संसार और मानवता को बचाने के लिए हिंदुत्व को बचाना जरूरी: राजेश्वर दयाल

संसार और मानवता को बचाने के लिए हिंदुत्व को बचाना जरूरी है। यहां सारमऊ स्थित आरएसएस के सेवा प्रकल्प सेवा समर्पण संस्थान महारानी लक्ष्मीबाई वनवासी छात्रावास के अतिथिगृह के लोकार्पण कार्याक्रम को सम्बोधित करते हुए

झांसी: उत्तर प्रदेश के झांसी में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के विभाग संघचालक राजेश्वर दयाल ने हिंदुत्व पर मंडराते संकट को रेखांकित करते हुए मंगलवार को कहा कि संसार और मानवता को बचाने के लिए हिंदुत्व को बचाना जरूरी है। यहां सारमऊ स्थित आरएसएस के सेवा प्रकल्प सेवा समर्पण संस्थान महारानी लक्ष्मीबाई वनवासी छात्रावास के अतिथिगृह के लोकार्पण कार्याक्रम को सम्बोधित करते हुए विभाग संघ चालक ने कहा कि हिंदुत्व में जीवन का आधार भोगवाद नहीं बल्कि मोक्ष है, यही विचार मनुष्यता को बचाये है। हमें जो कुछ मिला है वह समाज से ही मिला है इसलिए हमें समाज की सेवा के विचार से अच्छे कार्यों के लिए खर्च करना चाहिए। वनवासी कल्याण आश्रम साढ़े ग्यारह करोड़ लोगों की सेवा करते हैं। वनवासी कल्याण आश्रम का दायित्व सभी वनवासियों को जागरूक करते हुए सेवा करने का है।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए वनवासी कल्याण आश्रम के संगठन मंत्री मनीराम पाल ने बताया कि इस आश्रम की शुरूआत 1952 में हुई थी और 1977-78 में क्षेत्र पूरे देश भर में फैल गया। सभी जिलों व प्रखंडों में करीब डेढ़ लाख वनवासी गांव हैं, इनमें से 60 हजार गांव सीधे वनवासी कल्याण से जुड़े हुए हैं। पूरे देश में 20 हजार सेवा प्रकल्प कार्य कर रहे हैं। इनमें पूर्णकालिक, अंशकालिक और कुछ विद्यार्थी आदि मिलाकर करीब 08 हजार कार्यकर्ता सेवा कर रहे हैं।

वनवासियों के ईसाई और मुस्लिम तत्त्वों द्वारा कराये जा रहे धर्मांतरण से जनजातियों को बचाने के काम में आश्रम लगा है। षड्यंत्र के तहत वनवासियों को यह बताया जाता है कि वह हिंदू नहीं है। उनका अपना अलग धर्म है। षडयंत्र यह है कि यदि वनवासी हिंदू या मुस्लिम नहीं बन सकते हैं तो उन्हें कम से कम हिंदू न कहलाने दिया जाए। कहीं-कहीं अभी उन्हें बताया जाता है कि यदि हिंदू लिखोगे तो सुविधाएं नहीं मिलेगी।

गांव के लोगों के बीच जाकर उन्हें जागरुक करना

ऐसे माहौल में शहर के लोगों को विशेष कार्यक्रमों के माध्यम से गांव के लोगों के बीच जाकर उन्हें जागरुक करना चाहिए, इससे जनजाति के लोगों को संबल मिलेगा। अगर ऐसा नहीं हुआ तो दूरियां बढेगी और यह हिन्दुत्व के लिए ठीक नहीं है। उन्होंने कहा कि गांव से जुड़कर समाज को जोड़ने का कार्य होगा।

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एक वर्ष से चल रहा वनवासी छात्रावास

मनीराम ने बताया कि झांसी में वनवासी छात्रावास पिछले एक वर्ष से चल रहा है, ललितपुर में भी शुरु हो गया है। तालबेहट में भी जमीन ले ली गई है। इस प्रकार वनवासियों की सेवा के लिए सेवा भारती तत्पर है। उन्होंने बताया कि छात्रावास के प्रणेता रामेश्वर दयाल जी हैं। सेवा समपर्ण संस्थान के अध्यक्ष रमेश ने कहा कि भारत में करीब 600 जनजातियां निवास करती हैं और उनकी सेवा का यह विचार आंदोलन है।

वनवासी परिश्रम कर जीवन यापन

वनवासी परिश्रम कर जीवन यापन करना पसन्द करते हैं। वह किसी के सामने हाथ फैलाना पसंद नहीं करते न ही किसी प्रकार का संरक्षण उनकी आदत है। हमें वनवासी सेवा का ध्येय मन में रखते हुए देशसेवा करनी है। इसके लिए शारीरिक, आर्थिक व बौद्धिक दान की नितान्त आवश्यकता है।

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इस अवसर पर ये रहे उपस्थित

इस अवसर पर सह प्रान्त कार्यवाह इंजी.अनिल श्रीवास्तव, श्रीराम हुण्डैत जी, ध्रुव अग्रवाल, प्रमोद अग्रवाल, योगेन्द्र शरण अग्रवाल, सुरेन्द्र खण्डेलवाल, नरेन्द्र गुप्ता, रामकिशुन निरंजन, प्रभाकर त्रिपाठी, दीपक त्रिपाठी समेत दर्जनों स्वयंसेवक उपस्थित रहे।

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