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भारत का पहला स्‍पेस पार्क तैयार

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मैसूर। भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी ने बेंगलुरू में 100 एकड़ क्षेत्र में स्पेस पार्क का निर्माण किया है। यहां निजी कंपनियां इसरो के सेटेलाइट और रॉकेट के लिए कलपुर्जे बनाने का संयंत्र लगाएगी।

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान केंद्र (इसरो) के सेटेलाइट केंद्र के निदेशक एम. अन्नादुरई ने यहां आयोजित विज्ञान कांग्रेस के दौरान बताया, “बेंगलुरू में व्हाइटफील्ड के नजदीक निजी क्षेत्र के लिए स्पेस पार्क बनाया गया है। यह 100 एकड़ से ज्यादा क्षेत्र में फैला हुआ है। अगले महीने इसका उद्घाटन किया जाएगा।”

इसरो आने वाले दिनों में नेविगेशन, रिमोट सेंसिंग इत्यादि सेवाओं के लिए कई सेटेलाइट लांच करने की तैयारी में है। इस पार्क में निजी कंपनियां इन सेटेलाइटों के लिए कलपुर्जो का निर्माण करेगी ताकि अंतरिक्ष तकनीक के क्षेत्र में तेजी से काम हो।

अन्नादुरई ने कहा, “हमने उनसे (निजी कंपनियों) कहा है कि वे अपनी क्षमता को तेजी से बढ़ाए या फिर स्पेस पार्क में अपना संयंत्र लगाएं और हमारी सुविधाओं का इस्तेमाल कर हमारे सेटेलाइटों के लिए कलपुर्जे बनाएं।”

अन्नादुरई आगे कहते हैं, “यह स्पेस पार्क सरकार के ‘मेक इन इंडिया’ पहल को आगे बढ़ाएगा। पिछले कई सालों से सरकारी कंपनी एचएएल (हिन्दुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड) और दूसरी निजी कंपनियां हमारे लिए सेटेलाइट और रॉकेटों के कलपुर्जे का निर्माण करते आ रहे हैं।”

अन्नादुरई एक वरिष्ठ वैज्ञानिक हैं जो भारत के मंगलयान और चंद्र मिशन से जुड़े रहे हैं। उन्होंने मैसूर विश्वविद्यालय में आयोजित विज्ञान कांग्रेस अधिवेशन में ‘अंतरिक्ष विज्ञान, तकनीक और अनुप्रयोग’ विषय पर छात्रों और प्रतिनिधियों को संबोधित किया।

इसरो रॉकेट और सेटेलाइट की 80 फीसद से अधिक कलपुर्जो का निर्माण निजी क्षेत्र से करवाती है। इसरो के लिए देश भर के 500 से ज्यादा छोटे, मझोले और बड़ी इकाईयां कलपुर्जो का निर्माण करती हैं।

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