लगता था बन जाएगी बात… तो लड़कियां चुनने के लिए आसाराम अपनाता था ये कोड्स

0

नई दिल्ली। बाबा आसाराम या आसूमल थाऊमल सिरुमलानी किसी भी नाम से बुला लो लेकिन बाबा को तो लोग अब आरोपी या बलात्कारी बाबा ही बुलाएंगे। बता दें बाबा को कल यानि 25 अप्रैल को कोर्ट ने नाबालिग से बलात्कार के जुर्म उम्रकैद की सजा सुनाई है। सज़ा के बाद से सोशल मीडिया से लेकर न्यूज रिपोर्ट्स तक बाबा के काले कारनामों के चर्चे फैले हैँ।

ऐसे में बाबा की कुछ और बातें भी सामने आई हैं। कुछ समर्थक अभी भी कह रहे हैं कि बाबा निर्दोष हैं , उनका समर्थन कर रहे हैं। उन लोगों के लिए आज भी वह भगवान का प्रत्यक्ष रुप हैं। लेकिन इसी भगवान के कुछ ऐसे कोडवर्डस निकलकर आए हैं कि जिसे पढ़कर आप भी हैरान रह जाएंगे। कहा जाता है बाबा बात करने के लिए कुछ कोडवर्डस का इस्तेमाल करते थे। जिसके इशारे सिर्फ उनको और उनको साधकों को ही समझ आते थे। आइए बताते हैं क्या है वह कोडवर्डस और उनके मतलब भी-

पहला कोडवर्ड बाबा का था ‘400’

बाबा के कोडवर्डस स्पेशली लड़की को सेलेक्ट करने के लिए होते थे। इनके माध्यम से वह अपनी पसंद से लड़कियों को चुनता था। बाबा का पहला कोडवर्ड ‘400’… इसका मतलब होता था कि बाबा से फोन पर बात करना, लेकिन जानकारी के मुताबिक तो बाबा के पास फोन था ही नहीं। ये कोड मिलाने पर बाबा के रसोइए के पास फोन लगता था, लेकिन रसोइए को सिर्फ को फोन उठाने की इजाजत थी न कि बात करने की। कहा जाता है शिवा, शिल्पी या शरतचंद को जब भी बात करने होती थी वह इसी नंबर पर मिलाते थे। जिसके बाद से वह यही कहते थे कि काम करने की मंजूरी मिल गई है।

जिस दिन मासूम के साथ घटना घटी उस दिन भी आसाराम की उस नंबर से इन तीनों आरोपी से बात हुई। जांच में पुलिस ने मई, जून और जुलाई की 400 की कॉल डिटेल सबूत के तौर पर पेश की थी, जिसमें बताया गया था कि इस नंबर पर तीनों आरोपियों की कभी बातचीत नहीं होती थी। लेकिन सच्चाई तो यही है कि साजिश रचने से लेकर पीड़ित के साथ दुष्कर्म वाले दिन तक आसाराम की उस नंबर से इन तीनों से बात होती रही।

दूसरा कोडवर्ड बाबा का था समर्पण…

कहा जाता है जब भी कोई लड़की बाबा को पसंद आती थी तो सेवकों को समर्पित करने का आदेश दिया जाता है। बाद में अगर वह लड़की समर्पित होने के लिए तैयार हो जाती थी तो बाबा से उसे अकेले मिलने के लिए बाबा की मड़ई में भेजा जाता था।

कथावाचक आसाराम

ऐसे में जब आसाराम अपने किसी लड़की से बात करते थे और उनको लगता था कि बात बन जाएगी तब फिर वह जिम्मेदारी अपनी साधक शिल्पी को दे देते थे। जिसके बाद वह उसे समर्पण के लिए राजी करती थी।

तीसरा कोडवर्ड बाबा का था नया नाम…

जानकारी के मुताबिक आसाराम कभी किसी लड़की को उसके रियल नाम से नहीं बुलाते थे। ठीक उसी तरह जिस तरह उन्होंने पीड़िता को जट्टी और संचिता गुप्ता को शिल्पी जैसा नाम दे रखा था।

चौथा पासवर्ड बाबा का था टार्च की रोशनी…

बाबा हमेशा किसी को भी टार्च की रोशनी से बुलाता था। हमेशा वह अपनी ध्यान की कुटिया में अंधेरे करके रखता था। कभी किसी को भी बुलाना वह आवाज न देकर टार्च की रोशनी से बुलाते थे।

loading...
शेयर करें