Israel-Palestine Conflict : Violent समूहों और HAMAS के उग्र रवाइये से दोनों देशों के लोग प्रभावित

नई दिल्ली: इजराइल और फिलिस्तीन के बीच जारी संघर्ष ( Israel-Palestine Conflict ) की ख़बरों ने आपको खौफजदा कर दिया होगा पर इस हिंसात्मक, भयानक और मानवनाशी संघर्ष के पीछे की वजहों से आप पूरी तरह शायद रूबरू नहीं होंगे. दुनिया इस समय दो धड़े में है. एक इजराइल के साथ दूसरा, फिलिस्तीन के साथ. पर एक बार फिर ये दोनों देश अपने नक़्शे की वजह से पिछले 8 दिनों से संघर्ष कर रहे है. इस संघर्ष के दो मुख्य जिम्मेदार एक दोनों देशों के वोइलेंट ग्रुप दूसरा गाजा में HAMAS संघठन के मिलिटैंट्स हैं.

एक तरफ इजरायल अपनी सुरक्षा में गाजा शहर पर प्रहार कर रहा है, तो दूसरी तरफ इजरायल के अंदर ही फिलिस्तीन के लोग इजरायल की मिलेट्री के खिलाफ प्रोटेस्ट कर रहे हैं. वेस्ट बैंक में फिलिस्तीन समर्थक इजरायल के खिलाफ नारेबाजी कर रहे हैं. हालात ये हैं कि इजरायल में रहने वाले फिलिस्तीनी समर्थकों ने कई शहरों में दंगे फैला दिए हैं और सेना से उनकी झड़पें हो रही हैं. यहाँ जगह जगह विद्रोह करने वाले फिलिस्तीन समर्थक आगजनी कर रहे हैं और इजराइली मिलेट्री पर पत्थरबाजी कर रहे हैं.

आपको बताते हैं क्या है गाजा पट्टी और वेस्ट बैंक

मिस्र और इज़राइल के मध्य भूमध्य सागरीय तट पर स्थित गाजा पट्टी 225 sqare Km. में फैला हुआ फिलिस्तीन शासित क्षेत्र है. जिस पर लगभग 2 मिलियन लोग रहते हैं. ये लोग फर्स्ट अरब-इजराइल युद्ध के शरणार्थी और उनके वंशज हैं. यह हमास संगठन द्वारा कंट्रोल्ड क्षेत्र है, जिसे इज़राइल में एक आतंकी संगठन माना जाता है. 1947 के बाद जब UN ने फिलिस्तीन को एक यहूदी और एक अरब राज्य में बाँट दिया था तो उसके बाद से फिलिस्तीन और इज़राइल आपस में संर्घषरत हैं.

जिसमें एक अहम मुद्दा इज़राइल को यहूदी राज्य के रूप में मान्यता देना है तो दूसरा गाजा पट्टी पर अधिकार को लेकर विवाद है. लगभग एक दशक से यह क्षेत्र इज़राइली नाकाबंदी के अधीन है. चारों तरफ से इस क्षेत्र को बंद किया गया है. तीन तरफ से इजराइल और एक तरफ से इजिप्ट ने इसे ब्लॉक किया हुआ है. गाज़ा पट्टी से लोगों और सामान का आवागमन सख्त रूप से प्रतिबंधित है.

गाजा स्ट्रिप पर जिस हमास ग्रुप का कब्ज़ा है इजराइल के अलावा USA, Europe, Japan भी इन्हें आतंकी संगठन मानते हैं. लेकिन कुछ देश ऐसे भी हैं जेसे China, Russia, Iran, Norway जो हमास को आतंकी नहीं मानते. मोटे तौर पर समझा जाये तो हमास और इजराइल मिलेटरी दोनों एक दूसरे पर बमबारी और राकेट फेकते रहते हैं. हालाँकि इसराइल का डिफेन्स सिस्टम बेहद मजबूत है.

वेस्ट बैंक की बात की जाये तो ये क्षेत्र छोटे-छोटे अलग-अलग भाग में बंटा है. कुछ हिस्सा फिलिस्तीन का है कुछ पर इज़राइल का कब्जा है. इस हिस्से पर इज़राइल का रुख उतना सख्त इसलिए नहीं है क्योंकि बीच बीच में इज़राइली लोग भी यहाँ रहते हैं.

क्या चल रहा है अभी

13 अप्रैल को इजराइली पुलिस यरूशलम की पवित्र अल अक्सा मस्जिद में घुसी. यहाँ लोगों से बहस हुई फिर मारपीट की गई. अल अक्सा दुनिया में मुस्लिम समुदाय की आस्था का बड़ा केंद्र है. इसलिए इजराइली पुलिस के दमन का विरोध शुरू हुआ. अंदर ही अंदर आग भड़कने लगी. हमास जवाबी कार्रवाई की तैयारी में जुट गया। ये अल अक्सा मस्जिद इसराइल के यहूदियों की पवित्र नगरी यरूशलम में है.

इसी यरूशलम में इसराइल के राईट विंग नेता 10 मई को रैली निकाल रहे थे. इजराइल मिलेट्री का कहना था इस मस्जिद से उन्हें इस रैली पर पत्थर फेकने की सूचना मिली थी जिसके बाद उन्होंने यहाँ एक बार फिर घुसना पड़ा. इस घटना के बाद हमास ग्रुप ने इजराइली सरकार को कहा यहाँ से पुलिस हटा लें नहीं तो हम हमला कर देंगे. लेकिन वेस्ट बैंक में रहने वाले फिलिस्तीनी जो उस समय अल अक्सा में थे उनका हमास से इतना लेना देना नहीं है.

लेकिन हमास ने उनका नेतृत्व और हमदर्द बताने को लेकर इजराइली सरकार को धमका दिया. यही नहीं कुछ घंटों बाद गाजा स्ट्रिप से हमास ने इजराइल पर राकेट भी फायर करने शुरू कर दिए. इनकी संख्या हज़ारों में थी. जिसके जवाब में इजराइल ने भी गाजा पर एयर स्ट्राइक कर दी.

वहीँ अब खबर है कि इजरायल ने सोमवार को एक बार फिर गाजा सिटी में भीषण हवाई हमले कर हमास के कई आतंकी सुरंगों को नष्ट कर दिया. इजरायली फाइटर जेट्स ने सोमवार सुबह गाजा सिटी के कई स्थानों पर भीषण हवाई हमले किए. इजरायल और हमास के बीच एक सप्ताह पहले शुरू हुए संघर्ष के दौरान एक दिन में यह सबसे भीषण हमला है. इसके कुछ ही घंटे पहले इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने गाजा पर काबिज चरमपंथी ग्रुप HAMAS के खिलाफ चौथे युद्ध के जोर पकड़ने का संकेत दिया था. करीब 10 मिनट तक विस्फोटों से शहर का उत्तर से दक्षिण का इलाका थर्रा उठा. एक बड़े इलाके पर भीषण बमबारी हुई और यह 24 घंटे पहले हुए हवाई हमले से भी भीषण थी जिसमें 42 फलस्तीनियों की मौत हो गई थी.

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