाका छिन गया। हालांकि उसने अब भी कई अहम जगहों पर अपनी पकड़ मजबूत बनाए रखी है।

यह खुलासा रक्षा शोध एजेंसी IHS ने किया है। इसके मुताबिक अमेरिकी गठबंधन वाले हवाई हमलों ने आईएस को कई इलाके छोड़ने के लिए मजबूर किया है। आईएस को सबसे बड़ा झटका उत्‍तरी सीरिया में मिला है। यहां कुर्द लड़ाकों ने अमेरिकी हवाई हमलों की मदद से आईएस को तुर्की की सीमा से हटने के लिए मजबूर किया है।

हालांकि सीरिया के रक्‍का और इराक के माेसुल जैसे अहम शहरों पर आईएस की पकड़ अब भी मजबूत है। आईएस सीरिया और तुर्की की सीमा पर भी कब्‍जा जमाने की कोशिशें लगातार जारी रखे है।

रक्‍का और मोसुल में आईएस ने खलीफा के नाम पर तमाम तरह के टैक्‍स लोगों पर थोप दिए हैं। इस टैक्‍स के पैसों से आईएस दुनिया में खौफ फैला रहा है। यही वजह है कि इन दो शहरों को कब्‍जे में रखने के लिए आईएस पूरी ताकत झोंके हुए है।

इसी साल नवंबर को आईएस को दूसरा बड़ा झटका भी लगा। कुर्दिश और यजीदी लड़ाकों ने इराक के सिंजर पर कब्‍जा कर लिया है। यह एक अहम जीत है, क्‍योंकि इसी इलाके से निकलने वाली सड़क ईराक और सीरिया को जोड़ती है। हालांकि आईएस ने इसका तोड़ निकाल लिया है और अपने कब्‍जे वाले इलाकों की छोटी सड़कों के सहारे सीमा पार कर रहे हैं।

IHS के विशेषज्ञ कोलंब स्‍ट्रैक बताते हैं,’चारों तरफ से घिरने पर आईएस लड़ाई से कदम खींच लेता है और दूसरे इलाके पर हमला करने की तैयारी करने लगता है।’ इसका एक उदाहरण मई महीने में देखने को मिला। उस वक्‍त आईएस सीरिया और तुर्की सीमा पर अपने कब्‍जे वाले इलाकों में हार का मुंह देख रहा था। यहां लड़ने की बजाय अाईएस ने अपनी रणनीति बदल ली।

अपने लड़कों के सहारे आईएस ने सीरिया के एतिहासिक और रणनीतिक रूप से अहम शहर पलम्‍यारा पर कब्‍जा कर लिया। इसके बाद ईराक का सुन्‍नी बहुत रामादी भी सरकार के हाथों से छीन लिया।

स्‍ट्रैक बताते हैं कि सुन्‍नी इलाकों में आईएस का रुतबा ज्‍यादा है। वहां उन्‍हें समर्थन भी हासिल है। हालांकि यहां भी कुर्दिश इलाकों को कब्‍जे में लेना आईएस के लिए टेढ़ी खीर साबित होता है। आईएस के दूसरी रणनीति बताते हुए स्‍ट्रैक कहते हैं, ‘बमबारी के जरिए आईएस अपने लड़ाकों को बचाकर दूसरे इलाकों में जंग के लिए भेज देता है।’

आईएस को तीसरा झटका र्इराक के तिकरित में मिला। यहां अप्रैल महीने में सेना के जवानों ने आईएस को पीछे हटने पर मजबूर किया। फिलहाल आईएस रामादी में अपना वजूद बचाए रखने के लिए जंग जारी रखे हुए है।

दरअसल, आईएस को काबू करने में बड़ी मुश्किल खुद र्इराक के लोग हैं। यहां की सुन्‍नी आबादी से आईएस को समर्थन मिला हुआ है। इसी वजह से सेना और पैरामिलिट्री फोर्स के लिए आईएस को पकड़ना मुश्किल हो रहा है। बीते दिनों तिकरित में भी यही हुआ। यहां आईएस लड़ाकों को पकड़ने पहुंची सेना को सुन्‍नी आबादी के विरोध का सामना करना पड़ा था़।

रामादी पर सेना कब्‍जा करने को आतुर है। उम्‍मीद जताई जा रही है कि दिसंबर के आखिर तक रामादी भी आईएस की गिरफ्त से छुड़ा लिया जाएगा। हालांकि आईएस इस लड़ाई को लम्‍बा खींचकर सेना को पछाड़ना चाहता है।

विशेषज्ञ बताते हैं कि आईएस की कमर तोड़ने के लिए रक्‍का और मोसुल को उसके कब्‍जे से छुड़ाना होगा। अमेरिकी गठबंधन वाली सेना हवाई हमलों के जरिए इन दोनों शहरों को अपने नियंत्रण में लेने की कोशिश में है। हालांकि अभी तक सफलता नहीं मिल सकी है। मुमकिन है अमेरिका जमीनी लड़ाई भी जल्‍द शुरू कर दे।

रक्षा विशेषज्ञ माइकल और हेनलन कहते हैं, ‘मोसुल को 2016 की शुरुआत तक अमेरिका अपने नियंत्रण में लेना चाहता है। इससे र्इराक की सेना को भी नई ताकत मिलेगी और वह आईएस के खिलाफ नई रणनीति के साथ जंग कर सकेगी।’

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